बालोद। “आओ मनाए सफाई दीदी वाली दीदियों संग महिला दिवस” इस थीम के साथ यादव परिवार की तीन बेटियों (बहनों) ने मिलकर नगर पालिका परिषद भवन बालोद में महिला दिवस का आयोजन किया। अपने पिता स्वर्गीय एलपी यादव के पुण्यतिथि (6 मार्च) की स्मृति में यह आयोजन किया गया था। इस अवसर पर बालोद नगर पालिका क्षेत्र में सफाई करने वाली दीदियों को साड़ी और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान महिलाएं काफी प्रसन्न नजर आई और उन्होंने तीनों बहनों के इस पहल की सराहना की। आयोजन को संबोधित करते हुए यादव परिवार की बड़ी बेटी दूधली सेजेस प्राचार्य दुर्गेश नंदिनी यादव और कन्नेवाडा की व्याख्याता विनोदनी यादव ने कहा कि हम सब देखते हैं कि सुबह से ही स्वच्छता दीदियां कितना मेहनत करती है। अपना घर स्वच्छ रखने के साथ-साथ पूरे बालोद नगर के प्रत्येक घर की स्वच्छता में उनका योगदान होता है । सुबह से देर रात तक वे स्वच्छता को लेकर समर्पित रहती है और उनके इन्हीं योगदान को सम्मान देते हुए हमने यह एक छोटा सा आयोजन रखा है। आप लोगों के इसी मेहनत के कारण हम स्वच्छ हवा में सांस ले पाते हैं। वरना अगर एक दिन भी नगर में सफाई ना हो तो सब व्यवस्था चौपट हो जाएगी। यादव परिवार की छोटी बहन बड़गांव स्कूल की व्याख्याता कादंबिनी यादव ने इस दौरान महिलाओं के सम्मान और अभिमान पर असली महिला दिवस कब हो सकता है, इस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए व्यंगात्मक कविता पढ़ी।
घरौंदा केंद्र में किया गया दो कूलर दान

महिला दिवस को यादगार बनाते हुए अपने पिता स्वर्गीय एलपी यादव की दसवीं पुण्यतिथि की स्मृति में जहां नगर पालिका परिषद में सफाई वाली दीदियों का सम्मान किया गया तो वही समाज कल्याण विभाग और एक संस्था के जरिए संचालित घरौंदा आश्रय गृह में जाकर तीनों बहनों ने दो कूलर भी दान कर एक अनूठा उदाहरण पेश किया। ताकि आने वाली गर्मी में यहां पनाह लिए बच्चों को राहत मिले।
श्रृंगार करती महिला से परिश्रम करती महिला बहुत ही खूबसूरत होती है, इस सोच के साथ हुआ सम्मान
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एवं पिता श्री के दसवीं पुण्यस्मृति में यह आयोजन हुआ। जो स्व. श्री एल पी यादव की तीन सुपुत्री द्वारा प्रायोजित था। बता दें कि ये तीनों बेटियां शिक्षा विभाग बालोद में पदस्थ हैं और अपने पिता को ही अपनी प्रेरणास्रोत मानती हैं। महिला दिवस पर इन्होंने इसे नगर पालिका बालोद की सफाई दीदीयों के साथ मनाना तय किया।उन्होंने साड़ी ,श्रीफल, मस्तक तिलक कर पूरी दीदीयों का सम्मान किया। तीनों कहती हैं कि इनके बिना हमारा घर गंदा है। घर एवं शहर दोनो को स्वच्छ रखने में इनकी ही मेहनत झलकती है। बालोद शहर के लिए इनका योगदान बहुत अधिक हैं तो क्यो न महिला दिवस में हम इनका सम्मान करें। तीनों बहनों का मानना है कि श्रृंगार करती महिला से परिश्रम करती महिला बहुत ही खूबसूरत होती है। इस आयोजन में एक विशेष बात यह भी रही कि मुख्य/ विशेष अतिथि भी सफाई दीदीयों के बीच से ही दो को ही बनाया गया जो सब से अधिक एवं सब से कम उम्र की दीदी के आतिथ्य में यह आयोजन सपन्न हुआ। कौशल्या बघेल एवं प्रीति जांगड़े को अतिथि स्वरूप स्थान दिया गया। आयोजन में 40 महिला सफाई दीदियां उपस्थित थी और उनको भी बहुत आंनद की अनुभूति हुई। अपना मंच था सभी सामान्य अपने लोग थे। बहुत अच्छे से एवं खूब बातें,महिलाओ को समर्पित कविताओं की प्रस्तुति की गई । पूरी स्वच्छता दीदीयों की अध्यक्ष
शबनम दी ने कहा कि इतने सालों में पहली बार हम सब का इस तरह से सम्मान किया गया। हम सब बहुत खुश हैं। बहुत अच्छा लग रहा हैं कि हमारा सम्मान आप यादव परिवार की बहनों ने किया। साथ में आयोजको का आभार भी किया गया। आयोजन में दुर्गेशनंदिनी यादव प्राचार्य सेजेस दुधली द्वारा दीदीयों को जो सुबह से दिनभर मेहनत करती होती है उस पर आभार करते हुए महिलाओ की स्थिति पर अपनी बात कही। विनोदनी यादव व्याख्याता द्वारा महिलाओं की सुधरती स्थिति और संघर्ष की बाते कहते हुए बहुत सुंदर महिलाओ को समर्पित एक कविता का वाचन किया गया। कादंबिनी यादव व्याख्याता बड़गाँव के द्वारा कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन किया गया।ज्ञात हो कि ये तीनो बहन बालोद शिक्षा विभाग में पदस्थ है और किसी परिचय की मोहताज नही है। अपने पिता श्री की पुण्यस्मृति में प्रत्येक वर्ष कुछ अलग, कभी शिक्षा तो, कभी सेवा के क्षेत्र में एक अभिनव पहल करते ही रहती हैं। इस वर्ष भी दसवीं पुण्यस्मृति में बालोद की सफाई दीदीयों के सम्मान के साथ ही बालोद में स्थिति घरौंदा आश्रय गृह बालक एवं बालिकाओं के लिए गर्मी को ध्यान रखते हुए कूलर का दान किया गया और वहां के जो बच्चे है उनके लिए यथासंभव प्रयास करने की बात कही है। उन्होंने घरौंदा गृह के समिति सदस्यों की सराहना की है। सही मायने में ऐसे बच्चो की देखभाल बहुत कठिन है । ऐसे में इनका प्रयास बहुत ही सराहनीय है। उन्होंने सभी से अपील भी किया है कि इन बच्चों के साथ समय बिताए। इनको सिर्फ हमारा स्नेह चाहिए । ये बच्चे छोटी छोटी चीजो से अत्यंत खुश हो जाते हैं।
पिता जी के बताये मार्ग पर चलते हुए अलग करने हेतु संकल्पित ये बेटियाँ
तीनों बेटियां का मानना है कि ये जो भी हैं आज सिर्फ अपने पिता की वजह से है। शिक्षा के लिए एलपी यादव एक क्रांतिकारी की तरह ही रहे हैं। अपनी बेटियों को शिक्षा दिलाने वे आगे रहे। 80 के दशक में शिक्षा का इतना महत्व नही था। उस समय में वो अपनी बेटियों की शिक्षा के लिए संकल्पित थे और साथ में सभी की शिक्षा के लिए बहुत योगदान रहा है। उनसे पढ़े विद्यार्थी आज भी उनको याद करते हैं। वे आज भी सभी के स्मृति पटल पर हैं और सदा रहेंगें।
प्रथम पुण्यस्मृति से दसवीं पुण्यस्मृति तक किए गए ये अनुकरणीय कार्य
- जिला स्तर पर बोर्ड परीक्षा में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चो का कुछ सहयोग राशि प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया गया।
- अमलीडीह स्कूल में स्वेटर दान दिया गया।
- वृद्धाआश्रम दुर्ग में अनाज का दान किया गया।
- प्राथमिक शाला कलकसा एवं प्राथमिक शाला दुधली स्कूल में बच्चों को जूता मोजा वितरण किया गया।
- प्राथमिक शाला बड़गाँव में स्कुल बैग का वितरण किया गया।
- हायर सेकेंडरी स्कूल दुधली में टिफिन वितरण,प्राथमिक शाला बनगाँव में जूता मोजा वितरण किया गया।
- विकलांग संस्थान राजिम में कपड़ा वितरण किए।
- वृद्धाश्रम में साड़ी,कम्बल एवं शाल वितरण किए।
- दुधली संकुल में संकुल के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूल में न्यौता भोज,
सेजेस कन्नेवाडा में न्यौता भोज कराए। - घरौंदा आश्रय स्थल बालोद में कूलर दान किए। इस तरह प्रत्येक वर्ष ऐसा आयोजन करते रहने की बात तीनों बेटियों ने कही। दसवीं पुण्यस्मृति के
इस सम्पूर्ण आयोजन में मुख्य रूप से दुर्गेशनंदिनी यादव विनोदनी यादव कादंबिनी यादव आदित्य यादव, मीना ताई, मुकेश ठाकुर सहभागी रहें। इसके आयोजन और पहल के लिए परिवारजनों से सुलोचना यादव, तेजेन्द्र यादव, राजेन्द्र प्रसाद यादव, आशालता यादव, लोकेश पारकर, आकांक्षा साक्षी प्रांशु ने हर्ष व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं दी।
