हरबोला संप्रदाय का स्तुति गान का अनूठा रिवाज अब विलुप्ति की कगार पर, पेड़ो पर चढ़ बस्ती को 5 बजे जगाते हैं ये हरबोले
बालोद। बचपन में आपने कविता सुनी होगी बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी है,,, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी है,,,, इन पंक्तियों में आने वाले हरबोलो…
