क्या आपने ध्यान दिया, आपकी परछाई ने भी छोड़ दिया साथ, पढ़िए यह भौतिकी की घटना बालोद से



जब लोगों का साया भी साथ छोड़ दिया,क्योंकि था जीरो शेडो डे

बालोद। बालोद शहर में जीरो शेडो की घटना का अवलोकन किया गया। यह अवलोकन बालोद के नयापारा कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल में किया गया। जहां भौतिक के जानकार अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी भौतिकी के व्याख्याता बी एन योगी ने अवलोकन कर इसकी वर्चुअल जानकारी बच्चों व अन्य लोगों को साझा की। कल यानी 25 मई को दोपहर 12 बजे व दूसरे दिन 26 मई को दोपहर 12 बजे यह अवलोकन हुआ। जिसमें पहले दिन पता चला कि परछाई ही गायब है।

क्या है शून्य छाया दिवस

आमतौर पर यह माना जाता है कि परछाईं कभी आपका पीछा नहीं छोड़ती लेकिन दिलचस्प बात यह है कि साल में अमूमन दो बार परछाईं कुछ पलों के लिए आपका साथ छोड़ देती है। इसे ही शून्य छाया दिवस (zero shadow day)कहते हैं ।
ये पल तब आता है जब सूर्य धरती के सतह के ठीक ऊपर लंबवत हो। ये स्थिति किसी भी स्थान में वर्ष में दो बार बनती है पहला उस समय जब सूरज 21 दिसंबर को उत्तरायण होते हुए कर्क रेखा की ओर गतिमान होता है और दूसरा 21 जून के बाद जब सूरज मकर देख से दक्षिणायन होता है, मकर और कर्क रेखाओं के बीच ही अप्रैल से अगस्त के बीच शून्य छाया दिवस घटित होता है।


इस अवसर पर अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी भौतिकी के व्याख्याता बी एन योगी ने वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया और छाया के शून्य हो जाने के कारणों की व्याख्या की। साथ ही उन्होंने इस घटना के महत्व से अवगत कराते हुए बताया कि सर्वप्रथम इस घटना के द्वारा ही पृथ्वी की परिधि का मापन इरोस्थनीज ने किया। साथ ही ये निष्कर्ष भी निकाला कि पृथ्वी सपाट न होकर गोल है, नही तो सभी जगह पर वस्तुओ की परछाई सब दिन लंबवत ही बनती। उन्होंने इस घटना का लाइव डिमांस्ट्रेशन किया। तथा गढफुलझर के व्याख्याता अजय भोई ने मोबाइल एप के द्वारा इस घटना को समझाया।

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