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बालोद कॉलेज में हुआ जनजाति गौरव स्मृति कार्यक्रम का आयोजन

बालोद। शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय बालोद में बुधवार को जनजाति गौरव स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में भोजराज नाग, सांसद ,लोकसभा कांकेर की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जे. के. खलखो ने किया। विशिष्ट अतिथि में पवन साहू, जिलाध्यक्ष ,भाजपा जिला बालोद एवं चंद्रेश ठाकुर, जन संपर्क अधिकारी जिला बालोद उपस्थित रहे। सह वक्ता के रूप में आमंत्रित कृष्णा साहू, जिला सचिव वनवासी विकास समिति एवं जिला संयोजक जनजाति गौरव स्मृति कार्यक्रम उपस्थित रहे। अन्य अतिथियों में मोरध्वज साहू पूर्व सांसद प्रतिनिधि एवं भूतपूर्व छात्र , प्रेम साहू ,सुरेश निर्मलकर, सुरेंद्र देशमुख एवं अन्य समाजसेवी की कार्यक्रम में उपस्थिति रही ।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती, मां शारदा, वीरांगना रानी दुर्गावती भगवान बिरसामुंडा ,शहीद वीर नारायण सिंह ,शहीद गैंदसिंह नायक की तैलचित्र की पूजा अर्चना व माल्यार्पण कर, सस्वर दीप मंत्रोच्चार सहित दीप प्रज्वलित कर हुआ। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. जसराम नायक ने कार्यक्रम के प्रस्तावना में बताया । जनजाति समाज का गौरवशाली अतीत- ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान विषय पर आधारित यह जनजाति गौरव स्मृति कार्यक्रम उच्च शिक्षा विभाग संचालनालय रायपुर छ.ग. एवं हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के निर्देशानुसार आयोजित है।दिनांक 5 अक्टूबर 2024 रानी दुर्गावती के 500वीं जयंती से 15 नवंबर 2024 भगवान बिरसा मुंडा के 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है ।

जनजातीय नायकों के स्वर्णिम योगदान को हम सबको ,युवा पीढ़ी को जानने और गौरव की अनुभूति करने कार्यक्रम का उद्देश्य बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. जे. के. खलखो ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के स्थापना एवं उपलब्धियों का जानकारी दिए ।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित चंद्रेश ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा जनजाति समाज अंग्रेजों की दासता स्वीकार न कर , क्रांति की शंखनाद किये ।अंग्रेजों के खिलाफ प्रथम व सर्वाधिक लड़ाई आदिवासियों द्वारा लड़ी गई ।जनजातियों के द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में किए योगदान पर प्रकाश डालें। जनजाति समाज प्रकृति के रक्षक होते हैं। सहकारिता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण आदिवासी समाज से मिलना बताया। कार्यक्रम में सह वक्ता के रूप में आमंत्रित श्री कृष्णा साहू ने कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी उन्होंने इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड से पहले सन 1913 में मान गर्दा की घटना को बड़ा बताया लेकिन इस बड़ी घटना को इतिहास में स्थान नहीं दिया गया ।जनजाति को अच्छा बताने की कोशिश भी नहीं की गयी ।श्री साहू ने तिलकामांझी मांझी को जनजाति समाज से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन करने वाले बताया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित श्री पवन साहू ने कहा कि जनजाति समाज प्रकृति के समीप रहने व साथ जीने वाला बताया हमें प्रकृति को बचाने के लिए प्रयास करने करना चाहिए ।जल के अधिक दोहन करने पर चिंता प्रकट करते हुए व्यर्थ उपयोग न कर संचय करने की बात कही। जनजाति समाज प्रकृति का संरक्षण करने वाले और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने वाली जाति बताएं साथ ही जनजाति समाज के नायकों के योगदानों के बारे में बताएं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित भोजराज नाग ने अपनी उद्बोधन में जनजाति संस्कृति को विशिष्ट व अनूठी बताया ।जनजाति नायक जनता व देश के कल्याण के लिए शहीद होना बताया। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जनजाति समाज का सनातन काल से जुड़ना बताया।

उन्होंने बताया भगवान राम को आस्था व निश्छल प्रेम के कारण झूठे बेर खिलाने वाली जनजाति समाज की महिला सबरी ही थी ।जनजाति समाज का इतिहास इतना गौरवशाली है उनमें इतनी शक्ति है जो देवी देवताओं को भी अदालत के पेशी में लाने की बात कही हैं।आदिवासी जल, जंगल, जमीन की लड़ाई लड़ी। वीर नारायण सिंह को जनता की सेवक बताया जो अपनी जमीदारी के जनता को अकाल में भूख मरते देखकर गोदाम से अनाज निकालकर वितरण किया। परलकोट विद्रोह के शहीद गैंदसिंह नायक, भूमकाल विद्रोह के शहीद गुंडाधूर जनजाति नायक जो बस्तर के शोषित व पीड़ित लोगों के लिए अपने प्राण निछावर किया। जनजाति समाज के लोग जो बुद्धदेव कहते हैं वह भगवान शंकर है जो जनजाति समाज के बुजुर्ग का कहे जाते हैं। जनजाति गौरव स्मृति कार्यक्रम के तहत छात्र -छात्राओं को रानी दुर्गावती के जीवन वृत्त और कोम राम भी पर बनी फिल्म का प्रदर्शन महाविद्यालय में किया गया।
कार्यक्रम में जनजाति गौरव स्मृति कार्यक्रम के अंतर्गत हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र -छात्राओं को अतिथियों के द्वारा प्रशस्ति -पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।प्रो. जी.एन.खरे के द्वारा कार्यक्रम के अंत में आभार प्रकट किया गया। कार्यक्रम में अतिथियों को महाविद्यालय की ओर से पौधा लगे गमला देकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का सफलता पूर्वक मंच संचालन डॉ .राघवेश पाण्डेय एवं डॉ. दीपाली राव के द्वारा किया गया। महाविद्यालय के इस सफलतापूर्वक आयोजन के सह- संयोजक प्रो. रितु पिस्दा एवं सभी प्राध्यापक ,अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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