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दशहरा विशेष: 19 साल की उम्र से निभा रहे हैं रामलीला में “दशानन” का किरदार, नाम ही पड़ गया इनका “रावण”,रामायण के भी हैं प्रेमी, प्रतिदिन करते हैं पाठ, मुखाग्र याद है श्लोक और भावार्थ

कंटेंट: सुप्रीत शर्मा, तस्वीरें: दीपक यादव बालोद । आज विजयदशमी के पर्व पर हम एक ऐसे रामायण प्रेमी बुजुर्ग 77 वर्षीय कोमल देशमुख के बारे में बता रहे हैं जो रामलीला में 19 साल की उम्र से रावण का किरदार निभाते आ रहे हैं। उनकी कलाकारी और अभिनय को देख कर उन्हें युवा उम्र से ही उनके मूल नाम कोमल और बिझवार के बजाय लोग रावण के उपनाम से जानते हैं। और इसी नाम से पुकारे जाते हैं। वे ग्राम जगन्नाथपुर के रहने वाले हैं। जो खेती किसानी भी करते हैं । 77 वर्ष के इस उम्र में भी उनमें खेती किसानी के साथ भाव भक्ति का जज्बा बरकरार है। तो वहीं प्रतिदिन वे अपने घर पर सुबह-शाम रामायण का पाठ भी करते हैं। उन्हें रामायण के कई श्लोक और उनके भावार्थ मुखाग्र याद है। रामलीला के दौरान रावण के संवाद भी संस्कृत में ही बोलते हैं । जब हम उनसे उनके जीवन के पहलू के बारे में जानने के लिए पहुंचे तो वे भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि उनका जन्म 13 जुलाई 1947 को हुआ। पांचवी तक ही पढ़े हैं। उसके बाद उनका मन खेती में लग गया। पढ़ाई छोड़ दी। उनके पिता जी जब वे छोटे थे तभी गुजर गए। उन्होंने कहा माता के आशीर्वाद से ही मैं खेती किसानी करता रहा। 19 वर्ष से ही मैं रामायण पाठ करता रहा । पांचवी तक पढ़े होने के बावजूद वे बिना किसी भाषा रुकावट के रामायण पाठ करते आ रहे हैं। उन्हें लगभग सभी श्लोक याद है और रामलीला जब गांव में होती है तो वे ही रावण का किरदार निभाते हैं और अपना संवाद संस्कृत में बोलते हैं। उनके इस किरदार के लोग इतने घायल हैं कि उनका नाम ही रावण कर दिया गया है। उनके खेत, उनके घर को भी रावण उपनाम से जाना जाता है। उनका परिवार भी रावण का परिवार कहलाता है।

पढ़ाई छूटी पर रामायण से रिश्ता नहीं टूटा

रामायण पढ़ने की भी उनकी आदत बचपन से हैं। वे कहते हैं मेरे पिताजी जन्म के समय मेरे लिए रामायण छोड़ गए थे। पिताजी नहीं रहे तो जब से मैंने पढ़ाई छोड़ी तब से मैं रामायण पढ़ना शुरू किया। चार पांच चौपाई रोज पढ़ता हूं। जब तक मुझ में श्रद्धा और राम का सहारा है। तब तक मैं रामायण पढ़ता रहूंगा। महाभारत, सुख सागर आदि ग्रंथ से भी मुझे प्रेम है। उन्हें भी मैं पढ़ता रहता हूं।

रामायण से लेनी चाहिए यह शिक्षा

रामायण से उन्होंने सिख बताया कि रामायण मानव का धर्म है। सीता जी ने अपने पति की सेवा की। इसी प्रकार से सीता का बात मानकर सभी महिलाएं सीता के रूप बने तो या बैकुंठ ही है। राम के आधार से एक ही पत्नी में आप पूरा विश्वास और प्रेम रखें तो यह वही राम ही पुरुषोत्तम राम है। यही रामायण का आधार है।

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