पद्मश्री डोमार सिंह कुंवर ने कहा—पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाकर ही धरती को हरा-भरा बनाया जा सकता है
डौण्डीलोहारा। पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से पर्यावरण गतिविधि एवं संरक्षण टीम, जिला बालोद के तत्वावधान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़गांव, डौण्डीलोहारा में सीडबॉल निर्माण एवं बीजरोपण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, पर्यावरण गतिविधि के कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई और अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 8 बजे भारत माता के चलचित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री डोमार सिंह कुंवर रहे, जबकि अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य श्री जितेन्द्र कुमार उइके ने की। विशेष अतिथि के रूप में जनपद सदस्य डौण्डीलोहारा डोमेन्द्र राजपूत, योगेश्वर प्रसाद साहू, वैभव साहू, संजय साहू, चित्ररेखा साहू, डोमेन्द्र देशमुख, छबि लाल, विनोद कुमार साहू सहित पर्यावरण गतिविधि जिला संयोजक कमलकांत साहू उपस्थित रहे।
कार्यशाला में पद्मश्री डोमार सिंह कुंवर ने गीत एवं प्रेरणादायी संदेश के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या किसी एक व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं है, बल्कि इसे व्यापक जनआंदोलन बनाना होगा। जब सामाजिक कार्यकर्ता, परिवार और पूरा समुदाय एकजुट होकर पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आता है, तभी इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।

उन्होंने कहा कि सीडबॉल बनाना एक सरल और प्रभावी प्रक्रिया है, जिसमें बच्चे, युवा, बुजुर्ग और परिवार के सभी सदस्य मिलकर सहभागिता कर सकते हैं। सीडबॉल के माध्यम से खाली पड़ी भूमि, बंजर क्षेत्रों और दुर्गम स्थानों पर भी हरियाली विकसित करने की दिशा में प्रभावी प्रयास किया जा सकता है। सामूहिक भागीदारी के साथ इसे अभियान का रूप दिया जाए तो कम समय में बड़ी संख्या में पौधों के लिए बीजारोपण किया जा सकता है।
पद्मश्री डोमार सिंह कुंवर ने इस बात पर भी जोर दिया कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लगाए गए पौधों को बचाना और उनका संरक्षण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जब परिवार, मोहल्ले और समुदाय के लोग मिलकर पौधे लगाते हैं तो उनमें उन पौधों के प्रति अपनापन और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। परिवार द्वारा ‘स्मृति वृक्ष’ या ‘पारिवारिक वाटिका’ विकसित करने से पौधों के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी पैदा होता है, जिससे उनके संरक्षण की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में सामाजिक कार्यकर्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे स्थानीय प्रजातियों के बीजों का चयन, मिट्टी की तैयारी और मानसून के अनुकूल समय का निर्धारण करने में समुदाय का मार्गदर्शन कर सकते हैं। साथ ही लोगों में यह जागरूकता पैदा करना आवश्यक है कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा से जुड़ा सामूहिक दायित्व है। जब पौधरोपण को सामुदायिक उत्सव का रूप दिया जाएगा, तब पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी तेजी से जन-जन तक पहुंचेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य श्री जितेन्द्र कुमार उइके ने कहा कि सीडबॉल निर्माण और पर्यावरण संरक्षण का कार्य परिवार के सभी सदस्य मिलकर कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि परिवार में पिता 10 सीडबॉल बनाएं, माता 10 सीडबॉल तैयार करें और इसी तरह दादा-दादी एवं परिवार के अन्य सदस्य भी योगदान दें तो सामूहिक रूप से बड़ी संख्या में सीडबॉल तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की है।
उन्होंने कहा कि वृक्ष मानव जीवन का मूल आधार हैं। पेड़ हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करने के साथ हवा में मौजूद हानिकारक गैसों एवं धूल को अवशोषित कर पर्यावरण को शुद्ध करते हैं। वे मिट्टी के कटाव को रोकने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने और जल चक्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हरे-भरे वातावरण में रहने से मानसिक तनाव कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
कार्यक्रम के अंत में कमलकांत साहू ने विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को ‘नेशनल स्टूडेंट पर्यावरण प्रतियोगिता-2026 (NSPC)’ के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण आधारित प्रतियोगिता है, जिसे भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है। प्रतियोगिता 15 जुलाई से प्रारंभ होकर 15 अगस्त 2026 तक चलेगी। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक संख्या में इसमें भाग लेने की अपील की।
कार्यक्रम में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं स्टाफ ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया। इनमें श्री नरेश कुमार पटोटी, श्रीमती हिरमन चौरले, श्री केवल सिंह नुरेटी, श्री लोचन प्रसाद साहू, श्रीमती भेनुमति चतुर्वेदी, श्री संदीप कुमार वर्मा, श्रीमती कादम्बिनी यादव, श्रीमती खिलेश्वरी तिवारी, श्री तेजराम लटिये, श्रीमती सुशीला ध्रुवे, श्री प्रेमलाल भुआर्य, श्री रोशन कुमार भंडारी, श्री मनोज कुमार पाटिल, श्री सिधेश्वर यादव, श्रीमती सरिता साहू, श्री प्यारे लाल सिन्हा, आदित्य कुमार उइके एवं सुश्री दीपिका साहू शामिल रहे।
वहीं कार्यालयीन स्टाफ से श्री तेज प्रताप राजपूत, श्री ओम प्रकाश सिन्हा, श्री कमलेश कुमार ताण्डे, श्रीमती सविता कुरे, श्री शत्रुधन सिंह, श्रीमती केशरी बाई, श्री आकाश ठाकुर एवं श्री भुवन लाल गंगबोइर सहित विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यशाला के दौरान पर्यावरण गतिविधि से जुड़े कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों एवं स्थानीय नागरिकों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, सीडबॉल के माध्यम से हरियाली बढ़ाने और लगाए गए पौधों की सुरक्षा एवं संवर्धन का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के साथ-साथ यह संदेश दिया कि आज तैयार किया गया एक सीडबॉल आने वाले कल में एक वृक्ष का रूप लेकर धरती को हराभरा बनाने में योगदान दे सकता है।












