अक्षय तृतीया के बजाय गांव के सभी परिवार के शादियों की समाप्ति के बाद होता है यह अनूठा आयोजन
बालोद । अक्षय तृतीया यानी अक्ती पर आपने गुड्डा गुड्डी ( पुतला पुतली) के विवाह का आयोजन तो देखा ही होगा। गांव से लेकर शहरों तक अक्षय तृतीया के दिन ये आयोजन हर गली मोहल्ले में अक्सर देख ही जाता है। लेकिन कभी आपने यह नहीं देखा होगा कि किसी गांव का दूसरे गांव के बीच गुड्डा गुड्डी का ब्याह हो। वह भी अक्षय तृतीया के दिन नहीं बल्कि किसी और दिन। ऐसा ही कुछ रोचक आयोजन हुआ है बालोद जिले के ग्राम बुंदेली और खैरा ग्राम वासियों के बीच। जहां बुंदेली के ग्रामीण वर पक्ष “राम” के रिश्तेदार बने तो ग्राम खैरा के ग्रामीण वधू पक्ष “सीता” के रिश्तेदार बने। दोनों गांव के बीच गुड्डा गुड्डी का ब्याह रचाया गया। 14 से 16 मई तक पूरे विधि विधान के साथ हुए इस आयोजन के साथ दोनों ग्रामवासी इसके साक्षी बने। असली शादी की तरह सभी रीति रिवाज को निभाते हुए दोनों गांव के लोगों ने यह आयोजन संपन्न कराया। 14 मई को जहां दोनों गांव में मंडप्प छादन, चूल माटी, तेल माटी, तेल मायन हुआ। 15 मई को ग्राम बुंदेली के ग्रामीण राम रूपी गुड्डा लेकर ग्राम खैरा में बारात लेकर पहुंचे। जहां रात को सीता के साथ फेरे हुए तो 16 मई को ग्राम बुंदेली में धर्म टिकावन और आशीर्वाद समारोह हुआ। जहां पर खैरा के ग्राम वासी सीता गुड्डी के पक्ष की ओर से चौथिया का रस्म निभाने भी पहुंचे। इस दौरान दोनों ही गांव में विशेष भंडारे का आयोजन भी किया गया था। असली शादी की तरह इस आयोजन में लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों, महिलाओं और पुरुषों ने अपनी अपनी भागीदारी दिखाई। इस आयोजन में सभी का आर्थिक और शारीरिक सहित अन्य तरीके से सहयोग रहा। किसी ने अर्थ दान दिए तो किसी ने अन्य दान। टेंट वालों ने अपनी ओर से निशुल्क 3 दिनों के लिए टेंट लगाया तो डीजे और बाजा वालों ने भी अपना इसी तरह से निशुल्क योगदान दिया।
5 साल पहले हुई थी इस तरह आयोजन की शुरुआत
बुंदेली के ग्रामीण एस कुमार श्रीवास, अनिशा ठाकुर ने बताया कि गांव के बच्चे पहले अक्षय तृतीया के दिन ही गुड्डा गुड्डी का ब्याह रखते थे। फिर गांव के बड़े बुजुर्गों ने सोचा कि क्यों ना इस आयोजन को वृहद तौर पर और अनोखे अंदाज बनाया जाए। ऐसा ही विचार बुंदेली और खैरा दोनों गांव वासियों के बीच उठा और दोनों गांव वालों ने तय किया कि हम एक दूसरे के गांव के साथ इस गुड्डा गुड्डी का ब्याह असली विवाह की तरह रचाएंगे। फिर वैसा ही हुआ। कभी एक गांव दूसरे गांव में बारात लेकर जाता है तो किसी वर्ष दूसरा गांव पहले गांव में बारात लेकर आता है। इस बार खैरा गांव में बुंदेली वासियों ने बारात लेकर गए।
भाईचारे और एक जुटता को देते हैं बढ़ावा
खैरा के ग्रामीण केशव ठाकुर, बुंदेली के कुंती नायक,सुखिया बाई ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य सामूहिक मनोरंजन के साथ-साथ गांव के बच्चों और युवाओं को शादी ब्याह के रस्मो रिवाज से परिचित करवाना तो है ही, गांव के भाईचारे और एकजुटता को भी बढ़ावा मिलता है। दो गांव के बीच आपसी संबंध मजबूत होते हैं और पूरे विधि विधान के साथ हर साल की तरह तीन दिनों का आयोजन होता है।
सभी परिवार में शादियां संपन्न होने के बाद करते हैं आयोजन
ग्रामीण देवबती साहू, टामीन देशमुख ने बताया कि अक्षय तृतीया की भांति यह गुड्डा गुड्डी का ब्याह होता है। लेकिन इसे ग्रामीण अक्षय तृतीया के दिन ना मना कर जब गांव में शादी सीजन में सभी परिवार के शादी संपन्न हो चुके होते हैं और आयोजनों से ग्रामीण निवृत्त हो जाते हैं, तब जाकर इस विशेष गुड्डा गुड्डी के विवाह का आयोजन करते हैं। इसमें सभी भाग लेते हैं और एक गांव में एक ही जगह गुड्डा गुड्डी का ब्याह होता है ना कि हर मोहल्ले में।
तीन दिनों की होती है वीडियो रिकॉर्डिंग,गणेश या नवरात्र पक्ष में प्रोजेक्टर पर देखते हैं विशेष फिल्म
खैरा गांव के युवा प्रणय कुमार ने बताया कि इस तीन दिनों तक होने वाले शादी के आयोजन को यादगार बनाने के लिए हर साल दोनों ही गांव में वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है। पूरे आयोजन की झलकियां वीडियो ऑडियो कैमरे में कैद रहती है। जिसे यादगार के तौर पर सहेज कर रखा जाता है और वीडियो मिक्सिंग कर शादी का पूरा वीडियो एल्बम बनाया जाता है। इसे प्रोजेक्टर के माध्यम से गणेश पक्ष या नवरात्र के समय दोनों ही गांव में बड़े पर्दे पर ग्रामीणों द्वारा सामूहिक रूप से देखा जाता है और बीते दिनों के आयोजन को पर्दे पर देख कर ग्रामीण काफी खुश होते हैं और हर साल से यह प्रथा चली आ रही है। करीब 5 सालों से इस तरह का आयोजन ग्रामीण करते आ रहे हैं। असली शादी की तरह दोनों गांव में “राम सीता” रूपी गुड्डा गुड्डी के इस शादी का कार्ड भी छपवाकर बंटवाया गया था।
