बालोद। छत्तीसगढ़ के कर्मचारी अधिकारियों में इस समय चर्चा का बाजार गर्म है क्या संघर्ष, आंदोलन, और निरंतर अपनी मांगों के लिए जद्दोजहद ही छत्तीसगढ़ के कर्मचारी अधिकारियों की नियति बन चुकी है? विषय चिन्तन योग्य है।घनश्याम पुरी जिलाध्यक्ष स्वास्थ्य एवं बहुउद्देशीय कर्मचारी संघ जिला बालोद ने कहा आचार संहिता के समय डी ए की घोषणा होने के बाद भी कर्मचारी ठगे गए। नई सरकार से उम्मीदें हैं और ये उम्मीदें इसलिए भी हैं क्योंकि उनके घोषणा पत्र में तमाम तरह के वादे हैं। किसानों एवं अन्य मुद्दों पर सरकार ने कार्रवाई शुरू भी कर दी है। जिसे देखते हुए छत्तीसगढ़ के कर्मचारी अधिकारी भी आशान्वित हो रहे हैं कि जल्द ही उनकी भी बारी आए और उनके गंभीर आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके।कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन पुनः तत्पर है। संयोजक कमल वर्मा के नेतृत्व में फेडरेशन के विभिन्न वरिष्ठ व स्वास्थ्य विभाग के प्रांताध्यक्ष श्री पंकज पांडेय जी और पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री सहित सरकार एवं भारतीय जनता पार्टी के अनेक कद्दावर नेताओं से मिलकर अपनी चिंता से अवगत कराया है। आगामी रणनीति पर चर्चा चल रही है जल्द ही फेडरेशन की बैठक में कर्मचारी हितों में हो रहे विलंब पर एक कांक्रीट डिसीजन एवं रणनीति पर चर्चा होगी। लोकसभा चुनाव सामने है। आचार संहिता के पूर्व अपनी मांगों के लिए एक भरपूर प्रयास आवश्यक है अन्यथा इंतजार और लंबा होगा।
क्या मिल पाएगा कर्मचारियों को उनका हक? डी ए, सातवें वेतन मान का एरियर्स सहित कई मुद्दे लंबित: घनश्याम
