‘हंडा’ भाग-2 इस गांव में हो चुकी रिलीज, जीजा-साले ने किया ऐसा कमाल, करोड़पति बनाने दिखा रहे लोगों को इंद्रजाल, देखिए पूरी कहानी.।



बालोद। कुछ महीने पहले एक छत्तीसगढ़ी फिल्म आई थी ‘हंडा’ जिसने काफी सुर्खिया बटोरी। अमलेश नागेश की इस फिल्म की कहानी गड़े धन/ खजाने को हासिल करने पर केंद्रित थी। फिल्म की कहानी छत्तीसगढ़ी संस्कृति और मिथकों पर आधारित एक साहसिक और हास्य से भरपूर फिल्म थी, जिसमें दो परिवार एक प्राचीन खजाने को खोजने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं। फिल्म एक खजाने की तलाश पर केंद्रित है, जिसके लिए कलाकार एक नक्शे को पाने और उसे हासिल करने की कोशिश करते हैं। ये तो रही फिल की बात, अमलेश जी भले इस फिल्म का पार्ट 2 नहीं बनाए हैं लेकिन छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में फिल्म नहीं बल्कि असली का हंडा फिल्म रिलीज हो चुका है। यहां के ग्राम जगन्नाथपुर में जीजा और साले के जोड़ी ने कई ग्रामीणों को उनके घरों में गड़ा धन यानि खजाना छिपे होने का लालच दिखाकर ऐसी ठगी की है कि उन्हे इस बात का पता भी नहीं चलने दिया कि वे धोखाधड़ी के शिकार हो चुके हैं। जगन्नाथपुर के अकबर खान और उनके जीजा वसीम खान के खिलाफ बालोद पुलिस ने ग्रामीणों की शिकायत के बाद मामला दर्ज कर उनकी छानबीन शुरू कर दी है। आप भी पढिए आखिर कैसे ये जीजा और साला लोगों “हंडा” के नाम पर अपना शिकार बनाकर उनसे लाखों रुपये वसूलते थे

बालोद थाना क्षेत्र के ग्राम जगन्नाथपुर में गड़ा धन दिलाने के नाम पर इंद्रजाल करके नजर बंद तरीके से लोगों को बेवकूफ बनाकर लाखों की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। जगन्नाथपुर के ही कई लोगों से मुसलमान जीजा और साले ने मिलकर धोखाधड़ी की है। जिस पर बालोद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। पीड़ितों ने सामूहिक रूप से बीते दिनों आईजी रामगोपाल गर्ग, एसपी योगेश पटेल और थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा को आवेदन देकर शिकायत की थी। साथ ही गांव की जनपद सदस्य दमयंती हरदेल ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी।

मामले में बालोद पुलिस ने तुरंत कार्यवाही करते हुए पीड़ितों का बयान लेकर एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुट गई है। आरोपियों में प्रमुख रूप से तंत्र क्रिया करने वाला वसीम खान निवासी धुरपुर इलाहाबाद हाल निवास भिलाई और जगन्नाथपुर का ही एक मुसलमान युवक अकबर खान शामिल है। जो वसीम खान का ही साला है। इसके साथ ही इलाहाबाद से एक चेला भी पूजा पाठ करने के लिए आता था। तीन लोगों ने मिलकर कई लोगों को ठगी के जाल में फसाया है और लाखों लेकर चले गए हैं। इस मामले में मजेदार बात यह है कि लोगों को खुद के साथ हुई ठगी का पता ही नहीं है। उनके घर गड़ा धन दिलाने के नाम पर पूजा पाठ किया जाता है। फिर अंत में ऐसी स्थिति पैदा कर दी जाती है कि हम गड़ा धन हासिल नहीं कर सकते, जान का खतरा है। लोग डर के मारे फिर पूजा पाठ अधूरा छोड़कर बंद कर देते हैं और मामला दबा दिया जाता है। ऐसे में लोगों को पता ही नहीं होता कि हमारे साथ ठगी हुई है। हाल ही में जगन्नाथपुर के एक युवक ने हिम्मत दिखाते हुए मामले का खुलासा किया। तब जाकर अन्य पीड़ितों को भी एहसास हुआ कि उनके साथ भी इस तरह की धोखाधड़ी हुई है।

देखिए किस तरह से हुई है लोगों के साथ गड़ा धन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी, कहीं आप भी तो नहीं हुए हैं शिकार

दो दोस्त हो गए लालच में ठगी का शिकार

जगन्नाथपुर के एक 35 वर्षीय पीड़ित युवक ने बताया कि गड़ा धन दिलाने के नाम पर इलाहाबाद के धुरपुर के रहने वाले वसीम खान के द्वारा लगभग 7 लाख की धोखाधड़ी की गई है। जगन्नाथपुर के अकबर खान के यहां उक्त वसीम खान उम्र 50 वर्ष रिश्तेदार बनकर आया हुआ था। अकबर ने बताया कि वह उसका जीजा है। इस बीच वसीम खान ने मेरे एक मित्र को झांसा दिया कि उसके घर में गड़ा धन छिपा हुआ है। उसे विशेष पूजा पाठ तंत्र-मंत्र के जरिए बाहर निकालना पड़ेगा, तुम करोड़पति बन सकते हो। इसके लिए पूजा पाठ करने के लिए लगभग ₹22 हजार के सामान की जरूरत पड़ना बताया और कहा कि बालोद में समान मिल जाएगा तो देख लो, वरना मैं अपने चेला के जरिए मंगा लूंगा। तत्काल में मेरे मित्र के पास ₹22 हजार नहीं थे तो उन्होंने मुझसे संपर्क किया और इस तरह गड़ा धन छिपे होने की जानकारी मुझे भी दी। मैं भी उनकी बातों में विश्वास करके अपने मित्र की मदद हेतु 22000 में 10000 का सहयोग किया, 12000 मेरा मित्र लगाया और सामान लेने का प्रयास किए। पर बालोद में नहीं मिला। जिसके बाद वसीम खान ने इलाहाबाद में रहने वाले अपने एक चेले, जिसका नाम भी वसीम बताया जाता है , से वह सामान मंगवाया और कुछ दिनों बाद दोनों जुलाई 2022 में जगन्नाथपुर आए। जहां उसे मेरे मित्र के मकान में रात करीब 12 बजे मेरी और मेरे मित्र की मौजूदगी में वसीम खान ने पूजा पाठ किया। हम दोनों ने मिलकर लगभग 3 फीट एक कमरा में गड्ढा खोदा। फिर हमें उसने थोड़ी देर के लिए बाहर रुकने और ओम नमः शिवाय का मंत्र जाप करते रहने के लिए कहा। हम दोनों बाहर आ गए। वसीम खान अपने चेले के साथ पूजा पाठ करता रहा।

कहने लगा, एक क्विंटल 40 किलो का है सोना , बन सकते हो करोड़पति

फिर हमें अंदर बुलाया तो देखा कि मटका में सोने के सिक्के भरे हुए थे। पास में एक सर्प भी बैठा हुआ था फिर हमें वसीम खान द्वारा कहा गया कि इस मटके के नीचे में और दो मटका यानी कुल तीन मटके यहां पर दबे हुए हैं। एक क्विंटल 40 किलो का सोना है, करोड़ों की संपत्ति है। लेकिन इसमें अभी सर्प रक्षा कर रहा है। यह खजाना अशुद्ध है। इसका शुद्धिकरण करने के लिए शक्तिपुंज फाइल की जरूरत पड़ेगी तब जाकर इस खजाने को हासिल कर सकते हैं। और फिर उस मटके को स्टील के एक पात्र से ढक कर वापस गड्ढे को भर दिया गया और कहा गया कि शक्तिपुंज खरीदना पड़ेगा जिसमें करीब 12 लाख का खर्चा आएगा और यह इलाहाबाद से 80 किलोमीटर दूर एक घने जंगल के गांव से गांव में मिलता है मुझे वहां जाना पड़ेगा । हम दोनों चूंकि मौके पर मटके में सोने के सिक्के देख चुके थे इसलिए उसकी बातों पर भरोसा हो चुका था कि वाकई यहां खजाना दबा हुआ है और हम उसे पाकर करोड़पति बन सकते हैं।

शक्तिपुंज लाने के लिए इलाहाबाद तक गए साथ में

उनकी बातों पर भरोसा करते हुए वसीम खान के साथ ही मैं और मेरा मित्र तीनों बस से इलाहाबाद गए। जहां हमें धूरपुर में अपने निवास स्थान में रखा और स्वयं कहीं से शक्तिपुंज लाया और कहा कि इसमें सोने का गुरादा और हीरे का पानी रहता है। इसलिए महंगा मिलता है। शक्तिपुंज जो कि एक तरल पदार्थ जैसा था जिसमें सोने की तरह चमक और अभ्रक जैसा मिला हुआ दिखाई दे रहा था। शक्तिपुंज को मेरे मित्र को दिया गया था जो पतले कांच के एक लंबी बोतल में भर कर दिया गया था। इस दौरान जेब में रखते समय वह लीकेज हो गया । बाद में देखने पर बताया गया कि एक तिहाई हिस्सा बह गया है, इसमें पूरी मात्रा रखने के लिए 3 लाख की और जरूरत पड़ेगी। फिर हमने तत्काल 1 लाख नकद दिया और 2 लाख बाद में एडजस्ट करने की बात हुई। शक्तिपुंज लेकर फिर हम वसीम खान के साथ दोबारा जगन्नाथपुर के उक्त मकान में आए और दोबारा गड्ढे को खोलकर पूजा पाठ किया गया। इस दौरान हमें सोने के सिक्के से भरा मटका तो नहीं दिखा लेकिन एक सर्प निकला।

पूजा के अंत में जान का खतरा बताया तो डर गए

वसीम अकेला पूजा कर रहा था और अचानक वह जोर से सीने में झटका देते हुए हजरत हजरत… बोलते हुए चिल्लाया और खून की उल्टी करने लगा। कहा कि यहां गड़बड़ हो गया है, अशुद्ध हो गया है, खजाना हासिल नहीं कर सकते। हम सब यह देखकर घबरा गए और अनहोनी के डर से वहां सब सामान समेटकर भाग गए। यह सब तंत्र-मंत्र विद्या देखकर हमें यह डर बना रहा कि किसी को कुछ कहेंगे या कहीं कुछ बताएंगे तो हमारी जान को कहीं कुछ खतरा न हो जाए। इसलिए हमने वसीम खान से दोबारा पैसा और जमीन वापस मांगने की कोशिश भी नहीं की।

पैसों के बदले आरोपी ने पीड़ित का जमीन अपनी बेगम के नाम कराया

पीड़ित युवक ने बताया वसीम खान द्वारा शक्तिपुंज के बदले 12 लाख खर्च की बात कही गई थी। जिस पर मैंने अपने बालोद के एक जमीन को जो कि बुढ़ापारा में 3.50 डिसमिल है, को रजिस्ट्री कराकर लगभग चार लाख में वसीम खान की पत्नी अकबरी बेगम ( जगन्नाथपुर के अकबर खान की सगी बहन) के नाम करवाया और बाकी पैसा अलग-अलग किस्तों में फोन पे के माध्यम से मेरे द्वारा 7 अगस्त 2022 से लेकर 9 दिसंबर 2022 तक 1 लाख 77 हजार रुपए क्रमशः 7 अगस्त को 5000, 9 अगस्त को 1000,14 अगस्त को 10000, 16 अगस्त को 1000,14 अक्टूबर को 5000,18 अक्टूबर को 5000, 5 नवंबर को 5000,5 नवंबर को पुनः 90000, 6 दिसंबर को 40000, 9 दिसंबर को ₹15000 ट्रांसफर किए हैं, जिसके प्रमाण मेरे फोन पे के हिस्ट्री में मौजूद हैं। बाकी पैसा मैंने जमीन की रजिस्ट्री कराते समय अलग से ₹1 लाख और दिया । इस तरह लगभग जमीन और नगदी और डिजिटल ट्रांजेक्शन मिलाकर करीब 7 लाख की ठगी मुझसे और मेरे मित्र से वसीम खान के द्वारा की गई है। वसीम खान से हमारा परिचय गांव के रहने वाले अकबर खान के जरिए हुआ। जो वसीम खान को अपना जीजा बताता है। जिसके कारण हम ठगी का शिकार हुए। आशंका है कि जिस तरह हमारे साथ हुआ है ऐसा उन लोगों के द्वारा अन्य कई भोले भाले लोगों के साथ गड़ा धन का लालच दिखाकर ठगी किया गया है।

अन्य युवक के साथ हुई घटना, तब हुआ एहसास, हमारे साथ हुई है धोखाधड़ी

मुख्य प्रार्थी ने बताया कि जगन्नाथपुर के अन्य युवक के घर भी इसी तरह से वसीम खान और अकबर खान के द्वारा पूजा पाठ कर उन्हें गड़ा धन दिखाया गया लेकिन समय रहते ठगी का पता चल जाने पर वह सचेत हो गया । इस बात की जानकारी मिलने पर उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ भी धोखाधड़ी हुई है। पूजा के अंत में खून की उल्टी करना बस एक ढोंग था। ताकि हमें डर हो जाए और किसी को कुछ ना कहे। अब जाकर उन्होंने थाने में शिकायत की और अन्य ठगी के शिकार भी धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं।

पूजा के चार दिन बाद देखा तो नहीं था कोई खजाना, पता चल चुका था बना रहे हैं मुझे बेवकूफ

जगन्नाथपुर के ही एक अन्य युवक जिनके जरिए इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ, उन्होंने बताया कि जब उनके घर भी इसी तरह से तंत्र मंत्र करके उन्हें मटका में खजाना दिखाया गया तो उन्होंने सपरिवार दर्शन किया। उसकी मोबाइल में तस्वीर भी ली जिसमें सोने चांदी से भरा एक मटका और बगल में नाग सर्प दिखाई दे रहा है। उन्हें कहा गया कि शक्तिपुंज के लिए चार लाख लगेंगे, पैसों की व्यवस्था करो फिर बताना और वापस गड्ढे को भरकर चले गए थे। चार दिन बाद युवक ने सोचा कि चार लाख फिर क्यों दूं, अगर घर में खजाना है तो निकाल लेता हूं। सांप काटेगा तो सीधे अस्पताल चला जाऊंगा। उन्होंने हिम्मत करते हुए सब्बल से फर्श को उठाकर देखा तो वहां पर ना कोई मटका था, ना खजाना न कोई सांप, सब गायब था। इससे उन्हें ठगी का पता चल गया और वह सचेत हो गया। उन्होंने तत्कालीन बालोद थाना प्रभारी रविशंकर पांडेय और एसडीओपी देवांश राठौर को भी मामले की जानकारी दी थी कि इस तरह से गांव के अकबर खान और उनके जीजा वसीम खान के द्वारा लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है।

गांव के शिव मंदिर के नीचे है खजाना, तंत्र से तुम्हारे घर में कर देंगे प्रकट

एक अन्य पीड़ित युवक ने बताया कि जगन्नाथपुर के अकबर खान ने मुझसे संपर्क करते हुए कहा कि तुम्हारे घर गड़ा धन मिल सकता है, जगन्नाथपुर के बांध के पास स्थित शिव मंदिर के नीचे गड़ा धन है जिसे हम तंत्र-मंत्र के जरिए तुम्हारे घर तक ला सकते हैं। मेरे पास आदमी है जो यह काम करता है। पूजा पाठ करवाओगे तो बताओ फिर फरवरी 2025 में एक रात करीब 11 बजे अकबर कार में भिलाई क्षेत्र के किसी पठान बैगा को लेकर आया। फिर मैंने उनके कहने के मुताबिक शब्बल से पूजा कमरे में लगभग 3 फीट गड्ढा खोदा। उस वक्त तक मुझे कोई गड़ा धन नजर नहीं आया। फिर घर के पूजा कक्ष में वसीम और अकबर ने गोपनीय पूजा की और मुझे और घर वालों को कुछ देर के लिए बाहर रहने कहा गया। पूजा के अंत में हमें कमरे के अंदर बुलाया गया तो हमने देखा कि गड्ढे के बीच मिट्टी के मटके में सोने चांदी से भरा खजाना नजर आ रहा था। बगल में एक सांप भी था। मैंने अपने मोबाइल में उसकी तस्वीर भी ली। फिर पठान बैगा वसीम खान के द्वारा कहा गया कि अभी यह खजाना अपवित्र है। सांप इसकी रक्षा कर रहा है। इसे पवित्र करने के लिए और पूजा करनी है। शक्तिपुंज फाइल की जरूरत पड़ेगी जिसमें करीब चार लाख का खर्चा आएगा। फिलहाल इस खजाने को हम ढक कर जा रहे हैं। इसे कोई खोलकर नहीं देखना है अन्यथा सांप डस देगा। इसके बाद पठान बैगा,उनका एक चेला और अकबर तीनो चले गए । चार दिन बाद जब परिवार के अन्य लोग किसी कार्यक्रम में बाहर गए थे तो मैं फर्श को हटाकर देखा तो वहां गड्ढे में कुछ भी नहीं था।

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