बालोद। बालोद जिले के ग्राम पिरिद के रहने वाले एक गरीब परिवार का बेटा खिलेंद्र साहू अग्नि वीर में चयनित हुआ है। ट्रेनिंग पूरी करके जब वह अपने गांव लौटा तो उनके घर वाले खास कर उनकी मां भावुक हो गई तो उनके साथी और ग्रामीण गर्व और खुशी से झूम उठे। दरअसल में खिलेंद्र साहू काफी विपरीत परिस्थितियों में जीवन में संघर्षों का सामना करते हुए बड़ा हुआ है। कोरोना काल में उन्होंने अपने पिता बनवाली राम को खो दिया। जो कि दर्जी का काम किया करते थे। पिता के चले जाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारे। मां ने उनका हौसला बढ़ाया। उनकी मां मेहनत मजदूरी करके अपने दोनों बेटों और बेटी को पालती रही। बेटी की शादी हो चुकी है। उनका बड़ा भाई भेलेंद्र अपने पिता की जगह ले लिया और वह पढ़ाई के साथ दर्जी का काम कर रहा है। तो वहीं दूसरी ओर खिलेंद्र देश सेवा का जज्बा लिये अग्नि वीर में जाने की तैयारी करता रहा और आखिर मार्च 2024 में वह अग्निवीर में चयनित भी हो गया।

ट्रेनिंग पूरा करके जब वह अपने गांव लौटा तो उनकी माता लीला बाई भावुक हो गई। अपने पति को याद कर वह रोने लगी तो। वही बेटे की कामयाबी पर उसने फक्र महसूस करते हुए आरती उतारकर सम्मान किया। पूरा गांव इस पल के साक्षी बना। नववर्ष पर ही खिलेंद्र ट्रेनिंग खत्म करके अपने गांव आया है तो वहीं गांव के कई युवा भी देश सेवा में लगे हुए हैं। खिलेंद्र से प्रेरित होकर उनके साथी भी अग्नि वीर सहित देश सेवा सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं। समाज सेवी रमेश साहू सहित अन्य प्रमुख ग्रामीणों ने अग्नि वीर में चयनित होने और ट्रेनिंग खत्म करके गांव लौटने पर खिलेंद्र का सम्मान कर उनका हौसला बढ़ाया। समाजसेवी रमेश साहू ने कहा कि खिलेंद्र का जीवन बहुत ही मार्मिक और संघर्ष से भरा रहा है। गरीबी में जीवन यापन करते हुए बनवाली राम साहू, उनके पिता दर्जी का काम किया करते थे। उन पर पांच लोगों की जिम्मेदारी थी।

कोरोना काल में गांव के 12 लोगों की हुई थी मौत, पिता और बड़े पिता को खोया था खिलेंद्र ने
पर कुदरत का कहर ऐसा आया कि कोरोना काल में बनवारी राम इस दुनिया से चल बसे। उस कोरोना के दौर में हमारे गांव में 12 लोगों की मौत हुई थी। कोई कोरोना से तो कोई कोरोना के भय से काल के गाल में समा गए। बनवारी के जाने के बाद मानो उनका परिवार टूट गया। बनवारी के बड़े भाई की भी इसी तरह मौत हो गई। एक ही परिवार में दो मौत से परिवार सदमे से उबर नहीं पा रहा था। पर खिलेंद्र ने हिम्मत नहीं हारी। उनकी मां और दोनों बेटे मिलकर थोड़ी सी जमीन और मेहनत मजदूरी करके जीवन चलाते रहे। छोटा भाई खिलेंद्र रोज सुबह दौड़कर काफी संघर्ष करते हुए सेना में जाने की तैयारी करता रहा और सफलता फिर उसे एक दिन मिल ही गई तो इधर उनका बड़ा भाई भेलेंद्र अब अपने पिता के काम को देखता है। दोनों अब घर संभालने की स्थिति में आ गए हैं। समय का पहिया घूम रहा है। दुख और सुख का आना जाना लगा रहता है यही जीवन की रीत है। खिलेंद्र का जीवन हर इंसान को विपरीत परिस्थितियों में हार ना माने कि सिख की देता है। वह कहता है उनकी मां लीलाबाई उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा स्रोत है। जो उनका हर संकट में हौसला बढ़ाती रही।

मेहनत करते रहे, हौसला ना हारे, सफलता जरूर मिलती है
अग्नवीर खिलेंद्र का स्वागत सम्मान करने गंगा प्रसाद, देशमुख, बीरेंद्र कुमार साहू, तुका राम साहू,नीलेश्वर देशमुख हुलेश देशमुख ,राजू साहू ,कोमल साहू ,मानिक साहू , खिलु साहू भेलेंद्र साहू ,सोनू साहू , लघनु साहू आदि सहित समस्त ग्रामवासी उपस्थित रहे। अंत में खिलेंद्र ने गांव के अन्य युवाओं को भी प्रेरित करते हुए कहा कि मेहनत करते रहे।

अपना हौसला बिल्कुल ना खोए । एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है। सफल होकर परिवार के साथ-साथ गांव और जिले का नाम भी रोशन करे। ज्ञात हो कि पीरिद में दीपावली के अवसर पर सैनिक सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया था। जिसमें गांव के वीर जवान जो अलग-अलग क्षेत्र में देश के कोने में तैनात हैं, उनका सम्मान समाज सेवी रमेश साहू द्वारा किया गया था। उस वक्त भी खिलेंद्र साहू को सम्मानित किया गया था। उक्त सम्मान से लोगों और कर्मचारी का बहुत ही अच्छे संदेश गया कि युवा पीढ़ी ओर आगे बढ़े। हम सब मिलकर गांव का विकास के लिए जरूर हाथ बटाएंगे।
