DAILY BALOD NEWS

EDITOR IN CHIEF – DEEPAK YADAV.9755235270

Advertisement

14 साल की बेदिका श्याम ने पर्यावरण को बचाने अपनाया अनोखा उपाय

बालोद/डौंडी। आदिवासी अंचल क्षेत्र की बेटी बेदिका श्याम, ग्राम- गुजरा, डोंडी बालोद की रहने वाली हैं बेदिका की उम्र 14साल क्लास 10 वीं में अभी पढ़ाई कर रही हैं 2020 से पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए 100से भी ज्यादा पौधे लगा चुकी है । उन्होंने बताया कि हमारे घर के पास रहने वाली दीदी नीलिमा श्याम जो हमें एक शिक्षक के रूप में हमें निशुल्क पढ़ाती है उनसे ही पर्यावरण के बारे में सीखें और उनके मार्गदर्शन से पर्यावरण को सुरक्षित करने का ख्याल आया। कभी भी हमने पर्यावरण को पुस्तक के जरिए नहीं देखा हम अपने गांव के जंगलों में जाकर पेड़ों के दर्द को महसूस कर, विजिट करके सीखा । तब से पर्यावरण हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण ये जाना और हमारे उन जंगलों के पेड़ पौधे वनस्पतियां जल जानवरों से सीखा कर कुछ पर्यावरण को बचाने के लिए संकल्प ली । और दीवारों में पर्यावरण के बारे में लिखें कर लोगों को जागरूक और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए लोगों को पौधे भेंट करती हूं।
बीजों को सुरक्षित रखने के लिए एक अनोखा उपाय अपनाया
बेदिका बताती हैं की हम गर्मी के दिनों में पौधारोपण न लगाकर कर , हम गर्मी के दिनों में बीजों का संरक्षण करें। क्यों की गर्मी के दिनों में पौधा लगाने से पौधे गर्मी और धूप के संपर्क में आने से पौधों पर वाष्पोत्सर्जन होने लगता है और पत्तियां मुरझाने लगती है इसके अलावा जब पौधों को बहुत अधिक पानी दिया जाता है तो मिट्टी में अत्यधिक नमी के कारण बैक्टीरिया विकसित हो सकते हैं जिससे ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है और फंगल पैदा हो जाता है, इस लिए हम बीजों को सुरक्षित रखने के लिए काली मिट्टी के गोले बना कर उसमें बीजा डाल कर उसको पैक कर देते हैं काली मिट्टी का उपयोग मिट्टी लोहा ,चूना, कैल्शियम पोटाश ,मैग्नीशियम ,एलुमिनियम जैसे खनिजों से समृद्ध है इसमें उच्च जल धारण क्षमता होती है इसलिए इस मिट्टी का उपयोग करते हैंऔर उस गोले के ऊपर गोबर का लेब लगा देते हैं गोबर का लेब इस लिए की गोबर की खाद मिट्टी में वायु संचार बढ़ाता है और फफूंद, गलन, सूखा आदि रोग से बचा सके बीजों को इस लिए और जब तक न सूखे तब तक उसको हम डिब्बे में नहीं रखतें हैं जैसे सूखा जाता हैं फिर उसे डिब्बा में बंद कर के रखा देते फिर जैसे ही बरसात का मौसम आता है फिर उसे बोना शुरू कर देते हैं ।

You cannot copy content of this page