बालोद/ डौंडीलोहारा। डौंडीलोहारा की बेटी श्री मुमुक्षु बहन राखी सांखला ने संयम वैराग्य पथ चुन लिया है। वह उस राह चल पड़ी है। इस मौके पर राजपरिवार के युवराज लाल निवेंद्र सिंह टेकाम तथा सभी सदस्य ने उनसे मुलाकात कर इस फैसले की सराहना की। राखी के परिवार में उनके दादा हस्तीमल सांखला,दादी मगन बाई सांखला, पिता मुकेश सांखला, माता ललिता सांखला,बड़े पिता राकेश सांखला, बड़ी माता सरोज सांखला ने उनके इस कदम में साथ दिया है। परिजनों ने बताया राखी शुरू से ही पढ़ाई में बहुत होशियार रही। हर क्षेत्रों में आगे रहकर वह अपना जीवन का निर्वहन की ओर शुरू से धर्म के प्रति अग्रसर रहती थी। जिसमें जैन धर्म के त्यागियों के साथ रहकर वह वैराग्य के प्रति संयम पथ की राह चुनी। बता दें कि यह कदम आसान नहीं होता है। मोह माया सब छोड़कर राखी आगे बढ़ रही। जानकारी अनुसार जैन धर्म में, मुमुक्षु का मतलब है जो व्यक्ति जैन साधु बनने वाला है या जिनकी जैन दीक्षा होने वाली है. मुमुक्षु शब्द संस्कृत से लिया गया है. इसका मतलब है, मोक्ष या मुक्ति पाने की इच्छा रखने वाला।
यह होता है मुमुक्षु बनने का मतलब
मुमुक्षु, भौतिक सुखों को छोड़कर शाश्वत सुख पाने की कोशिश करता है. वह संसार की मोह-माया को छोड़कर दीक्षा लेता है और आत्मा में लीन रहता है. मुमुक्षु, अस्तित्व पर सवाल उठाता है और घटनाओं के पीछे के कारणों की तलाश करता है. वह सांसारिक चीज़ों से अलग होना और वैराग्य का अभ्यास करता है. वह ज्ञान और सत्य का साधक होता है. वह पुनर्जन्म चक्र से मुक्त होने के लिए मोक्ष पाने का लक्ष्य रखता है.
