बुजुर्गों की रजामंदी से हुआ ऐसा ब्याह: बैलगाड़ी से सलौनी से माहूद पहुंची बारात, दुल्हन लेकर भी इसी में लौटे, पुरानी यादें हुई ताजा
बालोद/ गुंडरदेही ,देवनारायण साहू। एक वक्त था जब गाड़ियों का अविष्कार नहीं हुआ था लोग पैदल या फिर बैलगाड़ी के भरोसे रहते थे। शादी ब्याह में भी अमूमन बैलगाड़ी का…
