DAILY BALOD NEWS

EDITOR IN CHIEF – DEEPAK YADAV.9755235270

Advertisement

ग्रामीणों की एकजुटता का प्रतीक -स्वयं के खर्च व दानदाताओं की मदद से कमरौद के हनुमान मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल बनाने में जुटे लोग

शिवरात्रि के बाद नवरात्रि में भी लगता है यहां भक्तों का तांता

बालोद। बालोद से अर्जुंदा मार्ग पर स्थित ग्राम कमरौद विकासखंड गुंडरदेही के दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर परिसर को यहां के ग्रामीण व आसपास के 20 से ज्यादा गांव के ग्रामीणों, खासतौर से दानदाताओं की मदद से धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में बनाने में जुटे हुए हैं। जमीन से निकले हुए हनुमान की विशाल मूर्ति के कारण इस जगह की ख्याति पूरे छत्तीसगढ़ में फैली हुई है। तो इस जगह के संरक्षण के हिसाब से समय-समय पर शासन प्रशासन का मदद तो मिलता ही है। अधिकतम काम लोगों ने आपस में जन सहयोग से और दानदाताओं की मदद से ही किए हैं। वर्तमान में यहां स्वयं के खर्च से ही ग्रामीणों ने अशोक वाटिका का निर्माण करवाया है। वही आकर्षक झूले यहां लगे हैं। यहां लोग सिर्फ दर्शन के लिए नहीं बल्कि गार्डन और झूलों में मनोरंजन के लिए भी पहुंचते हैं। यहां के विशाल बरगद व बैठक व्यवस्था लोगों को सुकून देती है।महाशिवरात्रि के मेले के बाद यहां नवरात्रि में भी मेले जैसा माहौल नजर आता है। दोनो नवरात्रि में यहां जोत जलाए जाते हैं। विविध आयोजनों से धार्मिकता का माहौल बना रहता है।

शरद पूर्णिमा उत्सव भी होगा खास, 19 अक्टूबर को है आयोजन,शनि देव् शिलान्यास के लिए हुए भूमिपूजन

जय हनुमान मंदिर ग्राम कमरौद में शनिदेव शिला का प्राणप्रतिष्ठा का कार्यक्रम 19 अक्टूबर मंगलवार को सुबह 9 बजे से होना है। जिसमें पंडित प्रभाकर पाण्डेय द्वारा पूजाअर्चना का कार्यक्रम किया जाना है। जिसके लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम महाराज वेंकेटेश्वर व दुर्गा प्रसाद पांडे द्वारा पूजा अर्चना किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में सरपंच चमेली ख़िलानंद पटेल, ग्राम विकास समिति सचिव ख़िलानंद पटेल, कौशल प्रसाद साहू, उमेद सिंह चंद्रवंशी, केश कुमार ठाकुर, पुनीत राम साहू, अशोक कुमार कंवर, दीनू राम ठाकुर, हीरा सिंह पटेल, ग्राम गणमान्य नागरिक इस कार्यक्रम में शामिल हुए। 19 अक्टूबर शरद पूर्णिमा उत्सव के दौरान यहां रामायण कार्यक्रम होगा। जिसमें मोर मयारू मानस परिवार ग्राम गुदगुदा विकासखंड कुरूद जिला धमतरी की प्रस्तुति होगी। तो वही शनिदेव शिला प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होगा। दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक यज्ञ पूर्णाहुति, आरती प्रसादी होगा।

5 साल में 40 लाख खर्च

कमरौद में हनुमान मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल बनाने में ग्रामीण जुटे हैं। चार से पांच वर्ष में करीब 40 लाख रुपये खर्च किया जा चुका है। इस स्थल को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए लगभग 20 से 25 गांव के लोग दान करते हैं। मंदिर व परिसर का लगभग चार वर्षों से समिति व ग्रामीणों ने 40 लाख खर्च करके विकास कार्य कर लिया है। आगे भी गार्डन के बाद अब अन्य सुविधा देने का प्रयास जारी है। ताकि आस्था के साथ लोगों को इस जगह की सुंदरता भी आकर्षित करें। शिवरात्रि में मेला स्थल का समतलीकरण भी ग्रामीणों व पंचायत के सहयोग से करवाया गया था। अब मंदिर के सामने अशोक वाटिका बन जाने से मेले का विस्तार भी हो चुका है मैदान समतलीकरण के बाद अब मेला वृहद क्षेत्र में आयोजित होता है।

भाई-बहन ने दान किया मां के याद में 2.50 लाख, बना स्वागत द्वार

गांव की ही बहन अनुसुईया बाई ठाकुर, भाई तिलक व लोकेश्वर ने अपनी मां स्व. सातो बाई की स्मृति में मंदिर परिसर में स्वागत द्वार गेट बनवाने के लिए ढाई लाख रुपये दान किए थे। जिससे गेट का निर्माण पूरा हो गया। अब मंदिर परिसर का लुक भी बदल गया है। जहां मंदिर के सामने मेला लगता था वहां गार्डन तैयार किया गया है।

मंदिर के विकास के लिए ग्रामीणों ने पर्यटन विभाग से भी गुहार लगाई थी। लेकिन पिछले सरकार ने उनकी कुछ न सुनी। फिर शासन की उपेक्षा से खुद अपनी फंडिंग के लिए प्रेरित हुए। देखते-देखते कई बड़े व्यापारी, नौकरी पेशा, मध्यम और गरीब तबके के लोगों ने मंदिर के विकास के लिए आर्थिक मदद शुरू की।

ये है खासियत इस मंदिर की

समिति के अध्यक्ष कौशल प्रसाद साहू, उपाध्यक्ष उमेन्द राम ठाकुर, कोषाध्यक्ष पुनीत राम साहू सहित
गांव के बुजुर्गों के मुताबिक करीब 400 साल पहले हनुमान की मूर्ति जमीन से निकली है। जिसके कारण इसकी खास मान्यता है। दक्षिण मुखी भूमि फोड़ हनुमान मंदिर के नाम से यह राज्य भर में जाना जाता है। दूर दूर से लोग यहां महाशिवरात्रि और अन्य अवसरों पर दर्शन करने आते हैं।

1.20 लाख से बनवाया शिवलिंग

दानदाताओं और मंदिर समिति के सहयोग से ही हनुमान मंदिर के ठीक सामने आकर्षक शिवलिंग का भी निर्माण किया गया है। जिसकी लागत 1.20 लाख है। मंदिर समिति के सचिव केश कुमार ठाकुर का कहना है 4 साल पहले इस शिवलिंग की स्थापना की गई। मंदिर परिसर के चारों ओर अलग-अलग भगवान और देवी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। मंदिर के बाहरी दीवारों में सर्वधर्म समभाव का संदेश भी दिया जा रहा है। सभी धर्म के प्रतीक व उनके ईष्ट की मूर्तियां भी चित्रित की जा रही है।

You cannot copy content of this page