आस्था के केंद्र पर फिर वारदात- भगवान का भी नहीं रहा चोरों को खौफ: दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर कमरौद में डेढ़ साल में दूसरी बार डाका, चांदी के आभूषण चोरी; पुलिस के सामने बड़ी चुनौती



देखिए पूरी वीडियो कैसे ….डेढ़ साल के भीतर कमरौद हनुमान मंदिर में हुई दूसरी बड़ी चोरी

बालोद। गुण्डरदेही थाना क्षेत्र के ग्राम कमरौद स्थित प्रसिद्ध भूमिफोड़ दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में चोरों ने एक बार फिर दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया है। रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात अज्ञात चोर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर हनुमान जी की मूर्ति पर सजे चांदी के कीमती आभूषण चोरी कर ले गए। इस घटना ने श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है और यह साबित करता है कि चोरों को अब भगवान का भी कोई खौफ नहीं रहा।

डेढ़ साल में दूसरी बार चोरी, पुराने मामले अब भी अनसुलझे

हैरानी की बात यह है कि ठीक डेढ़ साल पहले जून 2024 में भी इसी मंदिर में लगभग इसी तरह की चोरी हो चुकी है, लेकिन उस मामले के आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। दूसरी बार हुई इस बड़ी चोरी ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुजारी ने दी सबसे पहले सूचना

मंदिर के पुजारी दुर्गा प्रसाद पांडे ने बताया कि सोमवार सुबह जब वे नियमित पूजा के लिए उठे तो मंदिर के मुख्य गेट का ताला टूटा हुआ नजर आया। अनहोनी की आशंका के चलते वे भीतर नहीं गए, बल्कि बाहर से ही गर्भगृह की ओर देखा। दूर से ही उन्हें समझ आ गया कि मंदिर में चोरी हो चुकी है और मूर्ति पर सजे चांदी के आभूषण गायब हैं। इसके बाद उन्होंने तत्काल मंदिर समिति के सदस्यों को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस को भी अलर्ट किया गया।

पुलिस, फोरेंसिक और साइबर सेल जांच में जुटी

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। साक्ष्य सुरक्षित रखने के उद्देश्य से फिलहाल श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में दर्शन पर रोक लगा दी गई है। इसके बाद फोरेंसिक टीम और साइबर सेल को भी जांच में शामिल किया गया।

डॉग स्क्वायड की कार्रवाई, स्कूल गेट तक मिला सुराग

देर शाम डॉग स्क्वायड की टीम भी मौके पर पहुंची। खोजी कुत्ते ने मंदिर परिसर से सुराग तलाशना शुरू किया और स्कूल के गेट तक पहुंचा, लेकिन इसके आगे कोई ठोस कड़ी हाथ नहीं लग सकी। इससे पुलिस को कुछ अहम संकेत तो मिले, लेकिन अभी तक कोई निर्णायक सुराग सामने नहीं आया है।

सीसीटीवी कैमरे भी उखाड़ ले गए चोर

चोरों के हौसले इस कदर बुलंद थे कि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के बावजूद उन्होंने वारदात को अंजाम दिया। जानकारी के अनुसार तीन से चार कैमरे उखाड़कर चोर अपने साथ ले गए। मंदिर समिति के अनुसार कैमरों में पहले से तकनीकी समस्या थी और रिकॉर्डिंग नहीं हो पा रही थी। चोर इस तथ्य से परिचित थे या नहीं, यह तो उनकी गिरफ्तारी के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन पकड़े न जाएं इसी आशंका में उन्होंने कैमरे उखाड़ दिए। मंदिर परिसर में लगी सीढ़ियों का उपयोग कर कैमरे निकाले जाने की बात सामने आई है।

डीवीआर सुरक्षित, लेकिन फुटेज नहीं मिला

हालांकि कैमरों का डीवीआर बॉक्स मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित एक अन्य भवन में सुरक्षित मिला है, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उसमें कोई फुटेज उपलब्ध नहीं हो पाया। यदि समय रहते यह तकनीकी खामी दूर कर ली गई होती, तो संभवतः जांच में महत्वपूर्ण सुराग हाथ लग सकते थे।

चोरी की रकम को लेकर अलग-अलग दावे

मंदिर समिति का दावा है कि चोरी गए चांदी के आभूषणों की कीमत लगभग 8 से 10 लाख रुपये है। वहीं पुलिस का प्रारंभिक आकलन है कि डेढ़ से दो लाख रुपये मूल्य के आभूषण चोरी हुए हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि कुछ चांदी के आभूषण गर्भगृह में ही गिरे मिले हैं, जिन्हें संभवतः हड़बड़ी में चोर नहीं उठा सके।

दो से तीन आरोपियों की आशंका

जिस तरीके से पूरी वारदात को अंजाम दिया गया है, उससे पुलिस को आशंका है कि इस चोरी में दो से तीन आरोपी शामिल हो सकते हैं। पुलिस आसपास के गांवों, मुख्य मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। साथ ही संदिग्ध लोगों से पूछताछ का सिलसिला भी लगातार जारी है।

ग्रामीणों और मंदिर समिति में आक्रोश

लगातार दूसरी बार हुई चोरी से मंदिर समिति और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जब पहले भी चोरी हो चुकी थी, तब सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए थे। बार-बार मंदिर में चोरी की घटनाओं से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हैं और क्षेत्र में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

पुलिस के लिए बड़ी चुनौती

फिलहाल फोरेंसिक टीम, साइबर सेल और स्थानीय पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गहन जांच में जुटी हुई है। यह मामला पुलिस प्रशासन के लिए न केवल कानून-व्यवस्था की दृष्टि से, बल्कि आस्था और विश्वास से जुड़े इस संवेदनशील विषय के कारण भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

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