समता भवन में प्रवचनमाला के दौरान पूज्यश्री ने दिया संयम, सादगी, नशामुक्ति और मानव कल्याण का संदेश
बालोद। आगम ज्ञाता, युग निर्माता पूज्य आचार्य भगवान 1008 श्री रामलाल जी मसा के सुशिष्य एवं शासन दीपक पूज्य अक्षयमुनी जी मसा ने समता भवन में आयोजित प्रवचनमाला के दौरान श्रद्धालुओं को जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सूत्रों से अवगत कराया। पूज्यश्री के प्रेरक प्रवचन को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में पूज्य अक्षयमुनी जी मसा ने कहा कि “होनहार को नमस्कार जरूर करना चाहिए, क्योंकि जो होने वाला है वह होकर ही रहेगा। होनहार को चुनौती देना बुद्धिमानी नहीं है।” उन्होंने कहा कि मनुष्य स्वयं को इस संसार का स्वामी समझने की भूल न करे। जल, जंगल, जमीन और वायु ही सृष्टि के वास्तविक आधार हैं। यदि प्रकृति के ये आधार सुरक्षित हैं, तभी मानव जीवन भी सुरक्षित रह सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी शक्ति, समय और ऊर्जा का उपयोग ऐसे कार्यों में करना चाहिए, जिनसे समाज और समस्त प्राणियों का कल्याण हो।
पूज्यश्री ने वर्तमान भौतिकतावादी दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में अनेक वस्तुएं विलासिता की हो सकती हैं, लेकिन अपने शरीर को कभी भी विलासिता और आरामपरस्ती का साधन नहीं बनाना चाहिए। जिस दिन शरीर अत्यधिक आराम का आदी हो जाता है, उसी दिन से अनेक रोगों के प्रवेश का मार्ग खुलने लगता है। स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए संयम, परिश्रम और सादगी को अपनाना आवश्यक है।
प्रवचन के दौरान पूज्य अक्षयमुनी जी मसा ने नशामुक्ति का प्रभावी संदेश देते हुए कहा कि नशा किसी भी प्रकार का हो, वह व्यक्ति के जीवन के दर्द और समस्याओं को समाप्त नहीं कर सकता। नशे का प्रभाव केवल कुछ समय के लिए व्यक्ति को वास्तविकता से दूर रखता है, लेकिन जैसे ही नशे का असर समाप्त होता है, वही पीड़ा और समस्याएं फिर सामने खड़ी हो जाती हैं। इसलिए नशा जीवन की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि नाश की जड़ है। प्रत्येक व्यक्ति को नशे से सदैव दूर रहकर स्वस्थ और संयमित जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में संयम, सदाचार, सेवा और मानव कल्याण को अपनाने की प्रेरणा दी। पूज्यश्री ने कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक है, जब उसके कर्मों से स्वयं के साथ-साथ समाज और अन्य जीवों का भी कल्याण हो। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रकृति के संरक्षण, सादगीपूर्ण जीवन, नशामुक्त समाज और सेवा की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
पूज्य अक्षयमुनी जी मसा के प्रेरणादायी प्रवचन से श्रद्धालुओं को जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और मानवता के कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।











