ओबीसी महासभा ने सौंपा कांकेर सांसद को राष्ट्रीय जनगणना के मुद्दे पर ज्ञापन



गुलाम भारत में ओबीसी की जाति आधारित जनगणना हो सकती है तो आजाद भारत में क्यों नहीं- ओबीसी महासभा

बालोद। ओबीसी महासभा प्रदेश इकाई छत्तीसगढ़ के द्वारा लिए गए निर्णय अनुसार छत्तीसगढ़ के सभी सांसदों के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के नाम 2021 के लंबित राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी का कोड नंबर पृथक से निर्धारित किए जाने का मांग पत्र सौंपा जा रहा है । इसी क्रम में लोकसभा क्षेत्र कांकेर के सांसद श्री भोजराज नाग को उनके निवास पर ओबीसी महासभा के प्रतिनिधि मंडल द्वारा ज्ञापन सौंपा गया । यह भी निवेदन किया गया कि ओबीसी के जनगणना के मुद्दे को लोकसभा सत्र के दौरान ध्यानाकर्षण/शुन्यकाल में सदन में रखा जावे।ज्ञापन देने के लिए प्रमुख ग्रुप से प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी राधेश्याम, प्रदेश कोषाध्यक्ष महावीर कलिहारी, बालोद जिला अध्यक्ष संतोष कौशिक, प्रदेश सह सचिव द्वय मनसुखदास साहू एवं पुनेश्वर देवांगन, जिला सचिव लेखराज साहिरो एवं लिपेश साहू शामिल हुए। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि संविधान में सामाजिक तथा शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए समुदाय को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में तीन वर्ग में रखा गया है। जनगणना में इन तीनों वर्गों की दशाओं के आंकड़े एकत्रित किया जाना चाहिए। अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति की जनगणना होती है किंतु राष्ट्रीय जनगणना फॉर्मेट में अन्य पिछड़ा वर्ग का पृथक से कोड नंबर निर्धारित नहीं होने के कारण ओबीसी की जनगणना नहीं होती है,जिसके परिणामस्वरूप ओबीसी की जनगणना तथा परिस्थितियों का आकलन नहीं हो पाने के कारण संवैधानिक प्रतिबद्धता पूर्ण रह जाती है । उन्होंने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद 340 के परिपालन में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए गठित आयोगों (काका कालेलकर आयोग, मंडल आयोग एवं मध्य प्रदेश रामजी महाजन आयोग) द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग की जनगणना कराई जाने बाबत अनुशंसाएँ की गई है तदनुसार इस हेतु संसद में बनी सहमति के आधार पर राष्ट्रीय जनगणना 2011 में पृथक से अन्य पिछड़ा वर्ग के आंकड़े एकत्र करने के प्रयास किए गए किंतु आंकड़े आज पर्यंत प्रकाशित नहीं किया गया ।उन्होने आगे कहा कि ओबीसी महासभा लंबे समय से राष्ट्रीय जनगणना 2021 के जनगणना फॉर्मेट के काँलम नंबर 13 में ओबीसी के लिए पृथक से कोड नंबर तीन एवं सामान्य वर्ग के लिए कोड नंबर चार निर्धारित कर जनगणना किया जाना चाहिए तथा जनगणना उपरांत आंकड़े सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए ,जिससे ओबीसी समाज भारत देश के नागरिक (मतदाता) होने के नाते जनसंख्या के अनुपात में हिस्सेदारी प्राप्त कर सके।

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