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पहलगाम और झीरम कांड की घटना में पूर्व सीएम बघेल ने बताई समानता, बोले वहां धर्म पूछ कर मारे हैं और यहां नाम पूछ कर मारे थे,,,, पढ़िए संविधान बचाओ रैली की पूरी खबर….

सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल, कहा: मोदी सरकार में सवाल पूछने वाले को देशद्रोही करार कर देते हैं, पर हम नहीं रुकेंगे, संविधान बचाने के लिए हमेशा है तैयार

बालोद। संविधान बचाओ रैली कार्यक्रम के तहत बालोद पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। तो वही लगातार कई तरीकों से संविधान को बदलने और कमजोर करने की साजिश बताते हुए कहा कि मोदी सरकार संविधान को कमजोर करने में लगी हुई है। लेकिन कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। हम संविधान बचाने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने हाल ही में हुए पहलगाम की आतंकी घटना और 12 वर्ष पहले हुए बस्तर के झीरम घाटी में नक्सली हमले की समानता बताई। कहा कि दोनों घटनाओं में समानता है। पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूछ पूछ कर मारा है तो नक्सलियों ने हमारे साथियों को नाम पूछ पूछ कर मारा था। आज भी उन शहीदों को न्याय नहीं मिला है। यह कितना बड़ा दुर्भाग्य है।

झीरम कांड में नक्सलियों ने किया था नंगा नाच, अब तक शहीदों को नहीं मिला न्याय , अपराधी नहीं आए पकड़ में

उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि पहलगाम और झीरम कांड की घटना में काफी समानता है। पहलगाम की घटना में आतंकी 26 आम नागरिकों को धर्म पूछ पूछ कर मारे हैं। ऐसी ही 25 मई ठीक 12 साल पहले झीरम घाटी में हमारे नेता गए थे वहां नक्सलियों ने भी उनका नाम पूछ पूछ कर मारा था। झीरम और पहलगाम में यह समानता है। वहां नाम पूछ कर मारे थे और यह धर्म पूछ कर मारे हैं। नहीं तो नक्सलियों और आतंकियों में कोई ऐसा पूछ कर नहीं मारते वे तो सीधा बम फोड़ते हैं और भाग जाते हैं। ठीक 12 साल बाद दोनों घटना में इस तरह की समानता जो सवाल खड़े करती है। दोनों जगह सुरक्षा का भी अभाव था। पैरामिलिट्री फोर्स कश्मीर के बाद छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सबसे ज्यादा तैनात है । लेकिन किसी को सुरक्षा के लिए नहीं भेजा गया। झीरम घाटी में नक्सली 4 घंटा तक नंगा नाग करते रहे । लेकिन तत्कालीन सरकार ने 25 किलोमीटर दूर स्थित जगदलपुर से कोई सुरक्षा फोर्स नहीं भेजी। कश्मीर में भी सेना कैंप है। लेकिन केंद्र सरकार के हाथ में है। क्योंकि अब कश्मीर केंद्र शासित राज्य बन चुका है। पहलगाम में कोई सुरक्षा नहीं दी गई। ये सब दुर्भाग्य की बात है। कुछ भाजपाई सवाल उठाते हैं जब मुंबई में 26/11 का हमला हुआ तो पाकिस्तान पर हमला क्यों नहीं किया गया। मैं कहता हूं उस समय हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तो मुंबई में एनएसजी उतार दिए थे और आतंकियों को भून दिए थे और कसाब बाद में पकड़ा गया उसे भी फांसी पर लटकाया गया। लेकिन पहलगाम में एनएसजी का एक कांस्टेबल तक नहीं उतारा गया। वहां उतरे हैं तो अमित शाह उतरे। यदि एनएसजी उतरती तो यह चार आतंकी पकड़े जाते। आज भी सवाल है कि वह चार आतंकवादी कहां है? 12 साल बाद भी वही सवाल है कि झीरम घाटी के अपराधी कहां है? आज भी यही सवाल है कि पुलवामा में जो हमला हुआ वहां 300 किलो आरडीएक्स किसने रखे,जिससे 40 जवान शहीद हुए? ऑपरेशन सिंदूर हमारी सेना के कारण सफल हुआ, जब भी सेना को मौका मिला उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया है। पर उसमें भी भाजपाई राजनीति कर रहे हैं।

लोकतंत्र की नींव है संविधान, पर उसे कमजोर कर रहे मोदी सरकार

श्री बघेल ने कहा कि जो संविधान हमें अधिकार संपन्न बनाई है। जिससे लोकतंत्र स्थापित हुआ है। आज उस सावधान को बचाने की क्यों जरूरत है, इस बात को समझने की जरूरत है। अभी हमारे देश दुनिया में राजनीतिक, आर्थिक घटनाक्रम बहुत तेजी से हो रहा है। जिसमें हम सब प्रभावित और चिंतित हैं। देश के उपराष्ट्रपति कहते हैं सांसद से बड़े कोई नहीं हो सकते। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी पर जवाब दिया संविधान से बड़ा कोई नहीं है। आज यही संविधान न्यायपालिका का अधिकार क्षेत्र तय किया है, विधायिका कार्यपालिका का कार्य क्षेत्र तय किया है। यदि कार्यपालिका लोकसभा में बने हुए कानून का उल्लंघन करें तो उसके खिलाफ आप आवेदन कोर्ट में दे सकते हैं। यदि लोकसभा कोई विधान पारित करते हैं जो संविधान की मूल भावना विपरीत है तो सुप्रीम कोर्ट उसकी समीक्षा कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट संविधान से बने। इसलिए सबसे बड़ा संविधान ही है। लेकिन जब से मोदी की सरकार बनी है, संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। आज न्यायपालिका दबाव में है। न्यायपालिका कोई फैसला लेती है तो भाजपा के नेता उनके खिलाफ टिप्पणी करते रहते हैं। ऐसे लोगों पर भाजपा के दिग्गज कार्रवाई भी नहीं करते हैं और उन्हें व्यक्तिगत टिप्पणी करार देते हैं । आज संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है ।

चुनाव आयोग बन गई है भाजपा की बंधुआ मजदूर

चुनाव आयोग को कमजोर कर दिया गया है। आज चुनाव आयोग में सदस्यों की नियुक्ति प्रधानमंत्री और गृह मंत्री करते हैं। उन्होंने ईवीएम पर भी सवाल उठाया कि उसमें भी गड़बड़ी होती है। हम शिकायत करते हैं उसमें जांच नहीं होती। कहते हैं हार गए इसलिए बोल रहे हैं। निर्वाचन आयोग भी कुछ नहीं करती। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी है निष्पक्ष चुनाव कराने की, आज वही निर्वाचन आयोग भाजपा के नेताओं के बंधुआ मजदूर बन गई है। आज देश में जितने वोटर नहीं है उससे ज्यादा वोट पड़ रहे हैं। श्री बघेल ने कहा कि 540 लोकसभा में चुनाव हुआ है। जिसमें 60% से ऊपर लोकसभा में जितना वोट पड़ा है उसके गिनती नहीं हुआ है। यह निर्वाचन आयोग का वेबसाइट कह रहा है। हाथ की गिनती समझ आती है पर मशीन में कैसे गड़बड़ी हो सकती है। लेकिन निर्वाचन आयोग शिकायत सुनने तैयार नहीं है। ऐसे में लोकतंत्र कहां रह गया है? ऐसे लोगों के खिलाफ कांग्रेस आवाज बुलंद करते हैं तो उसे भाजपाई धर्मद्रोही करार देते हैं। जो मोदी के खिलाफ बोलते हैं उसे राष्ट्रद्रोही कह देते हैं। आज हमारे नेता राहुल गांधी के ऊपर 32 एफआईआर हो चुके हैं। राहुल गांधी कहते हैं मेरे लिए यह सब मेडल है। वे कहते हैं जो कांग्रेस पार्टी अंग्रेजों को भगाने का काम की है वह इन काले अंग्रेजों से क्या डरेंगे। उन्होंने मंच से नारा लगवाया “पहले लड़े थे गोरों से, अब लड़ेंगे चोरों से”। कुछ सवाल करते हैं तो हम पर छापे पड़वाए जाते हैं। हम ऐसे डरने वाले नहीं हैं। संविधान के कारण महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का अधिकार मिला। इसी संविधान से पंचायती राज लागू हुआ और महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिला। आज हर क्षेत्र में महिला प्रतिनिधि है।

अमेरिका के राष्ट्रपति कौन होते हैं सीज फायर का आदेश देने वाले, क्यों उनके किए अपमानों को सह रहें है पीएम, सवाल तो यह भी है?

भूपेश बघेल ने पहलगाम हमले और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि यह सीज फायर अमेरिका के राष्ट्रपति के आदेश पर हुआ है। यह हमारे लिए शर्मनाक बात है। वे कौन होते हैं हमारे देश के बारे में निर्णय लेने वाले। दूसरे के आदेश पर सीजफायर हुआ है। उन्होंने कहा कि मोदी जी से हमारे बहुत वैचारिक मतभेद हैं। उनके दल से हमारे विचार नहीं मिल सकते। आज नहीं, कभी नहीं मिल सकते। पर वे हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं सिर्फ भाजपा के ही नहीं। अमेरिका के राष्ट्रपति होते कौन है जो हमारे प्रधानमंत्री को बदनाम करते हैं। दूसरे दिन अमेरिका का राष्ट्रपति भारत को धमकी देते हैं मैं व्यापार बंद कर दूंगा। हमारे पीएम को धमकाते हैं वह कौन होते हैं हमको धमकाने वाले और पीएम चुप क्यों हैं, ऐसी क्या मजबूरी है जो अमेरिका का इतना सुन रहे हैं और हमारा अपमान सह रहे हैं। उन्होंने 1971 के बातों को ताजा करते हैं कहा कि जब भारत पाकिस्तान का युद्ध हुआ प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थे, उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति कहते थे युद्ध रोक दो लेकिन इंदिरा गांधी नहीं झुके और भारत और बांग्लादेश को अलग करके ही रुके। आज भी हम इंदिरा गांधी पर गर्व महसूस करते हैं जो अमेरिका के सामने नहीं झुकी। लेकिन आज हमारे प्रधानमंत्री को हमेशा अमेरिका का राष्ट्रपति बदनाम करते हैं। कई मुद्दों पर अमेरिका हमारे देश को अपमानित करते हैं। जिस भारत की सेना पर हम गर्व करते हैं ।हर विषम परिस्थिति में सेना ने लड़ाई लड़ी है। पर भाजपाई नेता सिंदूर कार्यक्रम चला रहे हैं। विजय शाह जो एमपी के मंत्री हैं सेना की महिला अधिकारियों को आतंकवाद की बहन करार दे रहे है, ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। एमपी के उपमुख्यमंत्री भी लिख रहे भारत की जनता और सेना पीएम के सामने नतमस्तक है। ऐसा अपमानजनक बातें कहते हैं। हरियाणा के सांसद भी अनर्गल बयान दे रहे। वे कहते हैं कि जो बहन अपने परिवार के साथ पहलगाम घूमने गए थे उसी दिन वे हौसला दिखाए रहते तो उनके पति नहीं मारे जाते। यह कैसी बयान बाजी है। उनका कहना है कि आतंकवादी से बंदूक छीन लेते और उन्हीं को मार देते। किसी के परिवार का कोई मर गया और इस तरह से भाजपा के ही सांसद अपमानित कर रहे हैं। आंसू पोंछने के लिए तो मोदी जी नहीं गए। पुंछ में पाकिस्तान सेना जहां नागरिकों पर हमले किए हैं वहां परिवार का आंसू पोंछने के लिए राहुल गांधी गए हैं। जिन मंदिर और गुरुद्वारा पर पाकिस्तान सेना ने हमले किए थे वहां राहुल गांधी गए थे। हम तो पीएम से उम्मीद किए थे कि जब आतंकी हमला हुआ और अरब अमीरात का दौरा रद्द कर वापस आए तो पहलगाम जाएंगे लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। वह किसी के आंसू पोंछने नहीं गए। बल्कि वहां से वापस आने के बाद बिहार चले गए जहां चुनाव हो रहा है था। तो वही मुंबई में हीरो हीरोइन के कार्यक्रम में चले गए। केरल में कोई आयोजन का उद्घाटन में चले गए। लेकिन पहलगाम हमले के बाद आंसू पोंछने तक नहीं गए। आज अमजद खान के डायलॉग मार रहे हैं कि मेरे खून में….सिंदूर बह रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सेना किसी पार्टी या सरकार की नहीं है, यह राष्ट्र की सेना है। आजकल पीएम मिलिट्री का यूनिफार्म पहन कर घूमते हैं। बकायदा पोस्टर आता है। रेलवे टिकट तक में ऑपरेशन सिंदूर के साथ मोदी का फोटो लगा होता है। टिकट में कम से कम किसी शहिद या जवान का फोटो लगाना चाहिए। कम से कम ऐसा प्रचार तो मोदी को नहीं करना चाहिए। सेना के नाम से भी वह राजनीति कर रहें। राजनीति हम सब करते हैं लेकिन सेना के नाम से हम नहीं करते। पर भाजपा ऐसा कर रही है यह दुर्भाग्यजनक बात है। जिस दिन हमला हुआ कांग्रेस ने सब कार्यक्रम रद्द कर दिए। क्योंकि पहलगाम की घटना से देश दुखी था। आज भाजपा सरकार से सवाल करते हैं तो हमें देश द्रोही बना दिया जाता है। हमें जानने का अधिकार है पर कुछ बताते नहीं। कोई जवाब नहीं मिलता है । यह सब संविधान, लोकसभा, राज्यसभा को कमजोर करने का काम बीजेपी कर रही है।

सीएम साय के आदिवासियों को हिंदू बताने पर भी कहा: हिंदू होते तो आज उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता

भूपेश बघेल ने कहा इधर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आदिवासियों को हिंदू बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर आदिवासी हिंदू रहते तो आज उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। आज उन्हें विशेष दर्जा मिला है आरक्षण मिला है तो संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर के कारण मिला है। नहीं तो विष्णु देव जैसे लोग होते तो आज हमें आरक्षण ही नहीं मिलता। हम विधानसभा में अपने कार्यकाल में 73% का आरक्षण नियम बनाए थे। लेकिन फाइल राजभवन में पड़ा है। आज तक लागू नहीं हुआ है। इन्हीं सब परिस्थितियों को देखकर हमें संविधान बचाने की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने कांग्रेसियों से कहा हमें गांव-गांव में इस पर जागरूकता फैलाना है। भारत के सेना पर हमें गर्व है लेकिन सवाल सरकार से है। सरकार में बैठे जिम्मेदार व्यक्तियों से हैं। सवाल हम पूछेंगे चाहे उसके लिए हमारे घर कितने ही छापे क्यों ना पड़े। सवाल पूछना बंद नहीं करेंगे। आम जनता के हित में संघर्ष करना बंद नहीं करेंगे। अंत में झीरम कांड में हुए शहीदों को मौन श्रद्धांजलि दी गई। जिन्हें आज भी न्याय नहीं मिला है ।इस संविधान बचाओ रैली के दौरान प्रमुख रूप से जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी, विधायक संगीता सिन्हा, कुंवर सिंह निषाद, अनिला भेड़िया, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा, जिला पंचायत सदस्य पूजा वैभव साहू, मिथलेश नूरेटि, बीरेश ठाकुर सहित अन्य प्रमुख मौजूद रहे।

अपने शासनकाल की योजनाओं को दिलाया याद

भूपेश बघेल ने कहा कि जाति जनगणना के लिए कैबिनेट में घोषणा हो गई लेकिन कब लागू होगी कोई ठिकाना नहीं है। तारीख पर तारीख मिल रहा। आजकल तो पीएम भी कादर खान के डायलॉग मार रहे हैं। जाति जनगणना के कई फायदे हैं इस बात को सबको समझना होगा। यह इसलिए जरूरी है ताकि हर व्यक्ति के सामाजिक आर्थिक स्थिति क्या है, सब पता चलेगा। देश के खजाना और प्रदेश के खजाना में हम सबका अधिकार है। इसमें किसी अडानी अंबानी का अधिकार नहीं है। इसमें आम जनता का अधिकार है। इस जाति जनगणना से किस समाज की क्या स्थिति है स्पष्ट होगी, उसके हिसाब से योजना बनेगी। इसलिए यह जनगणना होनी चाहिए। वोट के लिए जाति जनगणना नहीं समाज हित के लिए होगा। जब हमारी सत्ता थी तो हमने किसानों का कर्ज माफ किया। धान का रेट आज 3100 मिल रहा है तो कांग्रेस की सरकार के कारण मिल रहा है। भाजपा सरकार ने इसी बहाने रेट बढ़ाया आज मनरेगा काम नहीं चल रहे। बहनों को जो 28000 मनरेगा से मिल जाना था उन्हें आज महतारी वंदन के नाम पर साल का 12000 थमाया जा रहा है। अब तो बिजली बिल साय साय झटका मार रहा है। मनमाना बिल आ रहा है। हमने हाफ बिजली बिल योजना चलाई थी। धान का रेट गर्मी में आज 15से1600 हो रहा है। हमारी सत्ता में ये सब नहीं होता था।आज किसानों को अपनी उपज को उचित कीमत नहीं मिल रहे। हमारे शासन में 22 से 2300 तक में गर्मी में धान बिकता था
पर ट्रिपल इंजन की सरकार में किसानों की दुर्दशा है। हमने रोजगार देने का कानून बनाया। मनरेगा कांग्रेस की देन है। पर आज भाजपा के सरकार में रोजगार गारंटी तक नहीं चल रहा है। इस साल 100 दिन तो मुश्किल 20 से 30 दिन तक भी काम नहीं मिला। आज साय सरकार 4000 स्कूल बंद कर रही। हमने स्वामी आत्मानंद स्कूल खोले। गरीबों के बच्चे आज टॉप टेन में आ रहे हैं। 85 टॉपर में 35 बच्चे स्वामी आत्मानंद स्कूल से हैं।

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