DAILY BALOD NEWS

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जिला मुख्यालय के उच्च शिक्षण संस्थान के शौचालय का बुरा हाल, गंदगी से सब बेहाल

साफ-सफाई को लेकर छात्रों ने प्रभारी प्राचार्य को सौपा ज्ञापन

बालोद। जिला मुख्यालय स्थित शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय का शौचालय सफाई और मेंटनेंस की पोल खोल रहा है। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि जिले के सरकारी शिक्षण संस्थान में छात्र-छात्राओं के लिए बनवाएं गए शौचालयों को लेकर विभाग कितना गंभीर है। छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन साफ सफाई को लेकर महाविद्यालय प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा है। शौचालय की साफ-सफाई को लेकर छात्र नेता अभिन्न यादव के नेतृत्व में रोशन सोनकर, भानु ठाकुर, प्रियंश आदि छात्रों ने महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा है।

महाविद्यालय प्रबंधन नही दे रहा ध्यान

जिला मुख्यालय बालोद में शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय संचालित है, जहां छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन साफ सफाई को लेकर महाविद्यालय प्रबंधन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। सफाई नहीं होने के कारण शौचालय गंदगी से भरा पड़ा है। उठने वाले बदबू के चलते छात्र छात्राएं शौचालय का उपयोग करना ही छोड़ दिए हैं। दरअसल इसमें प्रबंधन की लापरवाही साफ नजर आ रही है।

उच्च शिक्षण संस्थान के शौचालय का बुरा हाल

जिले में स्वच्छता अभियान के तहत स्कूलों से लेकर गांव-गांव में शौचालय बनाकर जागरूकता लाने का लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन शिक्षण संस्थान के शौचालय का बुरा हाल है। शौचालय की बदहाली के कारण महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को खुले में जाना पड़ता है। इस बात को लेकर जहां कालेज प्रबंधन खामोश बैठा हैं। वहीं जिला प्रशासन के अफसरों को भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। इससे छात्र छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में शौचालय होने के बाद भी अनुपयोगी साबित हो रहा है।

खुली व्यवस्था की पोल

शौचालय की दुर्दशा से बालोद जिले के उच्च शिक्षण संस्थान के व्यवस्था की पोल खुलती दिख रही है। प्रबंधन की अनदेखी, उदासीनता के चलते शासन की मंशा मूर्त रूप नहीं ले पा रहा है। यही वजह है कि बालोद जिले के अधिकांश स्कूलों पर भी शौचालयों का यही हाल नजऱ आता है। इससे छात्र-छात्राएं अधिक परेशान हैं।

शौचालय एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या हैं: अभिन्न

मामले में छात्र नेता अभिन्न यादव का कहना है कि, यदि किसी छात्र को लगता है कि उपलब्ध शौचालय गंदा है, तो वह हाथ धोना छोड़ सकता है। इससे एक श्रृंखलाबद्ध प्रतिक्रिया उत्पन्न हो सकती है और रोगाणु फैलने से संपूर्ण महाविद्यालय प्रणाली खतरे में पड़ सकती है। इसलिए, महाविद्यालय के समग्र स्वास्थ्य के लिए शौचालय की स्वच्छता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

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