बालोद पोस्ट ऑफिस में लगी बाबासाहेब के ऊपर डाक टिकट की प्रदर्शनी, संविधान निर्माता अंबेडकर के जीवन के अंश को जान सकेंगे लोग



बालोद। देशभर में आज संविधान के निर्माता बाबा साहेब बीआर अंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है। 31 मार्च 1990 को उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उन्होंने ना सिर्फ आजादी की लड़ाई में ना सिर्फ एक अहम भूमिका निभाई बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए संविधान निर्माण की भी जिम्मेदारी उठाई. हर साल उनकी जयंती को धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है। इस कड़ी में भी बालोद के पोस्ट ऑफिस में उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित डाक टिकट की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। जिन्हें शासन द्वारा विभिन्न अवसरों पर जारी किए जाते थे। उक्त टिकटों का संग्रहण नगर के वरिष्ठ संग्राहक डॉ प्रदीप जैन के द्वारा किया गया है। लोगों को अंबेडकर के कार्यों और देश के संविधान निर्माण में योगदान के प्रति जागरूक करने के लिए उन्होंने पोस्ट ऑफिस में टिकटों की प्रदर्शनी लगाई है।

14 अप्रैल 1891 में जन्मे बाबा साहेब की इस साल 132 वीं जयंती मनाई जा रही है। आपको बता दें, डॉ. बीआर अंबेडकर की जयंती के दिन सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है। उन्होंने देश से जाति प्रथा और समाज में कुव्यवस्था को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई थी. उनका मानना था कि सभी जाति के लोगों को एक जैसा अधिकार मिलना चाहिए ताकि आगे चलकर किसी भी प्रकार भेदभाव ना हो. उन्होंने अपने जीवन काल में कई महत्वपूर्ण आंदोलनों में भी हिस्सा लिया. एक दलित परिवार से आने वाले बीआर अंबेडकर ने अपने जीवन में बहुत यातनाएं झेलीं लेकिन कभी किसी कमजोर का साथ नहीं छोड़ा. यही वजह है कि वे आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं. उन्हें आज भी उतने ही आदर और सम्मान के साथ याद किया जाता है.

लोगों को डाक टिकट के जरिए करेंगे जागरूक

देश के साथ साथ विदेशों में भी उनकी जन्म जयंती को उत्सव के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन बाबासाहेब के कामों के बारे में लोगों को बताया जाता है. इतना ही नहीं, जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज में व्याप्त बुराइयों को खत्म करने की भी अपील की जाती है. जगह जगह नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है. इसके अलावा, वाद विवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है. ऐसे ही क्रम में डाक टिकट संग्राहक प्रदीप जैन टिकट प्रदर्शनी के जरिए लोगों को जागरूक करेंगे।

डॉक्टर जैन ने अंबेडकर के जीवन के कुछ पल को साझा किया

टिकट प्रदर्शनी के साथ उनके जयंती पर मीडिया के जरिए डॉक्टर जैन ने बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के जीवन संघर्ष के कुछ पलों के बारे में भी बताया। उन्होंने आंबेडकर के बारे में बताया कि वे एक प्रख्यात अर्थशास्त्री, कानूनविद, राजनेता तथा समाज सुधारक थे। अपने प्रगतिशील कृतित्व और रोशन व्यक्तित्व के कारण वे आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।
भीमराव रामजी आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को एवं देहत्याग – 6 दिसंबर, 1956 को हुआ था। डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर के नाम लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक भी थे। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और उन्होंने तथाकथित दलितों में व्याप्त भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। उनके सफल नेतृत्व में ही हमने भारतीय गणतंत्र का सपना साकार होते देखा।
अंबेडकरजी को बचपन से ही अपनी जाति के कारण भेदभाव से गुजरना पड़ा था और इसका उनके कोमल मन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा था। बात 1901 की है जब अंबेडकर सतारा से कोरेगाँव अपने पिता से मिलने जा रहे थे तब बैलगाड़ी वाले ने उन्हें अपनी बैलगाड़ी पर बैठाने से इंकार कर दिया। दोगुने पैसे देने पर उसने कहा कि अंबेडकर और उनके भाई बैलगाड़ी चलाएंगे और वह बैलगाड़ी वाला उनके साथ पैदल चलेगा। कभी उन्हें जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया तो कभी किसी खास अवसर पर मेहमान की तरह जाने के बावजूद भी नौकर ने उन्हें यह कहकर खाना नहीं परोसा कि वह एक विशेष जाति से हैं। शायद यही सब कारण होंगे जिनकी वजह से बाबासाहेब ने जाति व्यवस्था की वकालत करने वाली किताब मनुस्मृति को जलाया था। 
ये तो हम सभी जानते हैं कि डॉ भीमराव अंबेडकर संविधान निर्माता के तौर पर प्रसिद्ध हैं, लेकिन हर कोई उनके जीवन की उपलब्धियों के बारे में नहीं जनता। पूरे देश में हर साल 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के रूप में मनाया जाता है। डाॅ. भीमराव अंबेडकर जी का पूरा जीवन संघर्षरत रहा है। जनहित में किये गए उनके प्रयासों और देश के गरीबों और दलितों के लिए किये गए उनके कार्यों के लिए उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च सम्मान ‘भारत-रत्न’ दिया गया था।

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