DAILY BALOD NEWS

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ऐसा जीव मिला बालोद जिले में जिसकी होती है सबसे ज्यादा तस्करी, इस दुर्लभ प्रजाति के जीव का अस्तित्व धरती पर लगभग 60 मिलियन सालों से है

बालोद। बालोद ब्लॉक के कन्नेवाड़ा के पास पर्रेगुड़ा के जंगल में पैंगोलिन नाम का दुर्लभ जीव मिला है। जो अक्सर घने जंगलों में पाया जाता है।

अंदाजा है कि यह बारिश के बाद जंगल से निकलकर गांव के पास पहुंचा तब ग्रामीणों की इस पर नजर पड़ी। फिर ग्रामीणों ने जागरूकता दिखाते हुए उक्त जीव को वन विभाग को सुपुर्द किया।

वन विभाग ने जांच के बाद वापस छोड़ा जंगल में

02.05.2023 को सुबह 6.00 बजे बालोद वन परिक्षेत्र, परिसर – कन्नेवाड़ा के अंतर्गत ग्राम पर्रेगुड़ा से उक्त 1 नग मादा सालखपरी (पेंगोलीन) सुरक्षित पकड़कर निस्तार/बंसोड़ डिपो करहीभदर लाया गया.

शासकीय पशु चिकित्सक द्वारा सालखपरी की स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। परीक्षण में स्वस्थ पाने के उपरांत वनमंडलाधिकारी बालोद के निर्देशन व उपस्थिति मे वन परिक्षेत्र अधिकारी बालोद एवं सहायक वृत्त बरही के सभी स्टॉफ के साथ बालोद वनमंडल के वनक्षेत्र में सुरक्षित छोड़ा गया।

जानिए इस दुर्लभ जीव के बारे में

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के मुताबिक, दुनियाभर में वन्य जीवों की अवैध तस्करी के मामले में अकेले 20 फीसदी योगदान पैंगोलिन का है। यह एक ऐसा जानवर है, जिसकी तस्करी पूरी दुनिया में सबसे अधिक हो रही है। खासतौर पर चीन में इस जानवर का अधिक डिमांड है। क्योंकि इसके खाल और मांस से पारंपरिक दवाईयां बनाई जा रही हैं।सांप, छिपकली की तरह दिखने वाला पैंगोलिन स्तनधारी जीवों की श्रेणी में आता है। दशकों से इस जीव की दुनियाभर में तस्करी हो रही है। इस जीव से बनने वाली दवाएं काफी महंगे दामों पर बिकती हैं। हालात ऐसा हो गया है कि अब पैंगोलिन विलुप्त होने वाले जीवों की श्रेणी में पहुंच गए हैं।बता दें कि पैंगोलिन शर्मीले प्रवृति का जीव है, जो धरती पर लगभग 60 मिलियन सालों से पाए जाते हैं। ये जीव चींटियां खाकर गुजारा करते हैं। शरीर पर कड़ी और सुनहरी-भूरी स्केल्स वाले इन जीवों का मांस भी खूब शौक से खाया जाता है। एक किलो पैंगोलिन के मांस की कीमत करीब 27,000 रुपये तक होती है। वेट मार्केट में दूसरे कम कीमत के सस्ते जीवों के साथ पैंगोलिन नहीं बिकता, बल्कि महंगे रेस्त्रां ही इसे बेचते या पकाते हैं।


वहीं इस जीव का दूसरा सबसे बड़ा इस्तेमाल ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन बनाने में होता है। पैंगोलिन के मांस से अलग दवाएं बनती हैं, तो इसके स्केल्स से अलग किस्म की दवा बनती हैं। हर दवा का उपयोग अलग बीमारी के लिए होता है। पैंगोलिन के स्केल्स यानी शरीर की ऊपरी कड़ी परत से बनने वाली दवाएं चॉकलेट के बार की तरह दिखती हैं, लेकिन काफी कठोर होती हैं। इसे गर्म पानी या अल्कोहल में घोलकर पिया जाता है।

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