बालोद। कोरोना से बचना है तो खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता को ज्यादा से ज्यादा रखना जरूरी है ऐसे में योग रूपी हथियार को भी अपनाना भी उतना ही जरूरी है जितना हम दवाइयों पर भरोसा करते हैं। अंदर से खुद को मजबूत रखने के लिए योगा जरूरी है इसलिए बालोद के एक कोविड केयर सेंटर में इन दिनों कोरोना मरीजों को योग सिखाने का अनूठा प्रयास शुरू किया गया है। महावीर कोविड सेंटर में एक बेहतर पहल हो रही । कोविड सेंटर के प्रमुख संचालक डॉ प्रदीप जैन व स्वरूप राठी की पहल पर यहां कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए योग ट्रेनिंग शुरू किया गया है। जिसका संचालन आर्ट ऑफ वरिष्ठ टीचर व योग शिक्षक धीरज शर्मा द्वारा किया जा रहा है। श्री शर्मा ने बताया कि योग के निरंतर अभ्यास से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। यह कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए इसलिए ज्यादा जरूरी है क्योंकि ये वायरस फेफड़ों में जाकर उसे प्रभावित करता है और नियमित योग, प्राणायाम के अभ्यास से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। योग के निरंतर अभ्यास से सेंटर के मरीजों को अपने शारीरिक व मानसिक स्तिथि में सकारात्मक बदलाव महसूस हो रहा है। यहां योग, प्राणायाम के अलावा ध्यान भी कराया जा रहा है, जिससे वे शांत, सहज व कोरोना से भयमुक्त रह सके। इस आयोजन में महावीर कोविड सेंटर के अन्य प्रमुख सहयोगी धर्मेन्द्र टावरी, परमेश्वर राठी, मोहन नाहटा, प्रभाकर जैन, शम्भु साहू, भवानी पनपालिया, सुनील रतनबोहरा, हरीश दहिया सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहकर लगातार मरीजों को योग के प्रति प्रेरित करते है।
योगा जीवन जीना सिखाती है

कोरोना से घिरे हुए उन लोगों का जीवन अभी भी खतरे में है जब तक कि वे कोरोना से जंग जीत नहीं जाते। ऐसे में आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षक उन्हें कोरोना से लड़ने के लिए ताकत देने योगा सिखा रहे हैं। योगा प्रशिक्षक धीरज शर्मा का कहना है कि जीवन जीने की अपनी कला है। शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए योग, प्राणायाम और सांस से जुड़ी क्रियाएं कारगर साबित होती हैं। लॉकडाउन के दौरान फुर्सत में कोरोना से जंग जीतने के योग, प्राणायाम और व्यायाम सर्वोत्तम क्रियाएं हैं।
योग शिक्षक ने बताया कि कोरोना वायरस का प्रभाव रोकने के लिए शरीर की रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना जरूरी है। प्रात: और शाम योग के माध्यम से शरीर को निरोग रखा जा सकता है। आर्ट ऑफ लिविंग के योग शिक्षकों का कहना है कि लॉक डाउन के दौरान घर पर रह कर मन और शरीर को स्वस्थ और तनाव मुक्त रखने के लिए अध्यात्म गुरु श्री श्री रविशंकर के अध्यात्म संदेश को व्यवहार में लाएं। प्राणायाम क्रियाएं स्वयं करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। ऐसा करने से कोरोना पर जंग आसानी से जीती जा सकती है। लॉकडाउन के दौरान कामकाजी लोग घर पर रह कर अक्सर तनाव महसूस करते हैं। नकारात्मक सोच उत्पन्न होती है। कोरोना का भय खत्म करने और सकारात्मक सोच बनाकर कोरोना पर विजय के लिए रोजाना घर पर ही व्यायाम का अभ्यास करें।
योग को एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं

प्रशिक्षक धीरज ने कहा कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देशभर में तबाही मचा रखी है. लेकिन क्या आप जानते हैं इंसान का शरीर हर मौसम में वायरस से लड़ता रहता है. इसलिए चिंता करने की बजाए अपने शरीर को रोगों से लड़ने के योग्य बनाने की है. योग गुरु धीरज सोशल मीडिया पर आए दिन लोगों को योग से जुड़े फायदों के बारे में बताते रहते हैं. योग गुरु कहते हैं कि महामारी से बचने के लिए लोग चाहें तो योग को एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं.योग गुरु धीरज कहते हैं, ‘शरीर के पास रोगों से लड़ने की क्षमता होती है जिसे इम्यूनिटी सिस्टम कहते हैं. अगर हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट रखेंगे तो कई बीमारियों से बच सकेंगे. हमारी छाती के पास एक थाइमस ग्लैंड होता है जो टी सेल्स जेनरेट करने का काम करता है, जो कवच बनकर हमारे शरीर की रक्षा करते हैं. योग से इसे भी सुधारा जा सकता है.
