बालोद। गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम सिर्राभांठा में सिन्हा परिवार एवं समस्त ग्रामवासी के तत्वावधान में नवरात्रि के अवसर पर श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर सिन्हा परिवार द्वारा गांव में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में जोत भी प्रचलित किए गए हैं। तो वही भागवत के प्रवचनकर्ता वेदांत केसरी मानस मर्मज्ञ के स्वामी चंद्रकांत शर्मा हैं।जिनके द्वारा दर्शन शास्त्रों के जरिए भागवत की कथा को जोड़कर तर्कसंगत बातें श्रद्धालुओं को बढ़ाकर उदाहरण सहित समझाया जा रहा है। ताकि कथाओं को लेकर फैली भ्रांतियां दूर हो और लोगों को भगवान और भक्ति के प्रति वास्तविक ज्ञान हो। इस क्रम में विगत दिनों मीमांसा दर्शन के जरिए उन्होंने महाभारत की कथा को विचारों और तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया। लोगों के बीच इस बात की दुविधा दूर की गई कि महाभारत का युद्ध धर्म के बल पर लड़ा गया था कि अधर्म के बल पर। भले ही कई जगह महाभारत में छल देखने को मिलता है। पर जो भी हुआ था भगवान की इच्छा से हुआ था इसलिए इसे धर्म का युद्ध माना गया। इस कथा प्रसंग के दौरान कथावाचक ने कहा कि आज इंसान खुद को समझदार समझते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। इंसानों से ज्यादा जानकार जानवर होते हैं। प्रकृति और जानवर हमें कई ऐसे संकेत देते आई है जो भविष्यवाणियां तय करती है। जब विज्ञान का दौरा नहीं आया था तो जानवरों और प्रकृति के संकेतों के जरिए लोग अनुमान लगाते थे और भविष्यवाणी करते थे और ऐसी भविष्यवाणी सच भी होती थी। इसी के चलते धीरे-धीरे मान्यता बढ़ती गई। उन्होंने कहा कि इस संसार में कई ऐसे पशु पक्षियां हैं जिनके कार्यो ने मनुष्यों को नवाचार करने की प्रेरणा दी और मूल स्रोत जानवर ही रहे हैं। कथा प्रसंग के दौरान प्रवचनकर्ता स्वामी चंद्रकांत शर्मा ने कहा कि आज मनुष्य खुद के दुख से नहीं पड़ोसी के सुख से दुखी है। पर जानवरों में यह स्वभाव कभी नहीं होता। उन्होंने भारत माता की महत्ता पर भी प्रकाश डाला कि हमारे देश भारत को माता कहते हैं। लेकिन विदेश को माता का दर्जा नहीं दिया जाता है। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि मां वही होती है जो बच्चों को आगे बढ़ाती है। जो बंजर नहीं होती। हमारे देश में कहीं पर भी कुछ भी बो दीजिए वह उग ही जाएगा। चाहे वह पत्थर ही क्यों ना हो। महाभारत को काफी बारीक से समझाते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध के 12 नियम है। जिस पर महाभारत को लेकर कई लोगों के बीच दुविधा रहती है कि कौरवों ने पांडवों को या पांडव को कौरवों ने धोखा देकर युद्ध लड़ा। लेकिन यह सब भगवान की इच्छा से ही हो रहा था इसलिए इसे अधर्म नहीं बल्कि धर्म के बल पर लड़ा गया युद्ध माना जाता है। स्वयं श्री कृष्ण के आदेशों का पालन पांडव कर रहे थे। इसलिए भगवान की आदेशों को धर्म का पालन माना गया है। उन्होंने जानवरों और मनुष्य की तुलना करते हुए कहा कि अगर एकजुटता सीखनी है तो चींटियों से सीखिए। संयम और बचत की भाव सीखना है तो मधुमक्खी से सीखिए। मोबाइल नेटवर्क बाद में आया मकड़ी का जाल ने वैज्ञानिकों को रजिस्टर आविष्कार का ज्ञान दिया। इस आयोजन के दौरान नवरात्र के अलग-अलग दिन विभिन्न दर्शन के जरिए भागवत की कथाओं का तर्कसंगत उदाहरण देते हुए लोगों को विभिन्न दर्शनों का ज्ञान दे रहे हैं। इस अवसर पर मंगलवार को न्याय दर्शन, बुधवार पंचमी पर सांख्य दर्शन और वैशेषिक दर्शन को जोड़ते हुए कथा बताई गई। गुरुवार को योग दर्शन और शुक्रवार को वेदांत दर्शन पर कथा बताई जाएगी। अष्टमी 5 अप्रैल के दिन हवन पूजा होगी। साथ ही जीवन मुक्त कथा प्रसंग बताया जाएगा। 6 अप्रैल रविवार को गीता दर्पण होगा। इस श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के प्रमुख आयोजक समाज सेवी राजेश सिन्हा और उनका परिवार है। जिनके द्वारा हर साल दोनों ही नवरात्रि में विविध धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इस दौरान प्रमुख रूप से आयोजकों में मनभा सिन्हा, रानी सिन्हा,खिलावन, धनेश्वरी, कुँजेश्वर सिन्हा, ओमप्रकाश सिन्हा, खेमराज सिन्हा, अमृतानंद सिन्हा, याद राम सिन्हा, कुमार सिन्हा, तीजुराम साहू, रूपसिंह साहू, बलराम सिन्हा, नरेंद्र सिन्हा, अशोक धनकर, देवकुमार गजपल्ला, धनसिंह यादव, किशोर साहू, लीकेश्वर आदि का योगदान बना हुआ है।
दर्शनशास्त्र के ज्ञान के साथ ग्रामीणों को दी जा रही भागवत कथा की शिक्षा, सिर्राभांठा में हो रहा विशेष प्रकार का श्रीमद् भागवत का आयोजन
