बालोद बंद रहा सफल: शहर में पसरा रहा दिन भर सन्नाटा, व्यापारियों और नागरिकों ने दिखाई एकजुटता,नारेबाजी, बाइक रैली के साथ हुआ प्रदर्शन, प्रशासन को मांगे मनवाने के लिए दिया गया 7 दिन का अल्टीमेटम, पढ़िए पूरा मामला



व्यापारियों सहित नागरिकों ने दिखाई एकजुटता, कोर्ट को सिवनी ले जाने के विरोध में बालोद बंद रहा सफल, बाइक रैली निकालकर लोगों ने की नारेबाजी, सभा भी हुई, कलेक्ट्रेट कार्यालय को भी बालोद के भीतर लाने का मुद्दा उठा

बालोद। जिला सत्र न्यायालय को सिवनी में स्थानांतरित किए जाने के विरोध में बालोद के नागरिकों सहित विभिन्न व्यापारी संगठन ने संयुक्त रूप से बालोद बचाओ संघर्ष समिति के तत्वाधान में बालोद बंद रखा। अपनी मांगों को लेकर नागरिकों और व्यापारियों ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया और सुबह से ही दुकान लोगों ने स्वस्फूर्त बंद रखी। आवश्यक चीजों की दुकान ही खुली रखी गई थी। सुबह से ही विभिन्न व्यापारी संगठन और नागरिक बाइक रैली के माध्यम से बड़ी संख्या में व्यापारियों और नागरिकों ने जुलूस निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच कर ज्ञापन देकर अपना विरोध जताया और मांग पूरी करने की बात कही। व्यापारी एकता जिंदाबाद, बालोद के नागरिकों की एकता जिंदाबाद के नारे शहर में गूंजते रहे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम से जिलाधीश को ज्ञापन दिया गया। जिसमें बालोद जिला संयुक्त कार्यालय शहर में लाने तथा जिला सत्र न्यायालय के नवीन भवन का शहर में ही निर्माण हेतु मांग रखी गई। ज्ञापन के जरिए लोगों ने कहा सत्र 2012 में बालोद जिला बनने से शहरवासियों में विकास में रफ्तार आने की उम्मीद जगी थी । लेकिन विडम्बना ही रही कि तीव्र विकास का सपना देखने वाले शहरवासियों के विचारों को ग्रहण लग गया। संयुक्त कार्यालय शहर से 5 कि.मी. दूर ले जाने से ऐसा लगा कि शहर की आत्मा को अलग कर दिया गया । आवागमन की सुविधा न होना, शहर से दूर स्थापित होने से शहर ही नहीं जिले से दूर स्थानों से आने वाले नागरिकों को भी विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शहर का व्यापार लगातार गिरता जा रहा है। इसी तरह शहर में स्थित जिला सत्र न्यायालय को भी शहर से दूर स्थापित करने के लिए स्थल चयन कर लिया गया है। सभी शासकीय संस्थाओं का मूल उद्देश्य जनता को सरल, सुगम एवं सुलभ सुविधा मिले, जिला मुख्यालय शहर बालोद में होना चाहिए लेकिन ठीक इसके विपरीत हो रहा है। मुख्य शहर से संयुक्त जिला कार्यालय 5 कि.मी., यातायात विभाग 7 कि. मी., वर्तमान प्रस्तावित न्यायालय 5 कि.मी., पॉलिटेक्निक कॉलेज 12 कि.मी., नवोदय विद्यालय 12 कि.मी. दूर स्थित है। ऐसा लगता है कि सभी शासकीय संस्थाओं को स्थापित करते समय नागरिकों को होने वाली असुविधाओं को ध्यान नहीं रखा गया। शहर में बड़े शासकीय संस्थाओं के लिए पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध है। शासन से मांग की गई कि बालोद की जनता शांत और संतोषी स्वभाव के हैं, शहर की जनता को ही शहर में रहना है लेकिन बिना जनता की सहमति और सुझाव से शासकीय संस्थाओं को दूर ले जाने से शहर के स्वाभिमान और अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। इसलिए बालोद जिला संयुक्त कार्यालय वर्तमान को शहर से दूर सिवनी में स्थित है उसे शहर में वापस लाया जाए। बालोद जिला सत्र व्यवहार न्यायालय के लिए चयनित भूमि पर पुर्नविचार कर उसे शहर में ही स्थापित किया जाए। जो शहर तथा जिले के सभी नागरिकों के लिए उचित होगा। ऐसा नहीं होने पर शहर की जनता आक्रोशित है। जिल प्रशासन को ज्ञापन के द्वारा अल्टीमेटम दिया गया कि 7 दिनों के भीतर मांग पर निर्णय नहीं लिया गया तो अनिश्चितकालिन बालोद बंद तथा उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। यह ज्ञापन समस्त शहरवासी, संयुक्त व्यापारी संघ सर्वसमाज संगठन बालोद (छ.ग.) द्वारा दिया गया।

मुख्य न्यायाधीश , उच्च न्यायालय बिलासपुर (छ.ग.) के नाम से भी दिया गया ज्ञापन

वहीं एक अतिरिक्त ज्ञापन जिलाधीश को मुख्य न्यायाधीश , उच्च न्यायालय बिलासपुर (छ.ग.) के नाम से भी दिया गया। जिसमें बालोद जिला सत्र व्यवहार न्यायालय बालोद के नवीन भवन निर्माण पर पुर्नविचार करने की मांग की गई । इस ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान जिला सत्र व्यवहार न्यायालय बालोद का नवीन भवन का निर्माण, स्थानाभाव के कारण ही हो रहा है। चयनित स्थान शहर से दूर होने के कारण न्यायायिक प्रक्रिया की सुविधा पाने वाले नागरिकों को असुविधा एवं अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। न्याय की अपेक्षा रखने वाले नागरिकों को न्याय सुगम, सस्ता, सुलभ सुविधा मिले इसी अवधारणा के साथ उच्च न्यायालय का सम्मान करते हुए निवेदन किया गया है कि नवीन भवन हेतु चयनित स्थान पर जनता की असुविधाओं को ध्यान रखते हुए पुर्नविचार कर शहर में ही न्यायालय भवन को रखने की, शहरवासी आपसे अनुरोध करते हैं।

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