बालोद/गुरुर/ धमतरी।
एक तरफ जहां कोरोना का कहर जारी है तो दूसरी ओर ब्लैक फंगस की नई बीमारी भी लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। बालोद जिले वासियों के लिए खतरे की घंटी है। क्योंकि यहां भी ब्लैक फंगस की शुरुआत हो गई है और पहला मरीज गुरुर ब्लॉक में मिल भी गया है। इसकी पुष्टि धमतरी स्वास्थ्य विभाग ने की है। चूंकि गुरुर ब्लॉक धमतरी जिला से लगा हुआ है और अधिकतर इस ब्लॉक के लोग धमतरी में ही इलाज कराने के लिए जाते हैं। जो मरीज मिला है वह भी धमतरी में ही इलाज करने गया था। जहां फिर इसकी पुष्टि हुई है। अभी यह बीमारी लोगों के लिए नई है। जिला स्तर पर इसके इलाज की भी अभी कोई ठीक-ठाक व्यवस्था नहीं है। इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीज को रायपुर एम्स शिफ्ट किया गया है। मरीज की पहचान अभी गोपनीय रखी गई है तो वही इस तरह बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक में ब्लैक फंगस का पहला मरीज मिलने से अब अन्य सभी लोगों को भी सचेत होने की जरूरत है व इसके लक्षण व बचाव के बारे में जानना बहुत जरूरी हो गया है। तो वहीं स्वास्थ्य विभाग की भी जवाबदारी बढ़ गई है कि लोगों को इसके बारे में कैसे जागरूक करें। जब उनके सामने पहले से ही कोरोना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कोरोना से स्वस्थ हुए मरीज हो रहे ब्लैक फंगस के शिकार
कोरोना संक्रमण का पीक कमजोर होते ही अब ब्लैक फंगस के मरीज आने लगे हैं। संक्रमण से स्वस्थ हुए मरीजाें पर ब्लैक फंगस का खतरा है। गुरुर का 32 वर्षीय युवक पड़ोसी जिले धमतरी के जिला अस्पताल गया था। 4 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने आधे घंटे तक परीक्षण कर ब्लैक फंगस की पुष्टि की है। उसे रायपुर एम्स रेफर किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक गुरुर ब्लॉक का युवक 4 मई को संक्रमित हुआ था। बालोद के कोविड अस्पताल में भर्ती होने के बाद 15 मई को स्वस्थ हो गया। डॉक्टरों ने 16 मई को अस्पताल से छुट्टी दी। मरीज घर लौट आया। दो दिन बाद जबड़े व कान में दर्द होने लगा। चेहरे पर एक तरफ सूजन हुई। मरीज 26 मई को धमतरी गया। जहां शहर के एक निजी डॉक्टर ने मरीज उमेश का एक दांत तोड़ दिया। 27 मई को और ज्यादा दर्द बढ़ा। जबड़े के उपर-नीचे हिस्से में ब्लैक फंगस (काला धब्बा) दिखा। सिटी स्कैन कराने पर रिपोर्ट में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो गई।
बाजार में दवा नहीं है ये भी एक दिक्कत
ब्लैक फंगस का पहला मरीज आया है, लेकिन अस्पताल से लेकर मेडिकल स्टोर्स में इस बीमारी की फिलहाल काेई दवा नहीं है। सीजीएमएससी की ओर से भी अब तक कोई दवा नहीं दी गई है। बताया कि इस बीमारी के इलाज में उपयोग की जाने वाली दवा महंगी है। करीब 29 से 30 दिन तक डोज दी जाती है। इसलिए दवा उपलब्ध नहीं है।
4 विशेषज्ञों ने की ब्लैक फंगस की पुष्टि
मरीज धमतरी जिला अस्पताल शुक्रवार को सुबह करीब 11 बजे गया था। वहां के एमडी विशेषज्ञ डॉ. संजय वानखेड़े, डॉ. आभा हिशीकर, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जेएस खालसा और कान-नाक व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. ए नसीम ने मरीज को देखा। जबड़े पर उभरे हल्के ब्लैक धब्बे और मेडिकल दस्तावेजों जांच की। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा बताए ब्लैक फंगस के कुछ लक्षण मिले। करीब आधे घंटे की परीक्षण के बाद चारों विशेषज्ञों ने ब्लैक फंगस की पुष्टि की। मरीज को रायपुर एम्स रेफर किया।
विशेषज्ञ से जानिए- ब्लैक फंगस क्या और कितना खतरनाक है
मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. देवेन्द्र साहू ने बताया ब्लैक फंगस का कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना और नमी मिलना है। नाक के अंदर नमी और जगह होने से इसके स्वत: विकसित होने की आशंका रहती है। नाक से शुरू होकर यह अंदर जहां-जहां जगह मिलती है, फैलता जाता है। यह पहले आंख और आगे मस्तिष्क तक पहुंच जाता है।
जानिए, क्या होता है म्यूकोर माइकोसिस
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार म्यूकोर माइकोसिस एक तरह का फंगल इंफेक्शन है, जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। म्यूकोर माइकोसिस इंफेक्शन नाक, आंख, दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर हो सकता है। आंखों की रोशनी चली जाती है, वहीं कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है। ऐसे में बचने के सभी उपाय करने चाहिए, लेकिन घबराना नहीं चाहिए। इन सबका इलाज किया जा सकता है।
यह लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को बताएं
सिर के एक ओर में दर्द होना।
दांत, जबड़े या कान में दर्द होना।
चेहरे पर एक तरफ सूजन या दर्द होना।
आंखों में दर्द, धुंधला दिखाई देना या दर्द होना।
नाक के ऊपरी हिस्से में काल धब्बे या घाव बनना।
एक साइड नाक में दर्द, खून आना या नाक बंद हो जाए
स्किन पर फुंसी या छाले, इंफेक्शन वाली जगह काली होना।
छाती में दर्द, तेज बुखार, खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत या खून की उल्टी होना।
राज्य में ब्लैक फंगस (Mucormycosis) नोटिफिएबल डिसीज घोषित
इधर छत्तीसगढ़ में ब्लैक फंगस (Mucormycosis) को नोटिफिएबल डिसीज घोषित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बीते दिनों इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके तहत छत्तीसगढ़ राज्य के सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं (शासकीय और निजी) को ब्लैक फंगस (Mucormycosis) की स्क्रिनिंग, पहचान, प्रबंधन के संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य शासन/आई.सी.एम.आर./भारत सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों एवं समय-समय पर जारी संशोधित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
राज्य के सभी स्वास्थ्य प्रदाताओं को ब्लैक फंगस (Mucormycosis) के संदेहास्पद या पुष्टिकृत प्रत्येक प्रकरण को संबंधित जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सूचित करना अनिवार्य होगा। इसके तहत कोई भी व्यक्तिध्संस्था द्वारा ब्लैक फंगस (Mucormycosis) के लिए किसी भी प्रिंट, इलेक्ट्रानिक या अन्य प्रकार के मीडिया का उपयोग, स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति द्वारा इस नियम की अवज्ञा करने पर भारतीय दण्ड सहिता 1860 (45) की धारा 188 के तहत दण्डनीय उपराध माना जाएगाद्य यह अधिसूचना इसके प्रकाशन की तिथि से लागू होगी एवं आगामी एक वर्ष तक वैध रहेगी।
