सरकारी काम में समय लगता है, पर हम इसे अनदेखा नहीं कर सकते.. : कल्पना



बालोद– शासकीय आदर्श कन्या शाला बालोद में युमेत्ता फांउडेशन द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता कल्पना बंबोड़े ने बताया कि, विद्यार्थीं जीवन , युवा अवस्था में उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्राप्त करना , अपने लक्ष्य की ओर आगे बढना होता है। परंतु इसी अवस्था में उन पर पढ़ाई का ज्यादा बोझ, मोबाईल पर समय व्यर्थ करना, पारिवारिक माहौल, सामाजिक वातावरण,लत, गलत संगति, किसी बुरी घटना के कारण बुरी यादे, व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, परीक्षा में अधिक अंक लाने का दबाव, इस के कारण आत्महत्या जैसे संबंधी घटना भी बढती जाती हैं। इस तरह के अनेक कारणों से वो अपने पढ़ाई और लक्ष्य से भटक जाते हैं।

बालोद जिले के जनप्रतिनिधी, सांसद को वे कई बार ज्ञापन, आवेदन के माध्यम से अवगत कराते हुये, हर स्कूल, महाविद्यालय में परामर्शदाता पद की नियुक्ति की मांग की जाती रही है,ताकि विद्यार्थींयों से संबंधित किसी भी अप्रिय घटना को पहले ही चिंहाकित किया जाये और उसे रोकने का प्रयास किया जाये। परंतु उस दिशा में शासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं। लिहाजा “सरकारी कार्यों में देरी होती ही हैं”, यह वाक्य बार बार सरकारी अधिकारियों द्वारा भी बड़ी आसानी से सुनने को मिल जाता है। कल्पना ने आगे बताया की हम इस समस्या को नजर अंदाज़ नहीं कर सकते और न ही हम इसे पुरी तरह खत्म कर सकते हैं, पर हमसे जितना हो सकता है हम उस ओर अपना पूरा प्रयास लगा सकते हैं। उसी दिशा में आगे बढ़ते हुये युमेत्ता फांउडेशन व्दारा 6 नंवबर को शासकीय आदर्श कन्या शाला बालोद में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, इस प्रथम कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य गतिविधि के माध्यम से बच्चों से दोस्ती करना और उनकी समस्याओं को समझने के लिए था। जिसके अनुसार बच्चों के लिए आगे के कार्यशाला तैयार की जा सके।

आगे यह कार्यशाला विषयवार हर महीने शाला में आयोजित होगी जो बच्चों के रुचि एवं उनकी समस्या को ध्यान में रखकर किया जायेगा। इस कार्यशाला में शहीद अस्पताल दल्ली राजहरा से डाॅ. प्रीति, डाॅ. दुष्यंत, सीजीपीएससी की तैयारी कर रहे नरेश, संगीत (ध्यान )की पढ़ाई कर रहे राघवेंद्र, आईटीआई से वेदप्रकाश , आदि, इस दौरान बच्चों के साथ जुड़े रहे और इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों की समस्या जानने का प्रयास किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में शाला के प्राचार्य व शाला परिवार का बहुत अच्छा सहयोग मिला। यहा कार्यक्रम बच्चों के लिए काफी नया और अनोखा रहा। बच्चे काफी जल्दी घुलमिल गये और गतिविधि में पुरी तरह अपनी सहभागिता और अगले कार्यक्रम के लिए बच्चों व्दारा सुझाव भी दिया गया। आगे आनेवाले दिनों में बच्चों के विकास और समस्याओं के लिए अन्य पाठशालाओं में भी ऐसी पहल शुरू करने का विचार है।

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