बालोद/ गुंडरदेही ,देवनारायण साहू। एक वक्त था जब गाड़ियों का अविष्कार नहीं हुआ था लोग पैदल या फिर बैलगाड़ी के भरोसे रहते थे। शादी ब्याह में भी अमूमन बैलगाड़ी का ही इस्तेमाल किया जाता था। उन पुरानी यादों को ताजा करते हुए बालोद जिले के गुंडरदेही ब्लाक ग्राम सलौनी के नेताम परिवार ने ही कुछ ऐसी पहल की। अपने बेटे सुभाष कुमार नेताम की शादी में पिता राधेश्याम नेताम ने बैलगाड़ी से ही बारात निकाली। ग्राम सलौनी के रहने वाले उक्त परिवार की बारात ग्राम माहुद बी में बैलगाड़ी से ही पहुंची। जहां दुलार सिंह मरई की सुपुत्री देवश्री के साथ सुभाष ने सात फेरे लिए और इसी बैलगाड़ी से वापस बारात दुल्हन लेकर गांव सलोनी पहुंचे। जहां पूरे ग्रामीणों ने उत्साह के साथ दूल्हा-दुल्हन का स्वागत किया। ग्रामीणों के मुताबिक बुजुर्गों की रजामंदी से उक्त ब्याह हुए हैं। इसलिए बुजुर्गों की यादों को ताजा करते हुए पुराने रीति रिवाज के साथ बैलगाड़ी से बारात ले जाया गया। इससे दोनों में खुशी का माहौल भी देखने को मिला। तो वही लोगों में बैलगाड़ी से बारात जाने की उत्सुकता भी छाई रही और यह शादी एक यादगार भी बन गई। बैलगाड़ी से बारात जाना छत्तीसगढ़ की प्राचीन संस्कृति की एक अलग पहचान है और इन्हीं रीति-रिवाजों को संजोए रखने के लिए नेताम परिवार ने यह पहल की। इस पहल की जानकारी मिलने पर गुण्डरदेही क्षेत्र के विधायक कुंवर सिंह निषाद वा ग्राम माहुद बी के सरपंच डा्ं . नारायण दास साहू ने भी सराहना और प्रशंसा की।
बुजुर्गों की रजामंदी से हुआ ऐसा ब्याह: बैलगाड़ी से सलौनी से माहूद पहुंची बारात, दुल्हन लेकर भी इसी में लौटे, पुरानी यादें हुई ताजा
