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हस्ताक्षर साहित्य समिति द्वारा होली मिलन समारोह का हुआ आयोजन

बालोद। दल्लीराजहरा के हल्बा समाज भवन में बुधवार को हस्ताक्षर साहित्य समिति द्वारा होली मिलन समारोह के साथ काव्य गोष्ठी का आयोजन आचार्य जी आर महिलांगे की अध्यक्षता शिरोमणी माथुर की मुख्य आतिथ्य तथा लतीफ खान लतीफ, गोविंद कुट्टी पाणिकर तथा शमीम अहमद सिद्धकी के विशेष आतिथ्य में संपन्न हुआ।
समिति के कवियों ने कविता के माध्यम से सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण ,राष्ट्रभक्ति तथा नशा के दुष्प्रभाव पर रचना के माध्यम से होली के सतरंगी प्रेम रूपी अबीर गुलाल से समस्त हस्तियों को बसंती रंगों से सराबोर कर दिया।

आचार्य जेआर महिलांगे ने कहा कि होली पर्व एक दूसरे से मतभेदों को भुलाकर गले मिलने तथा भाईचारे और एकजुटता का संदेश देता है साथी अपनी रचना मास फागुन बाजत नंगारे, गावत सब मिल फाग, गुलाल रंग सब भर कटोरे ,होवत अति अनुराग सुना कर पूरे माहौल को होलियाना बना दिया। वरिष्ठ कवयित्री शिरोमणि माथुर ने अपनी रचना – जीवन एक कहानी है ,पल-पल मरता पानी है। पेट पीठ से चिपक गया है, बातें सब शैतानी है। द्वारा मिलकर मानव सेवा करने तथा बेहतर माहौल बनाने के खातिर एक नई शुरुआत करने को प्रेरित किए । गजल सम्राट श्री लतीफ खान लतीफ की आ गई पी से मिलने मादक ऋतु, टेसुवन सा ही ये तन धड़कने लगा, आज सांसे हुई मेरी सुरभीत पिया , आम्रकुंज सा यौवन महकने लगा।
रचना सुनकर सभी के मन की कोकिला चेक्कने लग गया मधु मधुमति अंग अंग में बसंती रंग जाने लगा और सभी के तन मन डोलने लगे। कवि गोविंद कुट्टी पणिकर ने दीप बनकर तुम्हें जलना ना आया, मोम बनकर यूं ही पिघलना ना आया। विद्वत के दर पर ऐठे रहे तुम ,सहज शिशु सदृश्य मचलना ना आया प्रस्तुत कर शोहरत के शिखर पर बैठे अहंकारियों को लिहाज का दर्पण दिखा कर बता दिया की जवानी दौलत शोहरत सदा नहीं रहती। शमीम अहमद सिद्धकी ने *पिया गए परदेस, होरी कैसे मनाऊं ।आयो ना कोई संदेश, होली कैसे मनाऊं सुना कर पिया के देर होने से प्राण तजने को मजबूर व पिया के लिए तड़प रही बिरहन की पीड़ा का चित्रण कर वाहवाही बटोरी।
हास्य कवि और व्यंग्यकार घनश्याम पारकर ने अपनी रचना से हंसी और ठाहकों की फुहार से सभी को खूब लोटपोट किया साथ ही सामाजिक और राजनीतिक को व्यवस्थाओं पर गंभीर व्यंग्य बाण भी छोड़े । उनकी छत्तीसगढ़ की रचनाएं इस प्रकार है चल संगी होली तिहार मनाबो, जांगर नई चलही तभू ले चलाबो। राजेश्वरी ठाकुर ने अपनी रचना थोड़ी थोड़ी सी रंग जाऊं ,थोड़ी थोड़ी सी बिखर जाऊं ,थोड़ी थोड़ी सी उड़ जाऊं, बनके रंगों सी…. प्रस्तुत कर होली के लाल पीले हरे रंग बिखेर एक दूजे के रंग में रंगने तथा सबके साथ भूल मिलने का संदेश दिया। युवा साहित्यकार टीएस पारकर ने गर्मी की तपन पर अपना काव्य पाठ – गर्मी आगे गर्मी आगे ,बढ़ गुस्साए सुरुज देवता, देखो तो कईसन बैहागे प्रस्तुत कर धूप की छाया पर पंखा, कूलर ,फ्रिज सब काम पर लाने तथा बिजली बिल दुगुना भरने सचेत कर खूब वाहवाही लूटी। कवि मोहन लाल साहू ने छत्तीसगढ़ की महिमा का गुणगान किया। शोभा बेंजामिन ने अकेली राह पर जब चलती हूं ,अपने ही स्थाई से डरती हूं। प्रस्तुत कर स्पष्ट किया कि समाज का विकास तेजी से हो रहा है लेकिन विकास के साथ नारी असुरक्षित होना चितनीय है । कवि संतोष कुमार सरल ने *होली खेलो खेलो जी नंदलाल ,राधारानी रद्दा जोहय उड़ाही कौन गुलाल प्रस्तुत कर भगवान कृष्ण के बचपन निवास ब्रज क्षेत्र होली गीत से सबका मन मोह लिया। गोष्ठी का संचालन करते वीर रस के धुरंधर कवि अमित प्रखर ने अपनी रचना के माध्यम से संदेश दिया कि जब सत्य से असत्य की लड़ाई होगी तो सत्य अकेले ही खड़ा होगा और असत्य की लंबी फौज होगी केवल गीता की यही दिव्यज्ञान मानव मात्र की रक्षा कर सकता है – हो गया मरकर अमर ,इतिहास ऐसा गढ़ ।बस पिता का मान रखने ,जो प्रभु से लड़।उभरते साहित्यकार व सूर्य साधक गोपेश कुमार सोनवानी ने अंग्रेजी – हिंदी – छत्तीसगढ़ी में होली की रीमिक्स गीत गाकर खूब मनोरंजन किय। लेट्स प्ले कलर, सेलिब्रिटी होली ,दिस इज होली ,सेलिब्रिटी होली ,डोंट फाइट डोंट क्राय, बी हैप्पी डोंटवरी
अंत में हस्ताक्षर साहित्य समिति ने साहित्य की धरा पर अपनी आहुति देने वाले महान साहित्यकार श्री चांद मुबारक चांद कुरैशी जी के लिए मौन धारण कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। समिति के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार सरल ने कहा कि एक ईमानदार और कर्मठ कवि के रूप में आप हमेशा हमारे दिलों में बसे रहेंगे ।आपकी रचना काव्य कला और साहित्य प्रतिभा के कारण निसंदेह साहित्यकाश के नायक ही रहेंगे।

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