सेवा बंधन के नियमों के फेर में पुरानी पेंशन से वंचित…बाजार आधारित नई पेंशन योजना एनपीएस से न्यून पेंशन पाने मजबूर

बालोद। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दिलीप साहू, जिला संयोजक बीरबल देशमुख, रामकिशोर खरांशु ,जिला उपाध्यक्ष शिव शांडिल्य, वीरेंद्र देवांगन, कामता प्रसाद साहू, संतोष देवांगन, जिला सचिव नरेंद्र साहू, जिला कोषाध्यक्ष पवन कुम्भकार , ब्लॉक अध्यक्ष गुंडरदेही राजेन्द्र देशमुख, गुरूर अध्यक्ष सूरज गोपाल गंगबेर, डौंडी अध्यक्ष गजेन्द्र रावटे, डौंडीलोहारा अध्यक्ष अविनाश साहू सहित सभी पदाधिकारियों ने बताया कि 21 अगस्त 1998 से पंचायत विभाग में शिक्षा कर्मी के पद पर नियुक्त श्रीमती ललिता यादव, व्याख्याता (एल बी) शिक्षा विभाग में अपनी सेवा की 25 वर्ष सेवा पूर्ण कर जिले के डौंडीलोहारा विकास खंड से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राणाखुज्जी से 31 जुलाई 2023 को सेवानिवृत्त हुई है! पर शिक्षा विभाग के नियमों के चलते विभाग में पुरानी पेंशन के लिए 10 वर्ष सेवा बंधन के कारण बिना पुरानी पेंशन के लाभ के बाजार आधारित एनपीएस में अति न्यून पेंशन 2312 रुपये पेंशन पाने मजबूर हो गई!शिक्षक एल बी संवर्ग के लिए संविलियन तिथि को ही पेंशन योग्य स्थापना तिथि मानने के चलते पुरानी पेंशन के लाभ से वंचित रह गई व एनपीएस पर कुल जमा राशि का 60 प्रतिशत एकमुश्त भुगतान उपरांत शेष 40 प्रतिशत राशि पर एनएसडीएल द्वारा अधिकृत सेक्टर द्वारा उनके लिए मात्र 2312 रूपये मासिक पेंशन निर्धारित किया गया है..जो माह अगस्त से भुगतान होगा! 1998 से नियुक्त शिक्षा कर्मियों के संविलियन के पूर्व के सेवा को लाभ के लिए गणना नहीं करने से 20 वर्ष की सेवा शून्य की स्थिति में है! सबसे ज्यादा नुकसान 1998 से नियुक्त शिक्षा कर्मियों को हुआ है! इसी प्रकार क्रमशः नियुक्त सभी शिक्षक अपने संविलियन के पूर्व की सेवा लाभ से वंचित है!
पेंशन पर टेंशन तो है ही.. दूसरे सभी विभागों में है पर पहला ऐसा कर्मचारी संवर्ग जिनके लिए 24/25 वर्ष की सेवा के बावजूद क्रमोन्नति का प्रावधान भी नहीं हो पाया!सेवानिवृत्ति का क्रम जारी है.पर अभी भी वही सवाल. पेंशन, क्रमोन्नति, विसंगति जस के तस है! इसे दुर्भाग्य कहिये या विडम्बना श्रीमती ललिता यादव शिक्षा कर्मी के रूप में सदैव संघर्ष कर शिक्षा विभाग में संविलियन, पेंशन सहित हर एक आंदोलन में सेवानिवृत्ति के पहले तक संघर्ष की व एसोसिएशन के प्रांतीय महिला प्रतिनिधि सहित शुरुआत से संगठन के विभिन्न पदो के दायित्व निर्वहन कर संघर्ष का नेतृत्व की परंतु आज स्वयं के सेवानिवृत्ति पर न तो उन्हें पुरानी पेंशन का लाभ मिला.. बल्कि अति न्यून पेंशन लेने मजबूर हो गई! ऐसे ही जिले से पूर्व में भी बिना पेंशन सेवानिवृत्त होकर एनपीएस के तहत न्यून पेंशन लेने विसंगति पूर्ण नियमों का कुछ एल बी संवर्ग के कई शिक्षक दंश झेल रहे हैं! प्रदेश में नियमों के फेर में बिना पुरानी पेंशन के 2028 से पूर्व हजारों शिक्षक एल बी रिटायरमेंट हो जाएंगे व वे भी एनपीएस के तहत बहुत कम पेंशन से गुजारा करने मजबूर होंगे! ज्ञातव्य है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने छत्तीसगढ़ में पुरानी पेंशन लागू करने का साहसिक व ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिस फैसले का सभी शिक्षकों ने स्वागत भी किया !किंतु पुरानी पेंशन में आ रही विसंगति प्रथम नियुक्ति तिथि से लागू कर शिक्षक संवर्ग को पूर्ण पेंशन का लाभ न देने से सभी कर्मचारी भविष्य को लेकर चिंता चिंतित है! ज्ञात हो कि 11 मई 2022 को प्रकाशित राजपत्र में 1 नवंबर 2004 अथवा उसके पश्चात नियुक्त समस्त कर्मचारियों के लिए नवीन अंशदायी पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना लागू किया गया है! छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम 1976 में संशोधन करते हुए दिनांक 01 नवंबर 2004 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रवृत्त (आरंभ) करने का राजपत्र में प्रकाशन किया गया है! साथ ही 01 नवंबर 2004 के पश्चात सेवानिवृत्त / दिवंगत कर्मचारियों के प्रकरणों में भी पुरानी पेंशन योजना लागू करने का प्रावधान किया गया है। वित्त विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिनांक 27 /10/2004 को नवीन अंशदायी पेंशन योजना लागू करने का आदेश जारी किया !वित्त विभाग की सहमति से छत्तीसगढ़ शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग रायपुर द्वारा दिनांक 2/11 /2011 को जारी आदेश में शिक्षाकर्मियों के लिए 1 अप्रैल 2012 से अंशदायी पेंशन योजना लागू किया गया। 11 मई 2022 को जारी राजपत्र में भी लिखा गया है कि दिनांक 27 अक्टूबर 2004 द्वारा राज्य शासन के पेंशन योग्य स्थापना में दिनांक 1/11/ 2004 अथवा उसके पश्चात नियुक्त समस्त कर्मचारियों के लिए लागू की गई थी के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना बहाल करते हैं तथा बिंदु क्रमांक 6 में लिखा है कि शासकीय सेवकों के अंशदान की जमा मूल राशि को छत्तीसगढ़ सामान्य भविष्य निधि खाते में अंतरित किया जाएगा! इसका मतलब है कि जिस दिन से शासकीय हुए उस दिन से जमा राशि से नहीं है बल्कि जिस दिन से एनपीएस कटौती हुई उस राशि को सीजीपीएफ खाते में अंतरित करने से है।यदि शिक्षा कर्मी शासकीय नही/ राज्य सरकार के कर्मचारी नही/ पेंशन योग्य स्थापना में नही तो आखिर सरकार ने एनपीएस योजना में शामिल क्यों किया।वित्त विभाग द्वारा 27 /10/2004 को जारी आदेश में स्पस्ट लिखा है कि दिनांक 1/11/2004 अथवा इसके पश्चात पेंशन योग्य स्थापना में नवनियुक्त कर्मचारियों के लिए वर्तमान पेंशन योजना के स्थान पर एक नई परिभाषित अंशदान आधारित पेंशन योजना लागू करने का निर्णय लिया गया है” – जब शिक्षा कर्मी पेंशन योग्य स्थापना में नही, राज्य शासन के कर्मचारी नही तो एनपीएस योजना में शामिल कैसे हुए। जिन कर्मचारियों को एनपीएस योजना में शामिल किया गया वे कर्मचारी पेंशन योग्य स्थापना व राज्य शासन के कर्मचारी ही माने जाएंगे ।सभी पदाधिकारियों ने कहा कि संविलियन के पूर्व पंचायत विभाग की सेवा का गणना कर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम 1976 के अनुसार पेंशन निर्धारण व ग्रेच्युटी का लाभ शिक्षक एल बी संवर्ग को प्रदान करने सरकार अतिशीघ्र निर्णय लेकर कर्मचारियों के भविष्य की चिंता दूर करे।
