बालोद। आजादी के इतने वर्षों बाद भी आज तक देवपांडुम गांव में पक्की सड़क नहीं बन पाई है। आज भी गिट्टी मुरूम की सड़क में लोग चलने को मजबूर हैं।शनिवार को देवपांडूम के ग्रामीण जन जनपद सदस्य संजय बैस के पास अपने गांव पहुंच मार्ग की समस्या से अवगत कराया। इसके बाद स्वयं जनपद सदस्य संजय बैस मौके पर निरीक्षण करने के लिए पहुंचे। जनपद सदस्य संजय बैस ने कहा जिले में पर्यटन स्थल के नाम से प्रशिद्धि प्राप्त देवपांडूम जिसे बालोद के राजा के द्वारा पूरे जंगल में देव स्थापना किए थे। जिसके कारण गांव नाम देवपांडूम का पड़ा है। पूरे जिले में पर्यटन का अदभुत नजारा यहां दिखता है। लोग यह घूमने भी परिवार सहित आते है। पर इस गांव में पहुंच मार्ग का हाल बेहाल है। ग्रामीण जन, ग्राम पटेल, ग्राम पंचायत के पंच अपनी समस्या लेकर क्षेत्र के जनप्रतिधि जनपद सदस्य संजय बैस के पास पहुंचे और अपनी बात रखी। ग्रामीण जनों के बाद को गंभीरता से लेते हुए संजय बैस, युवा नेता इमरान खान, मनीष जेठवानी के साथ देवपांडूम पहुंचे। लोगो के साथ सड़क का निरीक्षण किए। संजय बैस ने बताया की सड़क का स्थिति बहुत ही जर्जर है। ककरेल तक प्रधानमंत्री की सड़क का निर्माण हो चुका है। पर देवपांडूम की सड़क मुख्यमंत्री सड़क योजना में आता है। हम ग्रामीण जन के साथ इस क्षेत्र की मंत्री, कलेक्टर और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से अपनी वाजिब मांग को रखेंगे। शीघ्र ही हमारी पर्यटन स्थल पहुंच मार्ग का निर्माण हो और और आज ही सभी से बात करेंगे। जरूरत पड़ने पर सड़क निर्माण के लिए आंदोलन भी करना पड़े तो ग्रामीण जन के साथ आंदोलन भी करेंगे। ग्राम पटेल रामाधीन कुरेटी ने बताया वर्षो से इस सड़क के लिए जगह जगह आवेदन दे रहे है। पर इसका निराकरण नहीं हुआ। हम अपनी बात और समस्या लेकर संजय बैस के पास गए थे और आज देखने भी पहुंचे। हम सभी ग्रामीण जन अपनी गांव के विकास के लिए बैस जी के साथ आंदोलन के लिए तैयार है। सड़क निरीक्षण के दौरान ग्राम पटेल रामाधीन कुरेटी पंच कीर्तन बाई सरजू राम गैंदू राम धरम सिंग राजेंद्र कुमार मिल्ला धुर्वे जगन कुमार मांगाहु राम लखन लाल गणेश्वरी बाई मुन्नी बाई देवकी बाई चोवा बाई उपस्थित रहे।
पांडवों का इकलौता मंदिर होने का दावा
ज्ञात हो कि इस गांव में पहाड़ी के ऊपर पंडवान डोंगरी नाम से पर्यटन स्थल है। जिसे छत्तीसगढ़ में पांडवों का इकलौता अनोखा मंदिर होने का दावा किया जाता है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि बारिश नहीं होने पर लोग यहां पूजा करने के लिए आते हैं। आस्था और अनोखी कहानी की वजह से इस जगह को पर्यटन स्थल के रूप में पहचान मिल चुकी है। हालांकि यहां शासन की पर्यटन विभाग की योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं दिख रहा है। और यही वजह है कि आज तक इस गांव को जाने वाली 2 किलोमीटर सड़क पक्की नहीं बन पाई है।
