64 योगिनी माता मंदिर बनाने 64 गांव में भिक्षा मांगेंगे गुरुदेव बीरेंद्र देशमुख, अलवर राजस्थान में बन रहा भव्य काली मां की मूर्ति, होगी लिमोरा में स्थापित



पत्रकार वार्ता में गुरुदेव ने बताया: संस्थान द्वारा अमृत आश्रय, मेंटल हॉस्पिटल, मुक बधिर आश्रम, इंटरनेशनल गुरुकुल भी संचालित किया जाएगा

बालोद। मोक्ष धाम सेवा संस्थान द्वारा गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम लिमोरा में 64 योगिनी माता का भव्य मंदिर बनाया जा रहा है। जहां पर भव्य मां काली की मूर्ति स्थापित होगी। एक ही पाषाण से तराश कर मूर्ति बनाई जा रही है। जिसका निर्माण अलवर राजस्थान में हो रहा है। तो वही बाहर से आए कारीगर और कलाकार मंदिर निर्माण में जुटे हुए हैं। कुछ सालों के भीतर लिमोरा, बालोद जिले में विशेष धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात होगा। वहीं निर्माणाधीन 64 योगिनी माता मंदिर के लिए संस्थान के लोग 64 गांवों में भिक्षा भी मांगेंगे। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। संस्थान के प्रमुख नाड़ी वैद्य गुरुदेव बीरेंद्र देशमुख स्वयं गांव गांव में पहुंचकर मंदिर के लिए भिक्षा मांगेंगे। इस मंदिर की खासियत यह होगी कि यहां कोई भी दान पेटी नहीं रहेगी। जिन श्रद्धालुओं को सहयोग करना होगा वे यहां अनवरत चलने वाले भोजन भंडारा में या मंदिर निर्माण में दे सकते हैं। इसके अलावा भविष्य में संस्थान द्वारा अमृत आश्रय, मुक बधिर आश्रय, मेंटल हॉस्पिटल, इंटरनेशनल गुरुकुल भी संचालित होगा। मोक्षधाम सेवा संस्थान ग्राम लिमोरा के प्रमुख गुरुदेव बिरेंद्र देशमुख ने बताया कि लिमोरा में छत्तीसगढ़ के प्रथम चौसठ योगिनी माता मंदिर बनने जा रहा है। जहां दान पेटी नहीं रहेगी। भगवान देता है लेता नहीं है, इस मंदिर के लिए भिक्षा मांगी जाएगी जिससे मंदिर में सभी का अंश लगेगा। इसके अलावा संस्था द्वारा जिले में कहीं उचित जगह देखकर मेंटल हॉस्पिटल भी बनाया जाएगा। जो माताएं बहने विक्षिप्त अवस्था में इधर-उधर घूमते रहते हैं उसे हमारी टीम द्वारा लाकर उसका इलाज करा कर उसे सुरक्षित उनके घर पहुंचाया जाएगा। इसके लिए कुछ दानदाताओं की ओर से 15-15 लाख का 2 एंबुलेंस भी मिल चुका है। इसके अलावा अमृत आश्रय भी बनाया जाएगा। मुक बधिर आश्रम भी खुलेगा, इंटरनेशनल गुरुकुल भी यहां बनाया जाएगा। जहां उर्दू भाषा को छोड़कर सभी भाषाओं में पढ़ाई कराई जाएगी। इस तरह के निर्माण पूरे छत्तीसगढ़ में कहीं पर भी नहीं है। पत्रकार वार्ता में
अध्यक्ष दर्शन जैन गुण्डरदेही, मदन निषाद गुण्डरदेही, कोषाध्यक्ष शिवेंद्र साहू राजनांदगांव, सचिव कुलेश्वर साहू गुण्डरदेही, सदस्य निजानंद चंद्राकर, सदस्य चिंताराम चंद्राकर लिमोरा, सदस्य नीलकंठ पटेल, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष शिवेंद्र कुमार साहू लिमोरा, ग्राम विकास समिति उपाध्यक्ष विनोद कुमार चंद्राकर आदि मौजूद रहे।

64 योगिनी का ही मंदिर क्यों बनाने का लिया गया निर्णय

प्रेस वार्ता में प्रमुख गुरुदेव बीरेंद्र देशमुख ने बताया कि यह एक आस्था का केंद्र बनेगा । हिंदू धर्म और सनातन के हिसाब से मान्यता है कि कोई भी जब पूजा पाठ होता है तो सबसे पहले 64 योगिनी की पूजा होती है। इसके बिना किसी की पूजा नहीं होती। मान्यता यह भी है कि जब 64 योगिनी की पूजा होती है तो सभी शक्तियां, ब्रह्मांड की देवी देवता पूजा और प्रार्थना को स्वीकार करते हैं। ऐसा हिंदू सनातन धर्म में मान्यता है इसलिए हम भव्य 64 योगिनी मंदिर का निर्माण करने जा रहे हैं जिसका काम जारी है। इस मंदिर में दान पेटी नहीं होगी क्योंकि प्रभु, परमात्मा कुछ लेता नहीं, सबको देता है। जो भी भक्त आएंगे दर्शन करने, प्रार्थना करेंगे, अर्जी लगाएंगे प्रसाद पाएंगे और जाएंगे। 64 योगिनी का शास्त्रों के अनुसार काफी महत्व है। जो चार दिशा होती है प्रत्येक दिशा में 16 योगिनी का वास होता है। इसलिए सभी दिशा में धूप हवन दीप दिखाकर पूजा की जाती है। हल्दी सुपारी रखकर ही 64 योगिनी की पूजा कर कोई भी अनुष्ठान की शुरुआत की जाती है। 64 योगिनी बहुत फलदाई है।

कुछ लोग अध्यात्म को आडंबर बना चुके हैं

कई जगह यह देखने को मिल रहा है। कई लोग जैसे मूर्ति पूजा करते हैं दुर्गा, गणेश स्थापित करते हैं और हमारे चंदा से अंत के दिन में डीजे बजाते हैं शराब पीकर नाचते हैं। यह गलत बात है। आज सनातन धर्म केवल हिंदुओं के कारण क्षणभन हो रहा है। लोगों को सही रास्ते पर लाना बहुत जरूरी है। बीरेंद्र देशमुख ने कहा वैसे तो मैं 12 साल उम्र से आश्रम चल रहा हूं। गृहस्थ जीवन के साथ ही मैं यह काम कर रहा हूं। मैं कोई साधु नहीं हूं। आयुर्वेद के क्षेत्र से जुड़ा हूं। नाड़ी वैद्य हूं और सेवा का कार्य करते आ रहा हूं। धीरे-धीरे भक्तों का सहयोग मिला और कारवां चला गया। ग्राम भेड़ी में कामधेनु मंदिर और काली मंदिर है वहां से संचालन होता है। हमें जिले में केंद्र बिंदु की तलाश थी। बड़े स्तर पर कार्य करना था। इसके लिए हमने ग्राम लिमोरा को चुना है। गांव वाले भी इसमें पूरा सहयोग कर रहे हैं।

इस तरह से आया विचार

उन्होंने कहा कि हिंदुओं को सनातन से जोड़ना है। लोग धर्म के प्रति सचेत रहे। सच्ची सेवा प्रार्थना क्या है वे जाने इस उद्देश्य से यह मंदिर बनाया जा रहा है। मोक्ष धाम सेवा संस्थान के ट्रस्टी में 13 लोग है। बाकी छत्तीसगढ़ से लगभग चार लाख लोग जुड़ चुके हैं। छत्तीसगढ़ से बाहर भी 6 से 7 लाख लोग जुड़ चुके हैं। मंदिर निर्माण में सामान्य लोगों से हम सहयोग ले रहे हैं। कोई नेता से सहयोग नहीं ले रहे हैं। क्योंकि कोई बीजेपी कांग्रेस नहीं हमारे लिए सब बराबर है। हमें राजनीति से कोई मतलब नहीं है। हम इस मंदिर को दान और भिक्षा मांग कर बनाएंगे। 64 गांव जाकर झोली लटका कर भिक्षा मांग कर बनाएंगे। लोग जैसा भी दान करें उससे ही हम इस मंदिर को बनाएंगे और दान करने वालों को पुण्य मिलेगा।

नहीं होगा कोई वीआईपी कल्चर

संस्था के संस्थापक गुरुदेव बिरेंद्र देशमुख ने बताया कि मंदिर को वास्तु दृष्टिकोण से ऐसा बनाया जा रहा है कि जो भी व्यक्ति यहां आएगा उसे अपने आप ऊर्जा मिलने की अनुभूति होगी। यहां पर सभी तरह की सुविधाएं होगी। मंदिर में कोई भी श्रद्धालु जाकर आराम से दर्शन कर सकते हैं। यहां कोई वीआईपी कल्चर नहीं होगा। इसके पीछे का कारण बताते हैं कि भगवान श्रद्धालुओं को बुलाता है और जब जब जिस किसी को वे बुलाते हैं वही व्यक्ति मंदिर तक पहुंच पाता है। ऐसे में वीआईपी कल्चर हम यहां नहीं रखेंगे।

दो से ढाई साल में बनकर हो जाएगा तैयार

पत्रकार वार्ता में गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख ने बताया कि मंदिर का निर्माण बहुत तेज गति से किया जा रहा है, तीन माह हुए प्रारंभ और बहुत सारा बन चुका है अधिक से अधिक दो से ढाई वर्ष में यह मंदिर बनकर पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। इसका कारण है कि दानदाता अब सामने आने लगे हैं और भिक्षाटन का कार्य भी हम शीघ्र प्रारंभ करने वाले हैं। ऐसे में नहीं लगता कि इस मंदिर को पूरा करने में ज्यादा वक्त लगेगा।

ओडिशा व आंध्र प्रदेश से आए हैं कारीगर

गुरुदेव बिरेंद्र देशमुख ने जानकारी दी की मंदिर का निर्माण उड़ीसा और आंध्र के कारीगरों की देखरेख में बन रहा है मंदिर को नक्काशी युक्त बनाया जाएगा ताकि दूर से ही मंदिर खूबसूरत दिखाई दे लगभग 8000 स्क्वायर फीट में यह मंदिर बनेगा। मंदिर को भव्य बनाने की कोशिश की जा रही है।

प्रतिदिन चलेगा अनवरत भंडारा

गुरुदेव बिरेंद्र देशमुख ने बताया कि मंदिर निर्माण के बाद यहां पर प्रतिदिन अनवरत भंडारा चलता रहेगा। जब भी श्रद्धालु जिस समय भी यहां पहुंचेंगे उन्हें भंडारे में भोजन उपलब्ध मिलेगा। यही नहीं यहां दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की भी व्यवस्था होगी। गुरुदेव ने आगे बताया कि जिले के किसी भी स्थल पर एक मेंटल हॉस्पिटल बनाएंगे, जहां विक्षिप्त अवस्था में घूम रहे लोगों को हमारे समिति के लोग ऐसे लोगों को लेकर के आएंगे और पूर्ण इलाज के बाद उन्हें उनके परिवार को सौंप देंगे। संस्था द्वारा अमृत आश्रम व मुखबधिर आश्रय भी बनाया जाएगा। जहां ऐसी पीड़ितों को लाकर रखेंगे और उसकी संपूर्ण इलाज करेंगे।

मंदिर में होगी काली माता, कामधेनु व 64 योगिनी माता की मूर्ति

गुरुदेव बिरेंद्र देशमुख ने बताया कि इस मंदिर में काली माता व कामधेनु की मूर्ति भी लगाई जाएगी। इसके अलावा मंदिर के चारों तरफ 64 योगिनी माता की मूर्ति भी रखी जाएगी। मंदिर की नक्काशी कुछ इस तरह की जा रही है कि यह दूर से ही स्पष्ट व आकर्षक दिखाई देगा। इस कार्य के लिए ग्राम पंचायत लिमोरा द्वारा पूर्ण सहयोग मिल रहा है।

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