हमारे नायक में चयनित सुकमा जिले की नन्हीं दिव्यांग छात्रा सोड़ी भीमे को एक पैर से नृत्य करते देख अचंभित रह जाते हैं लोग, अपने हौसले और हिम्मत से अपनी कमजोरी को बनाया अपनी ताकत,,, आप भी पढ़िए इस मार्मिक कहानी को पढ़ई तुंहर दुआर के ब्लॉग लेखक गौतम शर्मा की कलम से…



रायपुर/सुकमा “अपने हौसलों को, यह मत बताओ कि, तुम्हारी परेशानी कितनी बड़ी है | बल्कि अपनी परेशानी को, ये बताओ कि, तुम्हारा हौसला कितना बड़ा है ||”

इन पंक्तियों को चरितार्थ किया है, हमारी नन्हीं बहादुर नायक सोड़ी भीमे ने | सोड़ी अस्थिबाधित दिव्यांग छात्रा है, जो आकार आवासीय संस्था कुम्हाररस, सुकमा में कक्षा 5 वीं में अध्ययनरत है | सोड़ी भीमे अतिसंवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र के पहाड़ी ढलानों पर स्थित अत्यंत पिछड़े दूरस्थ वनांचल गाँव केशापारा गुफड़ी में निवास करती है | इनके गाँव में मूलभूत सुविधाओं की काफी कमी है | यहाँ तक की गाँव में सड़क की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है |

आइये जानते है हमारी नन्हीं नायक सोड़ी भीमे के बारे में जो आत्मविश्वास से ओतप्रोत है |

हमारे नायक के राज्य ब्लॉग लेखक गौतम शर्मा ने चर्चा के दौरान बताया कि सोड़ी के पिता मासा सोड़ी से बात करने के दौरान सोड़ी के साथ बचपन में घटित दुर्घटना के बारे में सुनकर मैं एकदम सहम-सा गया ! कि एक 3 साल की छोटी सी बच्ची ने इतना असहनीय दर्द कैसे सहा होगा | इस छोटी सी बच्ची की मन:स्थिति उस समय कैसी रही होगी | सोड़ी के पिता ने जब मुझे बताया कि सोड़ी जब 3 साल की थी, तो ठंड के मौसम में घर के आँगन में आग तापने के दौरान खेलते – खेलते वो अचानक गिर पड़ी और उसका दाहिना पैर बुरी तरह से उस आग में झुलस गया और वह असहनीय दर्द से जोर – जोर से चिखने – चिल्लाने लगी | यह देखकर घर वालों का दिल दहल गया, कि अचानक यह क्या हो गया | कुछ देर पहले की ही तो, सोड़ी हंसते – खिलखिलाते, उछल-कूद करते हुए खेल रही थी और कुछ ही देर में उसकी हंसी चिख में कैसे बदल गयी|

सोड़ी के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने और जागरूकता की कमी होने के कारण उसके घरवालों ने उसका ईलाज आस-पास ही कराया, जिसके कारण सही ईलाज न होने से उसका दाहिना पैर पूरी तरह से खराब हो गया | इस घटना के बाद सोड़ी का जीवन पूरी तरह से बदल गया | ये 3 साल की बच्ची एकदम चुप सा हो गई| न किसी से बात करना, न ही अच्छे से कुछ खाना – पीना और न ही किसी के साथ खेलना – कूदना | इस दर्दनाक घटना ने उसकी मुस्कुराहट ही छिन ली|

इस घटना का सोड़ी पर बहुत बुरा असर हुआ था, वो किसी से भी बात नहीं करती थी | बस घर के एक कमरें में चुपचाप बैठी रहती थी और अपने साथ घटित उस भयानक दर्दनाक घटना के बारे में सोचकर उदास होकर रोने लगती थी | कहते है न वक्त बड़े से बड़े जख्म को भर देता है वैसे ही धीरे – धीरे वक्त के साथ सोड़ी के अंदर भी बहुत बदलाव आ गया और उसने अपनी इस कमजोरी को खुद पर हावी नहीं होने दिया | बहुत जल्द वह अपने एक ही पैर से चलना सीख गयी |


सोड़ी जैसे ही 6 साल की हुई उसके पिता ने गाँव के सरकारी स्कूल शासकीय प्राथमिक शाला केशापारा गुफड़ी में उसका नाम दर्ज करवाया, लेकिन घर से स्कूल का रास्ता उबड़-खाबड़ होने की वजह से उसे विद्यालय तक पहुँचने में काफी दिक्कतें हो रही थी, लेकिन उसके अंदर पढ़ाई की ललक की वजह से वह प्रतिदिन विद्यालय जाती थी | जब सोड़ी के बारे में सुकमा जिले में समावेशी शिक्षा के तहत् संचालित आकार आवासीय संस्था को हुई, तो उन्होंने सोड़ी के पिता से बात करके उसका दाखिला यहाँ करवाया | शुरू – शुरू में यहाँ भी सोड़ी एकदम चुपचाप रहती थी, लेकिन धीरे – धीरे सभी बच्चों के साथ घुल – मिल गई | अब वह सभी बच्चों के साथ पढ़ाई करने के साथ खेलती – कूदती भी है |

कहते हैं न कि – “एक सपने के टूटकर, चकनाचूर हो जाने के बाद, दूसरा सपना देखने के, हौसले को ‘ज़िन्दगी कहते हैं |”
वैसे ही सोड़ी ने अपने जीवन का दूसरा सपना आकार आवासीय संस्था में दाखिले के बाद देखना शुरू किया | सोड़ी ने बहुत ही कम समय में इस संस्था में रहकर बहुत कुछ सीख लिया और उसके अंदर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ, जिसकी वजह से वह अपनी सबसे बड़ी कमी को अपनी ताकत बनाया और वह एक सामान्य बच्चे की तरह एक पैर से ही सब कुछ करने लगी |

सोड़ी का नृत्य विधा में विशेष रूचि है, जिसे देखते हुए आकार आवासीय संस्था ने उसे नृत्य करने हेतु प्रेरित किया | कुछ ही दिनों में वह नृत्य विधा में भी पारंगत हो गई और आज सामान्य बच्चों के साथ भी नृत्य करती है | सोड़ी अपने साथ के एक मूकबधिर छात्र से प्रेरित होकर नृत्य करना शुरू की थी और आज उसकी पहचान एक कुशल नृत्यांगना के रूप में हो गई है |
पिछले वर्ष सोड़ी ने जिला प्रशासन सुकमा द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी नृत्य विधा में भाग लिया और काफी उम्दा प्रदर्शन किया | इस कार्यक्रम में जिले के बड़े – बड़े अधिकारियों समेत पूरा शहर उपस्थित था | सोड़ी को एक पैर से इतना अच्छा प्रदर्शन करता देख तालियों की जो गड़गड़ाहट हुई, उससे पूरा शहर गुंज उठा और सभी ने उसके हौसले और हिम्मत की जमकर प्रशंसा की | सोड़ी ने अपने हिम्मत और हौसले से यह साबित कर दिया की हमें किसी भी स्थिति में हार नहीं मानना चाहिए |

“डर मुझे भी लगा फासला देखकर, पर मैं बढ़ता गया रास्ता देखकर | खुद-ब-खुद मेरे नजदीक आती गई, मेरी मंजिल मेरा हौसला देखकर ||”

पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के ब्लॉग लेखक गौतम शर्मा

ब्लॉग लेखक गौतम ने बताया कि इस नन्हीं बहादुर बिटिया के बारे में लिखते – लिखते वो अपने आँसू नहीं रोक पाये| सलाम है इस साहसी और बहादुर बिटिया के हौसले और हिम्मत को |

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