बालोद। जिले में पंचायत राजनीति से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया है, जहां अपर कलेक्टर बालोद ने दो ग्राम पंचायतों के सरपंचों के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी है। यह निर्णय छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम एवं सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत दिया गया है।
🏛️ संबलपुर सरपंच को राहत
ग्राम पंचायत संबलपुर की सरपंच श्रीमती रेणु गायकवाड़ ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत कर 15 अप्रैल 2026 को लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को चुनौती दी थी।
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि—
- प्रस्ताव निर्धारित अवधि के बाद लाया गया
- अधिकांश पंचों से बिना जानकारी के हस्ताक्षर कराए गए
- पूरी प्रक्रिया अवैधानिक तरीके से पूरी की गई
इन तथ्यों के आधार पर प्रकरण स्थगित रखने की मांग की गई, जिसे स्वीकार करते हुए अपर कलेक्टर ने अविश्वास प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
⚖️ भोइनापार सरपंच को भी मिली राहत
इसी तरह ग्राम पंचायत भोइनापार की सरपंच श्रीमती श्यामाबाई मारकण्डे ने भी अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ आवेदन प्रस्तुत किया।
उनके अधिवक्ता ने तर्क दिया कि—
- उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया
- पंचों द्वारा व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थवश प्रस्ताव लाया गया
- आरोप निराधार और प्रक्रिया के विरुद्ध हैं
इस पर सुनवाई के बाद अपर कलेक्टर ने न्यायहित और संतुलन को ध्यान में रखते हुए अविश्वास प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
📜 कानूनी आधार पर फैसला
दोनों मामलों में—
- छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 21 (नियम 4 व 8)
- सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151
के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह आदेश पारित किया गया।
❗ क्या है इसका मतलब
इस आदेश के बाद—
👉 दोनों सरपंच अपने पद पर फिलहाल बनी रहेंगी
👉 अविश्वास प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय आने तक कोई कार्रवाई नहीं होगी
🔍 अब आगे क्या
अब इन मामलों में अंतिम सुनवाई और विस्तृत निर्णय का इंतजार रहेगा, जिससे यह तय होगा कि अविश्वास प्रस्ताव वैध है या नहीं।
👉 इस फैसले को पंचायत स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है, जिसने फिलहाल दोनों जनप्रतिनिधियों को राहत दी है।
