DAILY BALOD NEWS

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भारत-पाक सीमा पर बर्फबारी के बीच करते थे सुरक्षा, कायम रहा देश सेवा का जज्बा, गांव लौटे तो आर्मी के जवान के स्वागत में जुटे भीमकन्हार के ग्रामीण

17 साल देश की सेवा कर लौटा आर्मी का जवान, ग्रामीणों ने किया सम्मान

जवान ने कहा गांव के अन्य युवाओं को भी देंगे ट्रेनिंग

बालोद। ग्राम भीमकन्हार में 17 साल तक आर्मी में पदस्थ रह कर देश की सेवा कर लौटे जवान महेंद्र दास साहू का ग्रामीणों ने सम्मान समारोह रखा था। जो देश भक्ति माहौल से परिपूर्ण रहा। सेवानिवृत्त होकर लौटने के अवसर पर उनका लोगों ने आत्मीयता से स्वागत सम्मान किया। यह आयोजन विगत दिनों ग्रामीणों व युवा लक्ष्मी उत्सव समिति के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था। जिसके मुख्य अतिथि सरपंच पोषण लाल साहू थे। अध्यक्षता जनपद सदस्य खगेश ठाकुर ने किया। विशेष अतिथि ग्राम पटेल हीरा राम देवहारी, जनक लाल साहू, पीलू राम ठाकुर, गणेश राम देवांगन सहित अन्य प्रमुख मौजूद रहे। इस दौरान सेवानिवृत्त आर्मी के जवान महेंद्र दास साहू पिता जनक लाल साहू ने ड्यूटी के दौरान के अपने अनुभव को भी साझा किया।

उन्होंने कहा कि वे गांव के अन्य युवाओं, जो आर्मी में जाने की तैयारी कर रहें, उन्हें ट्रेनिंग देंगे। उनसे प्रेरित होकर 2011 से ही गांव के ही लोकेश ठाकुर और गुलशन साहू आर्मी में चयनित हुए हैं। इसके अलावा गांव से करीब 8 लोग आर्मी में है। बीएसएफ में भी 12 लोग हैं। सीआरपीएफ में 5 लोग तो कुछ युवा पुलिस में भी भर्ती हुए हैं। अपनी देश सेवा की यात्रा का जिक्र करते हुए महेंद्र दास साहू ने बताया कि वे 2004 में आर्मी में भर्ती हुए थे। शुरुआती पोस्टिंग श्री गंगा नगर में हुई। वे पाकिस्तान के बॉर्डर में भी कई सालों तक ड्यूटी देते रहे। जहां बर्फबारी के बीच देश की सीमा पर चौकसी करना चुनौती भरा काम होता था। जहां उन्हें कई तरह की परेशानी से भी जूझना पड़ा।

पर हिम्मत नही हारे और डटे रहे। इसके अलावा अंबाला, दिल्ली, कठुआ, जम्मू, श्रीनगर सहित प्रमुख स्थानों पर उनकी पोस्टिंग होती रही। अंबाला से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने बताया कि वह गांव के युवाओं को खासतौर से मेडिकल पास करने को लेकर ट्रेनिंग देंगे। अक्सर युवा भर्ती के दौरान फिटनेस में तो निकाल लेते हैं। लेकिन मेडिकल में अनफिट हो जाते हैं। इसकी बारीकी वे युवाओं को बताएंगे। ताकि उनका चयन आसानी से हो। महेंद्र दास 2004 से आर्मी में पदस्थ हुए, 17 साल की सेवा कर गांव लौटे। अब वे गांव के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। उनके पिता जनक साहू खेती किसानी करते हैं। उनका एक भाई होमेन्द्र दास कॉलेज में प्रोफेसर है।

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