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” जगन्नाथपुर में बेटी है तो कल है” के नाम से रोशन होगी दिवाली

बेटी-बेटा के प्रति भेदभाव दूर करने 7 साल से यादव परिवार की मुहिम जारी, घर-घर बांटे जा रहे हैं पांच मिट्टी के दीपक

बालोद। जगन्नाथपुर के यादव परिवार द्वारा बेटी- बेटा के बीच होने वाले भेदभाव को दूर करने के उद्देश्य से बेटी,बेटा में समानता को बढ़ावा देने और “बेटी है तो कल है ” थीम पर हर साल दिवाली मनाई जाती है। इस क्रम में लगातार सातवें साल यादव परिवार द्वारा ग्राम वासियों को पांच-पांच मिट्टी के दीपक वितरित किए जा रहे हैं। यह पांच मिट्टी के दीपक दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद आंगन में रंगोली सजाकर बेटियों के नाम से जलाए जाते हैं। बेटी है तो कल है के नारे के साथ यहां गांव वाले दिवाली मनाते हैं। यादव परिवार में 2019 में जब 14 जून को उनके घर बिटिया वैष्णवी का जन्म हुआ तो घर वाले काफी खुश हुए और बेटी को लक्ष्मी स्वरूप मानकर अस्पताल से घर आने पर बेटी की पूजा कर गृह प्रवेश कराया गया था।

तब से माता-पिता ने निर्णय लिया कि उनका हर उत्सव बेटियों को समर्पित होगा और फिर दिवाली से “बेटी है तो कल है” के नाम से गांव को रोशन करने की मुहिम शुरू की गई। इसी तरह हर साल पांच-पांच मिट्टी के दीपक यादव परिवार द्वारा बांटे जाते हैं । वैष्णवी की माता माधुरी यादव,पिता दीपक यादव का कहना है कि बेटी, बेटा में कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। दोनों को बराबर समझना चाहिए। आज हो रही भ्रूण हत्या और बेटियों से ज्यादा बेटों को बढ़ावा देने की सोच आगे चलकर असमानता और दूरी पैदा करती है। इस भाव को दिल दिमाग से निकालने के लिए हम एक छोटा सा प्रयास करते हैं। हमारे लिए बेटी और बेटा दोनों ही बराबर हैं। हम लोगों को भी यही समझाते हैं कि बेटी हो या बेटी उनके जन्म पर बराबर खुशियां मनाई जाए। आज भी कई शिक्षित परिवारों में भी हम देखते हैं कि लोग बेटी पैदा होती है तो उतनी खुशी महसूस नहीं करते जितना एक बेटा पैदा होने पर होता है।

एक बेटी दो कुल का नाम रोशन करती है हमें उन्हें कम नहीं आंकना चाहिए। इसी एक सोच के साथ हम “बेटी है तो कल है” की थीम पर सातवें वर्ष भी दिवाली मनाने जा रहे हैं। नरक चतुर्दशी के अवसर पर वैष्णवी और उनके भैया विजय दोनों ने मिलकर ग्रामीणों को घर-घर जाकर पांच-पांच मिट्टी के दीपक बांटे और सभी से इस मुहिम से जुड़ने की अपील की।

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