खिलौनों के जरिए बच्चों की पढ़ाई को बनाया जाएगा आसान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी है यह शामिल



टॉय पेडागॉजी पर हुआ ऑनलाइन कार्यक्रम, बालोद जिले की पुष्पा चौधरी सहित छत्तीसगढ़ से शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

बालोद। एनटीसीएफ के तत्वाधान में शिक्षकों के नवाचार के प्रोत्साहन करने हेतु शैक्षिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें ” पेडॉगॉजी” अर्थात खिलौने आधारित शिक्षण से बच्चों के गुणवत्ता स्तर को बढ़ाने में किस प्रकार सहायक है। एनईपी 2020 में ,टायपेडगॉजी को प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसी विषय पर जिला एवं अन्य जिलों से वर्चुअल जुड़े अतिथि शिक्षकों ने बच्चों के अभिव्यक्ति कौशल में खिलौने की भूमिका ,महत्व पर चर्चा -परिचर्चा की। पाठ्यक्रम का अध्ययन अध्यापन में खिलौने आधारित शिक्षा को कैसे ?किस रूप? में देखते हैं ‘एवं पढ़ाते वक्त खिलौने का क्या महत्व है? कैसे शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर को हम खिलौने के माध्यम से बढ़ा सकते हैं? एवं उनके इस तर्क में भाषाई कौशल ,वैज्ञानिक अवधारणा एवं पारंपरिक ,सांस्कृतिक विकास में किस प्रकार बच्चों का विकास कर सकते हैं। ये सब बताया गया। मुख्य अतिथि अनुराग त्रिवेदी डीएमसी बालोद, विशिष्ट अतिथि जीएल खुरश्याम एपीसी बालोद,
रागनी अवस्थी एपीसी जिला रायपुर से एवं अध्यक्षता अरुण साहू अध्यक्ष एनटीएफसी व कार्यक्रम प्रभारी कैशरीन बैग रहे।
कार्यक्रम में सरस्वती वंदना गायन तिवारी मैडम नोडल रायपुर ने किया। राजगीत-चित्रमाला राठी . एवं प्रतिभागी के रूप में लोकेश्वरी कश्यप सिंगापुर
मोनू गुप्ता बीकानेर कबीरधाम,
ऋषि प्रधान सरायपाली महासमुंद,दामिनी साहू नॉडल गुंडरदेही बालोद थे। विद्यानंद कमड़े बिरला बिलासपुर,श्वेता सोनी बैकुंठपुर कोरिया,ममता चौहान कोरबा,कौशल जान कुरूद धमतरी,आंचल वर्मा बेमेतरा, विवेकानंद दिल्लीवार दुर्ग
युगल देवांगन जिला नॉडल बालोद, सुचिता साहू धरसीवा रायपुर,प्रज्ञा सिंह दुर्ग
अनुपमा पांडे धरसीवा रायपुर
,योगेश कुमार साहू सरायपाली महासमुंद, हिम कल्याणी साजा बेमेतरा, शोभा बेंजामिन डौंडी थे।सावेरीन सिद्धकी धरसीवा रायपुर
मीनाक्षी सोनी ,ऋचा शर्मा,
इस कार्यक्रम में अपनी बढ़-चढ़कर उपस्थिति दिखाते हुए अपने बनाए हुए खिलौनों का ऑनलाइन प्रदर्शन किया गया।
जिससे बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता , भाषाई कौशल, अभिव्यक्ति कौशल एवं सांस्कृतिक कौशलों के विकास हेतु सहायक सिद्ध हुए हैं । पुष्पा चौधरी कार्यक्रम का सफल संचालन किया। अरुण कुमार साहू ने किस प्रकार हम एनईपी 2020 के आधार पर जो टॉयपेडगाजी को लागू किया गया है , सभी शिक्षकों का कर्तव्य है कि हम इस विषय पर बच्चों को प्रोत्साहित करें एवं उनके गुणवत्ता एवं उनके कौशल का विकास में मदद करे। नवाचार करें मगर अपने पास विरासत में मिली प्रत्येक चीजों को सहेजते हुए नवाचार लाने का अवसर है। रागनी अवस्थी ने बताया कि हम खिलौने आधारिक शिक्षण को बेहतर से बेहतर कैसे बना सकते हैं, सभी शिक्षक बच्चों को सहभागित, खिलौने आधारित गतिविधि करवा कर सभी बच्चों के विकास को आगे बढ़ा सकते हैं। इस पर उन्होंने अच्छे विचार प्रस्तुत किए। डीपीसी बालोद ने कहा सभी शिक्षक जो यह खिलौने स्वयं बनाकर एवं बच्चों को उसमें सहभागिता दर्ज कर रहे हैं बहुत मेहनत कर रहे हैं और हम आशा करते हैं कि आप सभी कड़ी से कड़ी मेहनत करके इन इस कोरोनाकाल में जो 2 वर्ष तक के बच्चों का लर्निंग लास हुआ है उसको आप सभी उच्च स्तर पर ले जाने के लिए बहुत ही प्रयास कर रहे हैं, ये बहुत ही सराहनीय कार्य है । पुष्पा चौधरी के द्वारा कक्षा में इन्हीं खिलौने का प्रयोग कोरोनाकाल में करते हुए बच्चों को शिक्षा जोड़ने कार्य किया। टॉयपेडागाजी, खिलौना आधरित शिक्षण शास्त्र क्या है? इस पर उन्होंने विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि खिलौने और खेलों के साथ शिक्षण,सीखने, सिखाने की कला को निखार लाने, बच्चों को अवसर प्रदान करता है ‘उनकी कल्पना शक्ति का विकास करता है, सबसे महत्वपूर्ण है उनको आकर्षक बनाना ,कक्षा में जो खिलौने प्रस्तुत कर रहे हैं वह बच्चों के स्तर के अनुरूप हो, उसमें शिक्षकों की भूमिका, खिलौना निर्माण करते समय नई अवधारणा हो , विषयों को जोड़ने के लिए बच्चों को स्थान बनाना,
हम जब हम खिलौने में शिक्षा की बात करते हैं तो खिलौना का रणनीति और उचित उपयोग करना भी आवश्यक है ,
बहुत सारे प्रकार हो सकते हैं एक आउटडोर ,इंडोर या फिर शैक्षणिक गतिविधि पर आधारित, रोबोटिक खिलौने ,बोर्ड गेम, इत्यादि जितने भी खिलौने होते हैं वह सीखने की प्रक्रिया के अभिन्न अंग के रूप में हैं। उनको सिखाने के लिए विशेष डिजाइन की भी आवश्यकता है। जिससे बच्चों को आसानी से सीखने और सिखाने में मदद कर सके। सभी शिक्षकों ने अपने खिलौने का प्रदर्शन किए और खिलौने आधारित शिक्षण जो कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शामिल है जिसे 2020 ,,टॉयपेडगॉजी ,,के नाम से लिया गया है। सभी शिक्षक ने आश्वस्त किया है कि हम अपने खिलौने आधारित शिक्षण को बेहतर से बेहतर बनाकर बच्चों में शैक्षणिक गुणवत्ता का विकास करेंगे। राजगीत के माध्यम से कार्यक्रम का समापन हुआ।

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