बालोद विशेष न्यायालय का फैसला: जुर्माना भी लगाया, SC/ST अत्याचार अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई
बालोद। आदिवासी महिला का रास्ता रोककर जबरदस्ती गले लगाने और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के मामले में माननीय एस.एल. नवरत्न, प्रधान विशेष/सत्र न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम न्यायालय, बालोद ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए कारावास की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने आरोपी मोहम्मद मेराज (29 वर्ष), निवासी वार्ड क्रमांक 15, शहीद अस्पताल के पास, राजहरा, जिला बालोद को भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 के तहत 04 वर्ष के कठोर कारावास एवं 1,000 रुपये अर्थदंड तथा अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(बी)(i) सहपठित धारा 3(2)(va) के तहत भी 04 वर्ष के कठोर कारावास एवं 1,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय का निर्णय 18 जून 2026 को सुनाया गया।
मार्केट से लौट रही महिला के साथ हुई थी घटना
प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक (एट्रोसिटी) पुष्पदेव साहू द्वारा की गई। अभियोजन के अनुसार घटना 15 दिसंबर 2025 की शाम लगभग 3 से 4 बजे के बीच की है। पीड़िता राजहरा बाजार से खरीदारी कर अपने घर लौट रही थी और क्रिकेट ग्राउंड के सामने स्थित मार्ग से गुजर रही थी।
इसी दौरान आरोपी ने महिला को आवाज देकर रोका। अभियोजन के अनुसार आरोपी महिला के पास पहुंचा और उसकी इच्छा के विरुद्ध उसकी दाहिनी बांह पकड़कर उसके साथ जबरदस्ती करने लगा तथा आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए गले लगाने का प्रयास किया। महिला द्वारा विरोध करने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे, जिसके बाद आरोपी वहां से हट गया।
पीड़िता ने घर पहुंचकर घटना की जानकारी अपने पति को दी और बाद में थाना राजहरा पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
जांच के बाद दर्ज हुआ अपराध
मामले की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी महिला को पहचानता था और यह भी जानता था कि वह आदिवासी समाज से संबंधित है। शिकायत एवं साक्ष्यों के आधार पर थाना राजहरा में अपराध क्रमांक 389/2025 दर्ज कर विवेचना की गई।
प्रकरण की जांच निरीक्षक संतोष भुआर्य, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस देवांश सिंह राठौर एवं नगर पुलिस अधीक्षक विवेक पाटले द्वारा की गई। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषसिद्ध मानते हुए उपरोक्त दंड सुनाया।








