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राज्य सूचना आयुक्त जायसवाल पहुंचे बालोद, अफसरों से कहा – शासकीय कार्यों, दस्तावेजों और कार्यक्रमों को विभागीय वेबसाईट में प्रदर्शित करें ताकि आम नागरिक को आवेदन लगाने की जरूरत ही ना पड़े, जानिये RTI की नियमावली….

बालोद- छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयुक्त धनवेन्द्र जायसवाल ने संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में सूचना का अधिकार विषय पर आयोजित जिला स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेही बनाना सूचना का अधिकार का मूल उद्देश्य है। राज्य सूचना आयुक्त श्री जायसवाल ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम आम जनता की भलाई के लिए बनाया गया है। नागरिकों के द्वारा शासकीय योजनाओं, कार्यक्रमों और कार्यों की जानकारी मांगने पर निर्धारित समय सीमा में आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराने का दायित्व हमारा है। शासकीय कार्यों, दस्तावेजों और कार्यक्रमों को विभागीय वेबसाईट में प्रदर्शित करें , ताकि आम नागरिक को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन लगाने की जरूरत ही ना पड़े। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी श्री विनायक शर्मा, एस.डी.एम. गुण्डरदेही श्री भूपेन्द्र अग्रवाल, एस.डी.एम. डौण्डीलोहारा श्रीमती प्रेमलता चंदेल, एस.डी.एम. गुरूर श्रीमती रश्मि वर्मा, डिप्टी कलेक्टर श्री सुब्रत प्रधान उपस्थित थे।

ये भी है नियम
राज्य सूचना आयोग के संयुक्त संचालक धनंजय राठौर ने कहा कि शासकीय गतिविधियों को पूर्णतः पारदर्शी बनाना है। आवेदक को समय-सीमा के भीतर जानकारी दें अन्यथा निर्धारित समय-सीमा 30 दिवस के बाद आवेदक को निःशुल्क जानकारी देनी होगी। श्री राठौर ने कहा कि सूचना आयोग पेनाल्टी लगाने वाली संस्था नहीं है, लेकिन जानबूझकर जानकारी नहीं देने अथवा गलती करने पर जनसूचना अधिकारी पर पेनाल्टी लगाना जरूरी हो जाता है। ऐसी स्थिति से जनसूचना अधिकारी को बचना चाहिए।
श्री राठौर ने कहा कि हर नागरिक को जानने का मौलिक अधिकार है। सूचना का अधिकार अधिनियम शासन के कार्यो को पारदर्शी बनाना है। इसमें पहली कड़ी जनसूचना अधिकारी हैं। ये अधिकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के मेरूदण्ड हैं। इसलिए जनसूचना अधिकारी अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदनों को स्वयं पढ़े। इससे गलती की संभावना कम होगी। इसमें जानकारी देने की समय-सीमा और शुल्क निर्धारित है। जनसूचना अधिकारी इसका विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कार्यशाला में स्पष्ट किया कि जनसूचना अधिकारी समय सीमा में आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराने में असमर्थ है तो आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपील कर सकता है और प्रथम अपीलीय अधिकारी निर्णय देने के बाद उसे समय सीमा में कार्यान्वित कराना प्रथम अपीलीय अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने जनसूचना अधिकारियों से कहा कि जब आवेदक सूचना का अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत करता है, तो आवेदन पत्र को ध्यान से पढ़े, आवेदन पत्र में एक से अधिक विषय की जानकारी चाही गई है, तो केवल एक विषय की जानकारी आवेदक को दी जा सकती है। इसी तरह सशुल्क जानकारी देने की स्थिति पर शुल्क की गणना भी आवेदक को दी जाए और आवेदक द्वारा शुल्क जमा करने के पश्चात् ही वांछित जानकारी की फोटोकॉपी उपलब्ध कराई जाए। श्री राठौर ने कहा कि आवेदक को जानकारी देते समय जनसूचना अधिकारी का नाम, पदनाम का भी स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी कार्यालय से संबंधित नहीं है, तो उसे संबंधित कार्यालय को 5 दिवस के भीतर आवेदन पत्र को अंतरित किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन को पारदर्शी बनाने के लिए ही सूचना का अधिकार अधिनियम बनाया गया है। जनसूचना अधिकारी अधिनियम के नियमों और उनकी बारीकियों को समझ सकें, इसलिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। श्री राठौर ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शुल्क के रुप में संलग्न स्टाम्प छत्तीसगढ़ राज्य का है तभी स्वीकार करें अन्य राज्य के होने पर अमान्य करते हुए वापस कर दें। कार्यशाला में राज्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयोग ने संयुक्त संचालक ने जनसूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारी के प्रश्नों और शंकाओं का समाधान किया। एक दिवसीय कार्यशाला में सभी विभाग के जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यशाला की समाप्ति पर अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी श्री शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

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