बालोद। स्वयंसेवक संघ के विशेष प्रथम वर्ष संघ शिक्षा वर्ग इस वर्ष सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालोद में आयोजित किया जा रहा है। यह वर्ग दिनांक 17 मई से प्रारंभ हो गया है जो 1 जून 2025 तक अनवरत चलेगा। जिसमें छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से 175 स्वयंसेवक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण शिविर का आयोजन संघ की मूलभूत सिद्धांतों और हिंदू संस्कृति को समझाने के उद्देश्य से किया गया है। इस प्रशिक्षण में 175 स्वयंसेवक 34 प्रबंधक है एवं 14 शिक्षक विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण देने के लिए पूरे प्रांत से उपस्थित हुए हैं। प्रशिक्षण का कार्यक्रम प्रतिदिन प्रात 4:30 बजे प्रारंभ होता है और रात्रि 10:15 बजे दीप निर्वाण के साथ समाप्त होता है। सुबह व शाम की शाखा में शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है इसके अंतर्गत विभिन्न शारीरिक गतिविधियों योग दंड एवं खेलों का समावेश होता है बौद्धिक प्रशिक्षण के लिए चर्चाएं संवाद एवं बौद्धिक के माध्यम से अलग-अलग विषयों पर किया जाता है। प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षार्थियों को विविध विषयों पर व्याख्यान दिए जाते हैं। इसमें संघ का इतिहास विचारधारा एवं कार्य प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया जाता है इसके साथ ही उन्हें संघ के कार्य और देश भक्ति की भावना को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया जाता है शिविर का उद्देश्य केवल शारीरिक बौद्धिक और मानसिक विकास करना ही नहीं बल्कि समाज व राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को प्रबल करना प्रबल बनाना है। इस संघ शिक्षा वर्ग में उमेंद राम देवांगन, सह विभाग संघ चालक सर्वाधिकारी हैं। प्रांत प्रचारक अभय राम का सानिध्य पूरे वर्ग में रहेगा और अलग अलग विषयों पर अपना बौद्धिक देते रहेंगे । डॉक्टर टोप लाल वर्मा प्रांत संघ चालक ने आज पुण्य भूमि भारत विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि भारत पुण्य भूमि और मातृभूमि है। स्वामी विवेकानंद ने अपने शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदुत्व का डंका बजाय 4 वर्ष पश्चात जब बंदरगाह पर जहाज़ से उतरे तब जमीन पर लौटते हुए कहा कि विदेश में रहकर जो पाप या बुराई आई हो वह इस पवित्र भूमि में लौटने से पवित्र हो गया। भारत का कण-कण पावन है। भारत एक प्राचीन राष्ट्र है। समुद्र के उत्तर से हिमालय के दक्षिण में स्थित यह देश भारत है और हम उसकी संतान है । भारत के सभी पर्वतों एवं सप्तपुरी पर विस्तृत रूप में जानकारियां दी। कुंभ मेला अमृत कारण से होता है वर्तमान कुंभ प्रयागराज में लगभग 66 करोड़ संपूर्ण विश्व के लोगों ने पवित्र स्नान किया। दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत के नाम से इसका नाम भारत पड़ा। भारत विश्व में ऐसा देश है जहां नदियां इसी देश से प्रारंभ होकर यही समुद्र में मिल जाती है। भारत का भौगोलिक वैभव सांस्कृतिक संपदा हीरे मोती खनिज वनस्पति जड़ी बूटियां मरुस्थल पर्वत नदी वन आदि है। मोक्षदायिनी नदियां और तीर्थ स्थल भारत का प्रत्येक अंश पुण्य एवं ऐतिहासिक है। पंच पवित्र सरोवर चार मठ श्रृंगेरी जगन्नाथ पुरी द्वारिका एवं बद्रीनाथ है। प्राचीन विश्वविद्यालय तक्षशिला नालंदा पाटलिपुत्र विक्रमशिला और 50 से अधिक विश्वविद्यालय थे जहां पूरे विश्व से विद्यार्थी ज्ञान अर्जन के लिए भारत आते थे और इसलिए भारत को जगतगुरु कहा जाता है । भारतवासी प्रकृति पूजक है कवि रसखान पुनर्जन्म भारत में होने की प्रार्थना करते हैं। भारत को जानो व मानों एवं बनों और बनाओ का विचार व्यक्त किया। भारत का इतिहास व संस्कृति गौरवशाली है। भारत के महापुरुषों संतो तीर्थों तपोभूमि सिद्ध स्थान महापुरुषों के जन्म व कार्य स्थल भारत की आत्मा है जिसे हम प्रतिदिन एकात्मता स्त्रोत में स्मरण करते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विशेष प्रशिक्षण शिविर बालोद शिशु मंदिर में जारी
