सुशासन त्यौहार में भी नहीं हो पा रहा समस्याओं का समाधान
बालोद जिला मुख्यालय के नेशनल हाईवे 30 पर ताँदुला पुल में लगा खतरे का निशान तो दूसरी ओर वनांचल के ग्राम में सड़के बदहाल
बालोद। सुशासन तिहार के जरिए लोगों की समस्या समाधान करने का दावा करने वाली सरकार सड़कों की सुध नहीं ले पा रही हैं। अधिकतर जगह लोगों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क के मुद्दे उठाए हैं। उन्हें सिर्फ यही जवाब मिला है कि शासन से आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है। जिसके चलते आगे काम नहीं हो पा रहा है। सभी सड़कों के प्रस्ताव लगभग शासन को भेजे जा चुके हैं। पर वित्त विभाग में स्वीकृति हेतु मामले लटके हुए हैं। सड़कों की हालत देखें तो आज स्थिति यह है कि गांव तो दूर शहर की सड़क भी बदहाल नजर आ रही है। बालोद जिला मुख्यालय से एक किलोमीटर दूर झलमला जाने वाले नेशनल हाईवे 30 पर ताँदुला नदी के ऊपर बनी ब्रिज और सड़क की हालत कुछ ऐसी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मरम्मत करने के बजाय पुल के ऊपर विभाग के कर्मचारियों द्वारा खतरे का निशाना बनाते हुए एक लाल कपड़ा लटका दिया गया है ताकि किसी को धोखा ना हो। पुल के ऊपर सड़क पर कई जगह इस कदर गड्ढे हो चुके हैं कि अंदर बिछा सरिया दिखाई देने लगे हैं। इसके पहले भी इस जर्जर पुल की मरम्मत हो चुकी है पर समस्या दूर नहीं हो पा रही है। भारी वाहनों का दबाव इस कदर है कि आए दिन यह सड़क जगह-जगह टूटने लगती है। स्थिति यही रही दो किसी दिन बड़ी घटना घट सकती है। इसी मार्ग से होकर रोज अधिकारी कलेक्ट्रेट आना जाना करते हैं पर कोई इसके जल्द मरम्मत को लेकर ध्यान नहीं दे रहा है। उल्टा देख कर भी इसकी अनदेखी हो रही है।
वनांचल के गांव की सड़के बदहाल, नहीं पहुंचते यहां नेता, न अफसर
इसी तरह एक दूसरी तस्वीर ग्राम अन्नूटोला, ग्राम पंचायत भीमाटोला की सामने आई है। जो की डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत रेंगाडबरी से लगा हुआ एक गांव है । वैसे तो रेंगाडबरी एक विकसित पंचायत की ओर अग्रसर है। लेकिन इससे लगे गांव आज भी विकास के नाम पर पीछे हैं। लगभग 3 किलोमीटर दूर अन्नूटोला जाने वाली सड़क इस कदर उखड़ चुकी है कि सड़क से अब डामर ही गायब हो गए हैं सिर्फ गिट्टी और गड्ढे नजर आ रहे हैं। कई साल से ग्रामीण सड़क की मांग को लेकर आवाज उठा चुके हैं। लेकिन कोई फरियाद सुनने वाला नहीं है। स्थानीय विधायक, ना ही संबंधित विभाग इस ओर ध्यान दे रहा है और ना ही कोई जनप्रतिनिधि झांकने आ रहा। सुशासन तिहार में भी इस उम्मीद के साथ लोगों ने अपनी मांगे रखी थी लेकिन कुछ निराकरण नहीं होगा। आश्रित ग्राम होने के कारण अन्नूटोला गांव में तो शिविर तक नहीं लगा था। ग्राम पंचायत भीमाटोला में पंचायत प्रशासन की ओर से भले ही सड़क बनवाने को लेकर मांग की जा रही है लेकिन मामला विभाग में ही लटका हुआ है। अन्नूटोला के निवासी अंकुश कुंजाम ने बताया कि हमारे गांव की सड़क खराब होने के चलते ना तो कोई अधिकारी, नेता और ना ही कोई जनप्रतिनिधि यहां आते हैं।विकास की गति मानों रुक सी गई है। रेंगाडबरी से सिर्फ 3 किलोमीटर की दूरी पर है पर विकास से लगता है मानो कोसों दूर है। सड़क खराब होने से लोगों को आने जाने में बहुत दिक्कत होती है। बरसात के दिनों में तो चलना मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों को भी काफी परेशानी होती है। हर साल बरसात में हादसे होते हैं। पर आज तक कोई सड़क की सुध नहीं ले पाया है। स्थिति बद से बद्तर होती जा रही है।
डोंगरगांव जाने का है सीधा रास्ता, भारी वाहन प्रतिबंधित फिर भी दौड़ती है गाड़ियां इसलिए हो गई खराब
ग्राम पंचायत भीमाटोला के सरपंच गोमती सुखीत नायक ने बताया कि रेंगाडबरी अन्नटोला होते हुए डोंगरगांव जाने का सीधा रास्ता है। अधिकतर रेत से भारी ट्रक और हाईवा इसी नजदीकी रास्ते से गुजरते हैं। जिसके चलते ही सड़क खराब हो जाती है। तीन-चार साल पहले ही यह सड़क बना था और अब काफी जर्जर स्थिति में है। परेशानी झेलना ग्रामीणों को पड़ता है । विभाग मरम्मत को लेकर ध्यान नहीं देते ।26 मई को मंगचुआ में समाधान शिविर होना है । जिसमें हम इस मुद्दे को उठाएंगे और शासन प्रशासन से सड़क को शीघ्र बनाने की मांग करेंगे।
