अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) बालोद की अदालत ने बालाराम सिन्हा को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत सुनाई सजा
बालोद। लाठी से हमला कर एक व्यक्ति की हत्या करने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) बालोद श्री ताजुद्दीन आसिफ की अदालत ने आरोपी बालाराम सिन्हा, पिता स्व. परऊराम सिन्हा, उम्र 66 वर्ष, निवासी करियाटोला (तुमड़ीकसा), थाना मंगचुवा, जिला बालोद को दोषी ठहराते हुए भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास एवं 100 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने समुचित जांच के बाद निर्णय प्राप्ति की तारीख से दो माह के भीतर पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना, 2018 के अंतर्गत पीड़ित के आश्रितों को नियमानुसार प्रतिकर प्रदान करने के संबंध में आवश्यक जांच कर कार्रवाई के लिए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद को भी निर्देशित किया है।
अभियोजन की ओर से इस प्रकरण की पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक सनद कुमार श्रीवास्तव ने की। अभियोजन के अनुसार, घटना 17 अक्टूबर 2025 की है। प्रार्थी रूपेन्द्र कुमार सिन्हा की सूचना पर थाना मंगचुवा के सहायक उपनिरीक्षक देवकुमार कोर्राम ने देहाती नालसी दर्ज की थी। प्रार्थी ने बताया था कि उसके पिता जगतराम सुबह करीब 6 बजे शौच के लिए नरवा खेत रपटा मार्ग होते हुए खरखरा नदी की ओर गए थे। लगभग 6:40 बजे देवनराम ने सूचना दी कि आरोपी बालाराम सिन्हा ने जगतराम के साथ डंडे से मारपीट की है, जिसके कारण वे बेहोश हो गए हैं।
सूचना मिलने पर परिजन घटनास्थल पहुंचे और जगतराम को मोटरसाइकिल से घर लेकर आए। उस समय उनकी सांस हल्की-हल्की चल रही थी, लेकिन कुछ ही देर बाद उनकी सांस चलना बंद हो गई। घटना की सूचना के बाद पुलिस ने मर्ग इंटीमेशन क्रमांक 0/2025 दर्ज कर शव पंचनामा कार्रवाई की और मृतक का शॉर्ट पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद थाना मंगचुवा में अपराध क्रमांक 26/2025, भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
विवेचना के दौरान आरोपी के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर घटना में प्रयुक्त लाठी एवं कपड़े जब्त किए गए तथा आवश्यक जांच कराई गई। अपराध में आरोपी की संलिप्तता पाए जाने पर पुलिस ने उसे 18 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया। सम्पूर्ण विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस द्वारा न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
प्रकरण में प्रस्तुत चक्षुदर्शी साक्षी देवन सिंह की गवाही भी महत्वपूर्ण रही। उसके अनुसार, 17 अक्टूबर 2025 की सुबह वह अपने खेत के नरवा रपटा के पास मछली पकड़ रहा था। इसी दौरान उसे बचाव की आवाज सुनाई दी। मौके पर पहुंचने पर उसने देखा कि आरोपी बालाराम सिन्हा और मृतक जगतराम एक-दूसरे का कॉलर पकड़े हुए थे। मौके पर मौजूद देवन सिंह, टीकम और तुकाराम ने दोनों को अलग कराया। इसी दौरान आरोपी ने जगतराम की पीठ पर डंडे से वार कर दिया, जिससे वे बेहोश होकर गिर पड़े।
इसके बाद देवन सिंह ने घटना की जानकारी जगतराम के घर जाकर दी। सूचना मिलने पर उनके नाती दुर्गेश एवं खेमलाल मोटरसाइकिल से घटनास्थल पहुंचे और जगतराम को घर लेकर आए। घटना के कुछ ही समय बाद जगतराम की मृत्यु हो गई।
प्रकरण में चक्षुदर्शी साक्षी के बयान सहित प्रस्तुत प्रबल एवं ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी बालाराम सिन्हा को हत्या का दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास एवं 100 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। प्रकरण की संपूर्ण विवेचना सहायक उपनिरीक्षक देवकुमार कोर्राम द्वारा की गई थी।
न्यायालय के इस फैसले से हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी को कठोर दंड मिला है। मामले में प्रत्यक्षदर्शी की गवाही और विवेचना के दौरान जुटाए गए ठोस साक्ष्यों ने न्यायिक निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।











