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धोबनपुरी में शिव महापुराण कथा जारी: महराज अशोक कृष्ण ने बताया शमी के पत्ते और मादर फूल का महत्व, जानिए किस तरह से मिला था उन्हे श्राप और आज हैं पूजनीय

बालोद/ गुरुर। गुरुर ब्लॉक के ग्राम धोबनपुरी में पांच दिवसीय शिव महापुराण कथा का आयोजन 3 से 7 जनवरी तक किया जा रहा है। जिसमें कथा वाचक सत्संग धाम सगुनी के पंडित अशोक कृष्ण महाराज हैं। आयोजन कर्ता जनपद सदस्य संध्या अजेंद्र साहू ने बताया कथा समय 3 से 6 जनवरी तक दोपहर 1:00 से 5:00 बजे और 7 जनवरी को सुबह 10:00 से 1:00 बजे और 2:00 से 5:00 बजे तक होगा। 7 जनवरी को भोजन भंडारा का आयोजन भी किया गया है। शिव सनातन धर्म जन जागरण युवा मित्र मंडली गुरुर भी आयोजन में सहयोगी है । 3 जनवरी को शिव महात्म्य हुआ।जिसमें कलश यात्रा, वेदी पूजन हुआ।4 जनवरी को हिमालय प्रसंग, माता पार्वती के पिता प्रसंग के बारे में बताया। 5 जनवरी को शिव विवाह, 6 को गणेश प्राकट्य,7 को ज्योतिर्लिंग हवन पूजन होगा।

महराज ने बताया शिव और गणेश की पूजा में शमी पत्ते और मादर फूल का महत्व

कथा के दौरान अशोक कृष्ण महाराज ने कहा शमी पत्र के बगैर शिव पूजा नही होता। उसके बगैर पूजा पूर्ण नहीं माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से शमी पत्र को शनि का पौधा बताया गया है। मान्यता है कि इसे अपने घर में लगाने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है साथ ही यदि किसी पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है तो शमी की नियमित पूजा करनी चाहिए। मान्यता है ऐसे लोगों को शमी के पौधा का पत्ता गणेश जी को चढ़ाने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है। शमी को देश के कुछ हिस्सों में खेजड़ी के नाम से भी जाना जाता है। शमी पत्र का खास इस्तेमाल पूजा में किया जाता है। शमी का पौधा जीवन में परेशानियों और कष्टों से मुक्ति दिलाने का कार्य करता है। मान्यता है कि भगवान शिव को शमी का पत्ता चढ़ाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही इसका पत्ता भगवान गणेश और शनिदेव को भी चढ़ाया जाता है। आक का पौधा जिसे आम बोलचाल की भाषा में मदार और छग में फुडहर के नाम से भी जानते हैं। ये पौधा वैसे तो बड़ी ही आसानी से आपको राह में चलते हुए नज़र आ ही जाएगा परन्तु जितना यह सामान्यतः हमें मिल जाता है उतना सामान्य है नहीं। आक के पौधे का हिन्दू धर्म में ख़ास महत्व है। दरअसल धार्मिक मान्यताएं कहती हैं कि इस पौधे में विघ्नहर्ता भगवान गणेश का वास है। शायद इसलिए इस पौधे के फूल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं। आक के पौधे को यदि किसी शुभ दिन मुहूर्त देख लगाया जाए तो यह घर-परिवार में सुख-समृद्धि और बरकत की सुंगंधे फैला देता है।

मिला था दोनो को श्राप, गणेश जी के वरदान से बन गए तीनो लोक में पूजनीय

अशोक कृष्ण महराज ने बताया
शमी, ऋषि ओरा की पुत्री थी। ऋषि अपनी पुत्री से अत्यंत प्रेम करते थे। ऋषि ने अपनी पुत्री शमी का विवाह धौम्य ऋषि के पुत्र मदार के साथ किया था। क्योंकि मदार उस समय ऋषि सोनक से शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। इसलिए विवाह के पश्चात हुए अपनी पत्नी शमी को अपने घर छोड़कर पुनः अपनी शिक्षा पूरी करने ऋषि सोनक के आश्रम चले गए । मदार युवावस्था में पहुंचे तब अपनी पत्नी शमी को लेकर ऋषि सोनक का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आश्रम की ओर निकल पड़े। रास्ते में विघ्नहर्ता गणेश जी के अनन्य भक्त ऋषि भ्रीसंधि का आश्रम पड़ता था। तब मदार और शमी ने उनके दर्शन आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए ऋषि भ्रीसंधि के आश्रम जाने का विचार किया। ऋषि भ्रीसंधी ने गणेश जी को प्रसन्न कर उन्हें के जैसे गजमुख होने का आशीर्वाद प्राप्त किया था। जिसके कारण उनका मुख गणेश के समान ही था। मदार को ऋषि के गजमुख होने का ज्ञान नहीं था। जब वे आश्रम पहुंचे तो उन्हें उनके गजमुख को देखकर हंसी आ गई और वह ऋषि का उपवास करने लगे। तब ऋषि ने दोनो को श्राप दे दिया कि तुम दोनों वृक्ष बन जाओ और ऐसे वृक्ष बनो जिसे कोई पशु पक्षी भी ना खाए और ना ही उसके पास आए। मदार के आश्रम नहीं आने पर ढूंढते हुए जब ऋषि सोनक भ्रीसंधी के आश्रम पहुंचे जहां उन्हें इस घटना के बारे में पता चला। तब सोनक ऋषि ने मदार और शमी को श्राप मुक्त करने का अनुरोध किया। भ्रीशंधी ने इस पर असमर्थता बता गणेश के पास पहुंचे। गणेश ने वरदान दिया कि यह दोनों वृक्ष शमी और मदार तीनों लोकों में पूजनीय होंगे और भगवान शिव की पूजा इन दोनों इन दोनों के बिना अपूर्ण होगी। या दोनों पति-पत्नी अर्थात मदार और शमी जहां साथ में होंगे वहां मैं स्वयं रिद्धि सिद्धि के साथ निवास करूंगा।

शिव महापुराण कथा सुनने उमड़ रही भीड़

संध्या अजेंद्र साहू ने बताया की पांच दिवसीय शिव महापुराण कथा का आयोजन ग्राम धोबनपुरी में आयोजित है। आप सभी श्रद्धालु गण शिव भक्त गण सादर आमंत्रित हैं। कथा सुनने आस पास के लोगों मे काफी उत्साह शिव जी के प्रति देखने को मिल रहा है। कार्यक्रम में ग्राम वासीयों का जबरदस्त सहयोग दिखाई दिया है। आयोजन कर्ता अजेंद्र साहू महामंत्री भाजयुमो गुरुर एवं संध्या साहू जनपद सदस्य गुरुर एवं युवा मित्र मंडली है। इस सभी ने धर्म के प्रति लोगों को जोड़ने का भगवान शिव के प्रति प्रेम श्रद्धा और विश्वास जगाने का एक छोटा सा प्रयास किया है। पहले दिन गाँव में भव्य कलश यात्रा के माध्यम से शुरुआत शिव महत्तम कथा का लोगों ने श्रवन किया। दुसरा दिन हिमालय दर्शन कथा के माध्यम से लोगों का पंडित अशोक कृष्ण जी महाराज ने मन मोह लिया।

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