फोटो स्टोरी….धान की कलाकारी में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं चंदू साहू, धान के दानों से तैयार किया भगवान जगन्नाथ की मूर्ति



बालोद/दुर्ग । ग्राम बोरई (नगपुरा) के रहने वाले चंदू उर्फ चंद्रप्रकाश साहू इन दिनों पूरे छत्तीसगढ़ में धान की कलाकारी के नाम से जाने जा रहे हैं। बालोद, दुर्ग, राजनांदगांव, खैरागढ़ सहित विभिन्न जगहों पर वे अपने धान की कलाकारी से संबंधित स्टॉल भी लगाते हैं। बालोद आगमन पर उन्होंने हमसे खास बातचीत में बताया कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहते हैं। इसलिए उन्होंने अपने हुनर को धान में तराशा और देखते-देखते उन्होंने स्वयं से ही धान के कई कलाकारी से चीज बनानी सीखे। वर्तमान में रथ दूज पर होने एक आकर्षक भगवान जगन्नाथ की छोटी सी झांकी नुमा धान की मूर्ति बनाई है। जो लोगों को प्रभावित कर रही है। इस झांकी में भगवान जगन्नाथ के साथ बलभद्र और सुभद्रा भी नजर आ रहे हैं। इसके पहले भी वे समय-समय पर नवरात्रि में मां दुर्गा की धान की झांकी तो विभिन्न अवसरों पर आकर्षक चीज तैयार करते हैं। लोगों द्वारा ऑर्डर पर भी धान की चीजें बनाते हैं। जैसे माता रानी का श्रृंगार, झालर, चिड़ियों के खाने के लिए, गले के ज्वेलरी, बाली, राखी, बैच, सजावट और शोपीस के कई चीजे धान से ही आकर्षक तरीके से तैयार करते हैं। जो लोगों को सहज ही आकर्षित कर लेती है। वे कहते हैं कि उन्होंने लोक संगीत की पढ़ाई की है। खैरागढ़ से उन्होंने शिक्षा और डिग्री ली है। धान की कलाकारी का ख्याल उन्हें स्वयं ही आया। स्वयं से ही सीखते हुए इस दिशा में मेहनत की और आज अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं। विशेष अवसरों पर वे संबंधित स्टॉल बनाकर लोगों को आकर्षित करते हैं और धीरे-धीरे इनकी बिक्री भी बढ़ रही है। विभिन्न अवसरों, आयोजनों पर भी अपना स्टॉल लगाकर लोगों को छत्तीसगढ़ के धान से परिचित कराते हैं। इस तरह चंदू साहू छत्तीसगढ़ के साथ दूसरे राज्यों में भी जाने पहचाने जा रहे हैं। वह अपने लोक संगीत के आयोजन के साथ-साथ धान कलाकारी के स्टॉल के जरिए विभिन्न राज्यों तक भी पहुंच चुके हैं। अपने लोक संगीत के आयोजनों के तहत वे जहां-जहां भी दूसरे राज्य में जाते हैं वहां अपने धान से बनी चीजों का स्टॉल भी लगाते हैं। कर्नाटक, बेंगलुरु, पंजाब सहित अन्य कई राज्यों में भी अपने धान की कलाकारी का प्रदर्शन कर चुके हैं। और उन्हें खूब सराहना मिली है।

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