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वनांचल ग्राम किल्लेकोड़ा को शिक्षा जगत में व्याख्याता साहसी ने दिलाई पहचान, गत वर्ष मिल चुका राज्यपाल शिक्षक सम्मान

विभिन्न संगठन और संस्थाओं से भी हो चुके हैं सम्मानित,नवाचारी शिक्षा गतिविधियों और जागरूकता अभियानों में रहती है भागीदारी

डीबी डिजिटल मीडिया बालोद। अपने नवाचारी शिक्षा गतिविधियों और जागरूकता अभियानों से डौंडीलोहारा ब्लॉक के अंतिम छोर पर घने जंगलों के बीच बसे किल्लेकोड़ा गांव को शिक्षा जगत में विशेष पहचान दिलाने में व्याख्याता डॉक्टर भरत लाल साहसी का विशेष योगदान रहा है। उनके इन्हीं विशेष कार्यों को देखते हुए पिछले साल उन्हें राज्यपाल शिक्षक सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। इस शिक्षक दिवस पर हम उनके विशेष कार्यों को सामने ला रहे हैं ताकि दूसरे शिक्षक भी उनसे प्रेरित हो सके। डॉक्टर भरत लाल साहसी के उपलब्धि की बात करें तो 2014 से लेकर आज तक शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल किल्लेकोड़ा को प्रकाश में लाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। कहते हैं कि दुनिया में कोई भी चीज असंभव नहीं है। लगातार कोशिश करते रहने से सफलता एक ना दिन कदम चूमती है। ऐसे ही कहानी डॉ बी एल साहसी की है। जिन्होंने अपने अथक प्रयास से विद्यालय में अनेक प्रकार की गतिविधियां संपादित करवाते रहे हैं। जिनकी चर्चा पूरे गांव में आए दिन होती है। उनके मेहनत और प्रयासों के फलस्वरुप 2014 से लेकर अब तक दसवीं का परीक्षा परिणाम 90% से अधिक ही रहा है। उनके मार्गदर्शन में शाला प्रबंधन समिति के प्रयास से हाई स्कूल परीक्षा केंद्र तथा हायर सेकेंडरी उन्नयन हुआ। डॉक्टर साहसी एक अच्छे प्रवक्ता व संचालक भी है। जिनके मार्गदर्शन में शासन के आदेश अनुसार विभिन्न प्रकार की शालेय गतिविधियों और कार्यक्रम संचालित होते रहे हैं। उन्होंने जल संरक्षण, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ, नशा मुक्ति अभियान तथा कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर ऑफलाइन तथा ऑनलाइन कक्षा का संचालन किया। जो कि शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल किल्लेकोड़ा के लिए एक बड़ी उपलब्धि रही है। उन्होंने कोरोना काल के दौरान चार महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना भी की है, जिनमें जल संरक्षण, राजनांदगांव रियासत के सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक इतिहास 1900 से 1947 तक, बस्तर की क्रांतिकारी वीरांगनाओं का इतिहास शामिल है। डॉक्टर साहसी व्याख्याता को उनके भागीरथ प्रयास के फलस्वरुप 2023 की शिक्षा रत्न छत्तीसगढ़ पुरस्कार से नवाजा गया है। तत्पश्चात 5 सितंबर 2024 को उनके साहित्य व संस्कृति में लेखन में विशेष योगदान के लिए छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

स्कूल में करते हैं नवाचार

उनके द्वारा बच्चों के झिझक दूर करने के लिए वाद विवाद प्रतियोगिता, तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी, रंगोली प्रतियोगिता ,निबंध प्रतियोगिता ,तथा विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन, विद्यालय व विकासखंड स्तर पर कराते रहे हैं, जिसका लाभ छात्र-छात्राओं को हमेशा मिलता रहा है। सरपंच के माध्यम से विद्यालय के बरामदा को पार्टीशन कर स्लाइडर बनवाया तथा सभागार में मां शारदे की प्रतिमा और मुख्य द्वार पर युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद के प्रतिमा निर्माण में योगदान दिया तथा प्रार्थना स्थल का समतलीकरण सीसी रोड बनवाने में महती भूमिका अदा की तथा छात्र-छात्राओं में धार्मिक कार्यों की ओर ले जाने के लिए प्रत्येक शनिवार को मां शारदे के तैल चित्र का पूजन अर्चना करने का शुभारंभ कराया गया तथा छात्र-छात्राओं की झिझक को कम करने के लिए बहुत सारे कार्यक्रमों का संचालन छात्र-छात्राओं के द्वारा करवाया जाता रहा है जो कि विद्यालय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है । आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को कैसे आगे बढ़ाया जाए इसके लिए भी उन्होंने अथक प्रयास किया है।

इन अवॉर्डों से भी नवाजे जा चुके डॉ साहसी

राज्यपाल शिक्षक सम्मान प्राप्त होने के साथ-साथ उन्हें विभिन्न संगठन द्वारा भी सम्मानित किया गया है। जैसे हाल ही में उन्हें कलिंगा यूनिवर्सिटी द्वारा सम्मानित किया गया है तो उन्हें भारतीय दलित साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ राज्य इकाई द्वारा रायपुर में महात्मा ज्योतिबा फुले शिक्षा रत्न 2024 और बिलासपुर में आनंद सागर सेवा प्रवाह द्वारा कर्मवीर शिक्षक सम्मान 2024 भी मिल चुका है।

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