किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए भी किया गया जागरूक
बालोद। अरौद के कृषि विज्ञान केंद्र में राष्ट्रीय किसान दिवस व प्राकृतिक खेती को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें अतिथि के तौर पर जिला पंचायत सदस्य सभापति धनेश्वरी नरेंद्र सिन्हा सहित जिला पंचायत सदस्य ललिता पीमन साहू व अन्य मौजूद रहे। जहां मुख्य रूप से सभापति धनेश्वरी नरेंद्र सिन्हा ने जिलेभर से पहुंचे किसानों को भूपेश सरकार की किसान हित से संबंधित योजनाओं के बारे में बताया और उनका ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने की अपील की तो उन्होंने कहा कि किसानों के हाथ मजबूत करने का काम छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार ने किया है। सत्ता में आते ही उन्होंने कर्ज माफ कर किसानों का भला किया और उन्हें आर्थिक रूप से संबलता प्रदान की। और लगातार कई योजनाएं किसानों के लिए बनाई गई है। जिससे आज छत्तीसगढ़ में किसानों की आर्थिक स्थिति और ज्यादा मजबूत हो रही है। धान खरीदी इसका बेहतर उदाहरण है। वही राजीव गांधी न्याय योजना के जरिए भी कई खास पहल किसानों के हित में किए जा रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य ललिता साहू ने भी किसानों को संबोधित किया। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करते हुए वर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद आदि चीजों को अपनाकर धीरे-धीरे रासायनिक चीजों का उपयोग कम करने की बात कही।
कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े अफसरों ने बताया भारत में 23 दिसंबर का दिन किसानों को समर्पित किया जाता है. यह दिन किसानों के मसीहा माने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती है। इसी वजह से किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को हुआ था. साल 2001 से चौधरी चरण सिंह के सम्मान में हर साल 23 दिसंबर को किसान दिवस मनाने का फैसला किया था। भारत को किसानों का देश कहा जाता है और आज़ादी के बाद देश के विकास में किसानों की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
राष्ट्रीय किसान दिवस क्यों मनाया जाता हैं?
23 दिसंबर को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जन्मदिन होता है। उनके जन्मदिन को ही किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह ने किसानों के हित के लिए अनेकों प्रकार के लोक हितकारी योजना का संचालन किया था। चौधरी चरण सिंह ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने किसानों के उत्थान के लिए कई काम किए। यही वजह है कि चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन को किसान दिवस के रूप में भारत में मनाया जाता है। किसान दिवस मनाने की परंपरा 2001 से शुरू हुई थी।
इस दौरान मौजूद बरही के उन्नत किसान नरेंद्र सिन्हा ने कहा भारत में किसानों का योगदान अतुल्य और स्मरणीय है। जिसे शब्दों में बयान कर पाना किसी भी व्यक्ति के लिए संभव नहीं है. भारत दुनिया की आज की तारीख में पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का सबसे अधिक योगदान होता है क्योंकि देश में जाने वाले जितने भी नागरिक हैं उन्हें भोजन की खाद्य सामग्री कृषि के कामों से ही प्राप्त होती है. ऐसे में अगर किसी भी देश में किसान ना हो तो उस देश के नागरिकों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा और साथ में देश की अर्थव्यवस्था भी काफी नीचे चली जाएगी। वहीं छग तो धान का कटोरा है। भारत आज दुनिया का एक उभरता हुआ कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है यहां पर 60% जनसंख्या कृषि के कामों में लगी हुई है।

