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भारत प्राचीन, एक राष्ट्र हिंदू राष्ट्र:अभय राम प्रांत प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ प्रांत

बालोद। सरस्वती शिशु मंदिर बालोद में आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग विशेष छत्तीसगढ़ प्रांत के बौद्धिक सत्र में अभय राम प्रांत प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ प्रांत ने कहा कि हमारे देश का इतिहास बहुत प्राचीन है। विष्णु पुराण, ब्रह्म पुरान में भारत की प्राचीनता का वर्णन है। अपने साधु, शांति, ऋषि मुनियों ने अपने देश को राष्ट्र के नाते संबोधित किया है।गुरु नानक देव, नृसिंह मेहता, आदि शंकराचार्य सभी ने भारत को राष्ट्र के रूप में रेखांकित किया है। उनके मन में क्षेत्रीयता की भावना नहीं थी। राष्ट्र के लिए जन, भूमि और संस्कृति की आवश्यकता होती है। इस देश के अंदर रहने वाला समाज है उसके अंदर अंगांगी भाव होना चाहिए। इसे हमारा शरीर के उदाहरण से समझ सकते हैं। राष्ट्रीयता के लिए राष्ट्र का दर्शन आवश्यक है। जीवन मूल्य, परंपरा, संस्कृति, उसके प्रति समान दृष्टि, श्रद्धा का भाव चाहिए। हमारे देश का दर्शन क्या है? एक सद, विप्राः बहुधा वदंति। एक ही सत्य है वि‌द्वान लोग अलग-अलग बोलते हैं। हमारे देश का दर्शन कहता है। पराई स्त्री में माता का रूप देखना, पराए धन को मिट्टी के समान समझना। यही हमारे देश का दर्शन है। सबको अपने ही समान समझना, आत्मवत समझना, अलग-अलग नहीं है, हम सब एक ही हैं इस दर्शन को जो स्वीकार करता है वह इस देश का मूल समाज है वहीं राष्ट्रीय समाज है। इस देश का राष्ट्रीय समाज वही है जो हजारों वर्षों से यहां निवासरत है। यहां आने वाले आक्रमण को जिसने झेला है, पराक्रम के साथ उसका सामना किया है, शत्रुओं को धूल चटाई है, बलिदान दिया है, त्याग किया है। जीवन मूल्य स्थापित किया है। जिसके अंदर अपने देश के लिए आज भी सब कुछ निछावर करने की भावना है, वहीं इस देश का राष्ट्रीय समाज है।हमारे देश में संविधान है। संविधान के मूल प्रति में 33 चित्र अंकित है जो भारत के भारतीयता को, राष्ट्रीयता को सबके सामने स्पष्ट रूप से रखते हैं। भारतवर्ष के अंदर कोई भी विदेशी मेहमान आता है तो हम उसे रामायण, गीताभेंट करते हैं। वृक्षारोपण करते हैं तो बरगद और पीपल का वृक्ष लगाते हैं अपने देश के अंदर अनेक वि‌द्या के लोग जब विजय प्राप्त करके आते हैं तब स्वागत तिलक लगाकर किया जाता है। दक्षिण भारत में कावेरी नदी है, जब वर्षा ऋतु आती है पहली बार जल भरता है तो साड़ी भेंट किया जाता है। नदी में माता का रूप देखा जाता है। इसलिए माता को साड़ी भेद की जाती है। इस देश के लोग जब बाहर जाते हैं तो उन्हें हिंदू कहा जाता है। शाही ईमाम जब हज करने गए तो उन्हें हिंदू मुस्लिम कहा गया। अर्थात हिंदुत्व हिंदू उनके हिंदुस्तान में रहने को बताता है और मुस्लिम उनके उपासना पद्धति को बताता है। मोहम्मद करीम छागला भी अपने आप को हिंदू कहते थे।महर्षि अरविंद ने भी भारतीयता को सनातनता को रेखांकित किया है। इस देश का मूल समाज हिंदू समाज है इसलिए राष्ट्र हिंदू राष्ट्र है, हिंदू राष्ट्र अलग से बनाने की आवश्यकता नहीं है। यह मूल रूप से ही हिंदू राष्ट्र है हमारे देश के जितने भी ध्येय वाक्य हैं सब में संस्कृत के ही ध्येय वाक्य हैं। ये कहां से लिए गए हैं? यह हमारे देश की प्राचीन वांगमय से लिए गए हैं। जैसे ‘सत्यमेव जयते’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’, ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय’ आदि। यह सब हमारे प्राचीन ग्रंथो से ही लिए गए हैं। इसीलिए भारत हिंदू राष्ट्र है। श्रीमती एनी बेसेंट, महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद सब ने हिंदुत्व को भारत के आत्मा के रूप में रेखांकित किया है।हिंदुत्व बहुत व्यापक है। सबको अपने अंदर समाहित कर लेता है। कहीं भी संकुचित भाव नहीं है। इसीलिए हिंदुत्व में सभी के सुख की कामना की है। पूरे विश्व को परिवार माना है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ कहा है ।रामधारी सिंह दिनकर, डॉक्टर राधाकृष्णन सभी ने हिंदुत्व की महिमा का वर्णन किया है। समय-समय पर जब अपने देश में किसी भी प्रकार की कुरीति आ गई तो हमारे संतों ने उसे दूर करने के लिए हिंदुत्व की नवीन व्याख्या की। संत कबीर, संत रविदास, मौराबाई, दादू दयाल, गुरु घासीदास, संत कबीर जैसे लोगों ने भारत की समाज की जनता को समाज को नवीन रूप प्रदान करने का काम किया। यह धरती महावीर, गौतम की धरती है। रामकृष्ण की धरती है। महाराणा प्रताप शिवाजी की धरती है। यह सब भारत के हिंदुत्व की पहचान को स्थापित करने में अपना जीवन लगाए हैं। प्रार्थना में हम बोलते हैं अपने राष्ट्र को वैभव के परम शिखर पर लेकर जाएंगे देश को वैभव किसी घर पर ले जाने के लिए हम सब अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित करने का प्रण लिए हैं। अपनी क्षमता बढ़ाएं। देश को आगे लेकर जाए, यही सबसे प्रार्थना है। छत्तीसगढ़ प्रांत के प्रांत प्रचारक अभय राम के अलावा इस सत्र में वर्ग के संचालन टोली के सदस्यों में डॉ टॉपलाल वर्मा, धनश्याम साहू, उमेद राम देवांगन, योगेश्वर साहू, क्षीर सागर पटेल, लक्ष्मी नारायण सोनी, जितेंद्र भाई पटेल, राजेश्वरराव, विनोद साहू, संतोष साहू, गणेश हरपाल, मेघनाथ, लक्ष्मण मानिकपुरी, कपिल टेकाम, पंचराम गहिर, छोटेलाल सहित संघ के सभी प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित थे। उपरोक्त जानकारी प्रचार प्रमुख रैवा दास मानिकपुरी ने दी।

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