DAILY BALOD NEWS

EDITOR IN CHIEF – DEEPAK YADAV.9755235270

Advertisement

फुलेरा सजाकर किया महिलाओं ने तीजा का व्रत संपन्न, इस व्रत के लिए खास होता है मंडप

बालोद। तीन दिनों तक चलने वाले तीज पर्व का समापन हो गया है। निर्जला उपवास रहने के बाद सुहागिन महिलाओं ने फुलेरा सजा कर शिव पार्वती की पूजा अर्चना कर अपने व्रत को संपन्न किया। इस दौरान महिलाएं एक दूसरे के घर पर फुलेरा का दर्शन करने के लिए भी पहुंची । कहते हैं की व्रत तोड़ने के दौरान 3 से 5 या 7 घरों में महिलाओं को एक दूसरे के घर फुलेरा का दर्शन करने के लिए जाना पड़ता है। फुलेरा का तीजा के व्रत में विशेष महत्व माना जाता है। इस क्रम में ग्राम कुम्हालोरी (भरदाकला) में साहू परिवार की महिलाओं ने सामूहिक रूप से तीजा का व्रत किया और फुलेरा सजाकर पूजा अर्चना की।

पूजा में शामिल लिखेश्वरी साहू, टिकेश्वरी, नेमिन, सेवती, गायत्री, हथना, दीपिका (देवकी), ने बताया कि हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है. इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है. पूजा में जिस चीज के बिना मंडप अधूरा माना जाता है, वह है फुलेरा. हरतालिका तीज के व्रत और पूजा में फुलेरा का विशेष महत्व है. बिना फुलेरा बांधे तीज की पूजा अधूरी मानी जाती है. फुलेरा फूलों और पत्तियों से बनाया जाता है और इसे शिव-पार्वती की प्रतिमा के ऊपर सजाया जाता है. इसमें प्रयुक्त फूल और पत्तियां न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से शुभ मानी जाती हैं बल्कि यह प्रकृति की प्रचुरता और देवी पार्वती के प्रति समर्पण का प्रतीक भी हैं. मान्यता है कि फुलेरा के दर्शन मात्र से भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन सुखी-संपन्न बनता है.

फुलेरा क्या है?

फुलेरा दरअसल फूलों और पत्तियों की पांच लड़ियों से बना एक विशेष मंडपनुमा सजावट है, जिसे शिव और माता पार्वती की मूर्ति या शिवलिंग के ऊपर टांगा जाता है. मान्यता है कि यह भगवान शिव की पांच पुत्रियों जया, विषहरा, शामिलबारी, देव और दोतली का प्रतीक है. फूल और पत्तियां वातावरण को शुद्ध करती हैं और पूजा के समय दिव्यता बढ़ाती हैं. इनका चयन सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक महत्व के कारण भी किया जाता है. माना जाता है कि इन फूलों और पत्तियों से बने फुलेरे के दर्शन मात्र से ही दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है. तीज पर बांधा जाने वाला फुलेरा सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है. इसमें शामिल हर फूल और पत्ती का अपना महत्व है, जो शिव-पार्वती के पूजन को पूर्ण बनाता है.

You cannot copy content of this page