दीपक देवदास, गुरुर। शासन की नई योजना के तहत विभिन्न गौठानों में रोजगार के कई अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस दिशा में नई तकनीकों का इस्तेमाल करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
तकनीक का प्रशिक्षण देकर युवाओं और स्व सहायता समूह की महिलाओं को नए नए रोजगार से जोड़ा जाएगा। इस क्रम में ब्लॉक में जल्द ही एलोवेरा लेमन ग्रास आदि की खेती भी होगी और उससे विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाएंगे। जिसकी बिक्री मार्केट में होगी। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के सहयोग से विभिन्न ग्रामीण तकनीकी केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसकी तैयारी में जनपद पंचायत के सीईओ राजेंद्र पडौती सहित अन्य प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। उन्होंने एक मुलाकात में बताया लेमन ग्रास मशीन स्थापित किया जाएगा। जिससे आइल निकाला जाएगा। इसकी खेती भी होगी। तो साथ ही एलोवेरा की खेती भी होनी है। 34 एकड़ में खेती की शुरुआत की जानी है। 1 एकड़ में 11 सौ पौधे एलोवेरा के लगाए जाएंगे। इससे किसानों को भी फसल चक्र परिवर्तन की दिशा में प्रोत्साहन दिया जाएगा। ताकि वह रबी सीजन में धान के बजाय इसकी खेती की ओर आकर्षित हो सके। आमतौर पर लगभग दो लाख से ऊपर की कमाई करने वाले किसान ही एलोवेरा की खेती की ओर आगे बढ़ सकते हैं। इसके लिए किसानों को भी जागरूक किया जा रहा है। साथ ही लेमनग्रास के फायदे भी बताए जाएंगे। और इस खेती से किसानों को जोड़ा जाएगा। क्षेत्र में फिलहाल लेमन ग्रास नही है पर इसके मशीन से नीलगिरी का भी आइल निकाला जाएगा। लेमनग्रास मशीन से नीलगिरी की आयल भी निकाले जा सकेंगे। इसके लिए चीटौद से कोंडागांव तक पत्ता खरीदने का कार्य गुरुर से भी होगा।
केले के तने के रेशा से बनाएंगे धागा
वही नवाचार की दिशा में केले का भी इस्तेमाल किया जाएगा जो आमतौर पर लोग ज्यादा जानते नहीं हैं। केरल में इस तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल होता है। जहां केरल में केले के रेशे से कपड़े तक बनाए जाते हैं। केले के तने में जो रेशा निकलता है वह बिल्कुल जुट जैसा होता है। उससे धागा बनाया जाएगा। धागों से विभिन्न कपड़ा उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा विभिन्न समूहों को साबुन आदि के छोटे-छोटे लघु उद्योग से भी जोड़ा जाएगा। इससे गुरुर ब्लॉक के गौठान में आर्थिक समृद्धि आएगी। नए नए रोजगार के अवसर मिलेंगे। ग्रामीणों को गांव में ही काम मिलेगा। उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अब जरा समझिए फायदे
लेमन ग्रास तेल का इस्तेमाल करने से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते हैं। लेमन ग्रास तेल कई सारे पोषक तत्वों के गुणों से भरपूर होता है। साथ ही लेमन ग्रास तेल में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य से जुड़ी कई सारी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। लेमन ग्रास तेल तनाव और चिंता को दूर करने में मदद करता है। साथ ही ये शरीर में होने वाले सूजन को भी कम करने में मदद करता है। नियमित रूप से लेमन ग्रास तेल का इस्तेमाल करने से दाद-खाज और खुजली जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। सूजन को कम करने के लिए भी इस्तेमाल होता है। क्योंकि लेमन ग्रास तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है, जो शरीर में होने वाली सूजन को कम करने में मदद करता है। साथ ही ये अर्थराइटिस में होने वाली समस्याओं को कम करने में मदद करता है।
एलोवेरा के फायदे
ऐलोवेरा, जिसे घृतकुमारी या ग्वारपाठा भी कहा जाता है, कई तरह की स्वास्थ्य एवं सौंदर्य समस्याओं का अचूक उपाय है। आयुर्वेद में इसे घृतकुमारी के रूप में महाराजा का स्थान दिया गया है एवं औषधि की दुनिया में इसे संजीवनी भी कहा जाता है। इसकी 200 जातियां होती हैं, परंतु प्रथम 5 ही मानव शरीर के लिए उपयोगी हैं।जिसमें बारना डेंसीस नाम की जाति प्रथम स्थान पर है। इसमें 18 धातु, 15 एमीनो एसिड और 12 विटामिन मौजूद होते हैं। इसकी तासीर गर्म होती हैं। यह खाने में बहुत पौष्टिक होता है। इसे त्वचा पर लगाना भी उतना ही लाभप्रद होता है। इसकी कांटेदार पत्तियों को छीलकर एवं काटकर रस निकाला जाता है। 3-4 चम्मच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में शक्ति व चुस्ती-स्फूर्ति बनी रहती है। बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग, पेट की खराबी, जोड़ों का दर्द, त्वचा की खराबी, मुंहासे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वचा, झुर्रियों, चेहरे के दाग-धब्बों, आंखों के काले घेरों, फटी एड़ियों के लिए यह लाभप्रद है वहीं दूसरी तरफ यह खून की कमी को दूर करता है तथा शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। जलने पर, अंग कहीं से कटने पर, अंदरूनी चोटों पर एलोवेरा अपने एंटी बैक्टेरिया और एंटी फंगल गुण के कारण घाव को जल्दी भरता है। यह रक्त में शर्करा के स्तर को बनाए रखता है। बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग, पेट की खराबी, जोड़ों का दर्द, त्वचा की खराबी, मुंहासे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वचा, झुर्रियों, चेहरे के दाग-धब्बों, आँखों के काले घेरों, फटी एडियों के लिए यह लाभप्रद है। इसका गूदा या जैल निकालकर बालों की जड़ों में लगाना चाहिए। बाल काले, घने-लंबे एवं मजबूत होंगे।
इस तरह हो खेती
एलोवेरा की खेती के लिए सबसे जरूरी ये है कि खेत में ज्यादा नमी न हो, साथ ही पानी का ठहराव खेत में न हो. एलोवेरा के लिए रेतीली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. हालांकि, इसकी खेती दोमट मिट्टी में भी होती है लेकिन रेतीली मिट्टी में इसके बेबी प्लांट ज्यादा संख्या में निकलते हैं. समय समय पर खेत की सफाई जरूरी है।

