DAILY BALOD NEWS

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शॉर्टकट का चक्कर और अंधेरे में बाढ़ ग्रस्त नाला पार करना पड़ा भारी, बेटा स्कूटी सहित बहा, पिता ने तैरकर बचाई जान, पढ़िए पिता की जुबानी घटना की कहानी,,,,

बालोद| बरही-सांकरा ‘क’ के बीच नाले में रविवार की रात नौ बजे पिता पुत्र स्कूटी सहित बह गए। पिता ने तैर कर अपनी जान बचाई, लेकिन पुत्र पानी के तेज बहाव में बह गया। सोमवार को सुबह से ही पुलिस व एनडीआरएफ की टीम खोजबिन में लग गई थी पांच घंटे की मशक्कत के बाद युवक की लाश झाड़ी में फंसी मिली। वहीं स्कूटी भी मिल गई। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार घटना रविवार रात लगभग 8.30 से 9 बजे के बीच की है। सांकरा ‘क’-चारामा मुख्य मार्ग पर सांकरा के समीप नाला इन दिनों हो रही बारिश से अपना कहर बरपा रहा है। रविवार को नीट की परीक्षा देकर दुर्ग से स्कूटी क्रमांक सीजी 19बीएच 7370 से गृह ग्राम चिनौरी,तहसील चारामा,जिला-कांकेर निवासी 18 वर्षीय युवक नितेश कुमार अपने पिता के साथ स्कूटी से नाला पर कर रहें थे। स्कूटी नाले के बीच में बंद हो गई। फिर तेज बहाव के चलते स्कूटी सहित पिता पुत्र दोनो बह गए। कुछ देर बहने के बाद पिता किसी तरह तैर कर बाहर आ गया।वहीं नितेश बह गया।सोमवार को एनडीआरएफ की टीम ने तलाशी अभियान शुरू की और लगभग 12 बजे युवक के शव व स्कूटी को बरामद की।

पिता ने बताई आपबीती- मना किया था बेटे को शॉर्ट कट जाने से

इस घटना में अपने बेटे को खोने वाले पिता उमेश दर्रो ने DAILYBALODNEWS से घटना की आपबीती साझा की। पिता ने कहा कि घर से रायपुर जाते समय हम मुख्य मार्ग नेशनल हाईवे होते हुए धमतरी से रायपुर गए थे। लेकिन वापसी में बेटा कहने लगा कि अब दुर्ग बालोद होकर शॉर्टकट सांकरा से जाएंगे। मैंने बेटे को इस मार्ग पर जाने से मना भी किया था। कहा था कि मौसम खराब है, बारिश भी हो रही है। कहीं रास्ता बंद ना हो जाए और हुआ वैसा भी। हम शॉर्टकट के चक्कर में यहां तक आ तो गए पर सांकरा के इस नाला को पार कर देंगे यह सोचकर बेटे ने स्कूटी आगे बढ़ा दी। पर अचानक स्कूटी बीच नाला में बंद हो गई और हम बहने लगे। बेटे को मना किया था लेकिन वह माना नहीं और हम शॉर्ट कट जा रहे थे। आखिर मैंने इस घटना में अपना बेटा खो दिया। रात को नाला के ऊपर कितना पानी चल रहा था इसका अंदाजा भी नहीं लग पाया। क्योंकि वहां अंधेरा भी छाया हुआ था। स्कूटी की लाइट में जैसे-तैसे नाला पार करने की कोशिश कर रहे थे। पर असफल रहे। मैं पीछे बैठा था तो तुरंत धार की वजह से बहा जरूर, पर तैरते-तैरते किनारे में आ गया। लेकिन बेटा स्कूटी के दबाव में अंदर डूब गया। फिर रात में कुछ समझ नहीं आया। वह दिखा भी नहीं। हमने स्थानीय लोगों को बुलाकर ढूंढने की कोशिश भी की। पर सफलता नहीं मिली। ना स्कूटी मिला था ना बेटा। सुबह खोजबीन शुरू हुई तो फिर दोपहर तक बेटे की लाश बरामद हुई। अफसोस होता है कि काश इस शार्टकट रास्ते से हम न गुजर रहे होते तो यह हादसा ना होता।

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