सा प्रथमा संस्कृति: विश्ववारा – यजुर्वेद संस्कृति ज्ञान परीक्षा में चिटौद की वासनी प्रथम और लक्ष्मीनारायण द्वितीय



गुरुर। यजुर्वेद में कहा गया है ‘सा प्रथमा संस्कृति: विश्ववारा’ अर्थात हमारे देवसंस्कृति का विश्व में सर्वप्रथम उदय भारत में हुआ | इसलिए यह भारतीय संस्कृति भी कहलाई | इसका उद्भव हिमालय की उपत्यिकाओं में हुआ, जिसे ब्रह्मवर्त, उत्तराखंड अथवा उत्तरांचल कहा जाता है |

यहीं से इस संस्कृति का संदेश हमारे ऋषि-मनीषियों द्वारा पूरे विश्व में ले जाया गया जिससे यह विश्व संस्कृति बनी और आध्यात्मिक रूप से हमारा देश भारत जगदगुरु कहलाया | इन्हीं भावनाओं को बच्चों में संस्कारित रूप से रोपित करने का अनवरत कार्य अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार ( उत्तराखंड ) के तत्वाधान में आयोजित संस्कृति ज्ञान परीक्षा सत्र 2022 का परिणाम प्राप्त हुआ है | इस परीक्षा में शासकीय प्राथमिक विद्यालय चिटौद के कक्षा पांचवीं के 14 बालक एवं 24 बालिकाओं सहित 38 विद्यार्थी सम्मिलित हुए थे |


प्रार्थना सभा में हुआ विद्यार्थियों एवं संयोजक शिक्षक का सम्मान

गत माह पूरे राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित संस्कृति ज्ञान परीक्षा के परिणाम लेकर गायत्री परिवार परिक्षेत्र पुरूर के प्रतिनिधि संजय कुमार वर्मा विद्यालय पहुंचे | उन्होंने संस्था प्रमुख मोहिनी चंद्राकर को समस्त प्रतिभागी विद्यार्थियों का प्रशस्ति पत्र प्रदान किया | उन्होंने कक्षा पांचवीं स्तर पर इस विद्यालय से 30 से अधिक 38 विद्यार्थियों को परीक्षा में सम्मिलित कराने की प्रशंसा करते हुए उपस्थित समस्त विद्यार्थियों को अगले परीक्षा के लिए तैयार रहने का सन्देश दिया | इस दौरान उन्होंने संस्था प्रमुख के साथ कक्षा पांचवीं के वासनी कुंजाम को प्रथम तथा लक्ष्मीनारायण ध्रुव को द्वितीय स्थान प्राप्त करने के लिए स्मृति चिन्ह शील्ड प्रदान आकर सम्मानित किया | इस परीक्षा को आयोजित करने में सहभागी बनने वाले प्रभारी शिक्षक ईश्वरी कुमार सिन्हा को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए अभिनन्दन किया | इस वर्ष कक्षा पांचवीं के पल्लवी, अंजली, कुमकुम, वीणा, महेश्वरी, गीतिका, नम्रता, झिलमिल, चन्द्रकला, मधु, सरिता, वंदना, भूमिका, धनेश्वरी, रेशमी, ख़ुशी, डामिन, ज्योति, पुष्पांजली, ईशीका, रोमा, ड़ीकेश्वरी, कशिश, विकास, आयुष, सागर, भावेश, उमेश, वैविक, रूपम, धर्मेश, धर्मेन्द्र, देवांशु, गौरव, निलेश व सौरभ ने हिस्सा लिया |

भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, विज्ञान एवं जीवन जीने की कला रूपी त्रिवेणी में सतत 8 वर्षों का सफर

विद्यालय के संस्कृति ज्ञान परीक्षा संयोजक शिक्षक ईश्वरी कुमार सिन्हा ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत के 28 प्रांत के लाखों स्कूल और अध्यापकों के साथ 9 भाषाओं में होने वाले भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा ने अभी तक लाखों विद्यार्थियों के जीवन को प्रभावित किया है | इसी कड़ी में विगत 8 वर्षों से शासकीय प्राथमिक शाला चिटौद की कक्षा पांचवी के सभी छात्र-छात्राएं इस परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं | इन विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, विज्ञान एवं जीवन जीने की कला रूपी त्रिवेणी में लगातार स्नान कराया जा रहा है | इस परीक्षा में बैठने वाले छात्र-छात्राएं जहां भी हैं, अन्य विद्यार्थियों की तुलना में गरिमा पूर्ण एवं मानवीय मूल्यों को जीवन में महत्वपूर्ण स्थान देते हुए जीवन जी रहे हैं |

नैतिक मूल्यों के विकास में बड़ों का मिला आशीर्वाद

संस्था प्रमुख मोहिनी चंद्राकर ने इस संस्कृति मूलक, जीवनोपयोगी परीक्षा में सम्मिलित समस्त छात्र-छात्राओं की उपलब्धि पर कहा- समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण के साथ साथ सांस्कृतिक तथा नैतिक मूल्यों के विकास में जिस लगन, निष्ठा और जागरूकता का परिचय आप सभी बच्चों ने दिया है, वह संस्कृति के उत्थान में प्रशंसनीय है | विद्यालय प्रबन्ध समिति अध्यक्ष परमानन्द साहू, उपाध्यक्ष शकुन मानिकपुरी, सहित समस्त सदस्यगण, ग्राम पंचायत सरपंच श्रीमती कुमारी साहू, उपसरपंच जीवन लाल नेताम, सचिव मनोज कुमार साहू, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष चोवा राम साहू, उपाध्यक्ष संतानु चेलक, ब्यूरो चीफ केशव सिन्हा, अधिवक्ता पत्रकार सुरेन्द्र तिवारी, महिला कमाण्डो अध्यक्ष भुनेश्वरी ठाकुर, रमेश प्रसाद जोगी, केशव पटेल, पंजाब राव, इत्यादि ने इन सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा विद्यालय की इस बहुआयामी आयोजन हेतु साधुवाद प्रदान किया ।

You cannot copy content of this page